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  4. Curbing internal sabotage poses a major challenge for both the BJP and Congress in the Datia by-election.

दतिया उपचुनाव: भाजपा-कांग्रेस के सामने भीतरघात रोकने की बड़ी चुनौती, डैमेजट कंट्रोल में जुटे सियासी दिग्गज

Datia by-election
भोपाल। दतिया विधानसभा उपचुनाव में इस बार मुकाबला केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच नहीं है, बल्कि दोनों दलों के लिए अपने-अपने असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं को साधना भी सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। दतिया उपचुनाव ने दिग्गज नेता नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद भाजपा ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने पूर्व विधायक घनश्याम सिंह पर दांव लगाया है।  टिकट वितरण के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों में खुलकर अंसतोष की सुर सुनाई दे रहे है, ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल पूरी ताकत से  साथ डैमेज कंट्रोल में जुट गए  है। 
 
भाजपा में नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से भीतरघात की बड़ी आंशका- दतिया उपचुनाव में भाजपा में पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद उनके समर्थकों ने जिस तरह बवाल काटा और जिस तरह से  समर्थकों में नाराजगी देखी जा रही है, उससे चुनाव में भाजपा के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। दरअसल डॉ. नरोत्तम मिश्रा 15 साल तक दतिया से विधायक रहे है और दतिया भाजपा जिला संगठन पर उनका एकाधिकार रहा। संगठन से लेकर बूथ स्तर तक उनका मजबूत नेटवर्क माना जाता है।

दतिया विधानसभा के मंडल अध्यक्ष से लेकर बूथ कमेटी में नरोत्तम मिश्रा के समर्थक ही हावी है। ऐसे में यदि उनके समर्थक पूरी सक्रियता से चुनाव प्रचार में नहीं उतरते या साइलेंट रहकर काम करते हैं, तो भाजपा के लिए यह नुकसानदेह साबित हो सकता है। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि असंतुष्ट कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चुनाव को एकजुटता के साथ लड़ा जाए, ताकि भीतरघात की किसी भी संभावना को खत्म किया जा सके।
 
यहीं कारण है कि नरोत्तम मिश्रा को मानने के लिए पार्टी के बड़े नेता पूरी ताकत से जुटे हुए है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री निवास पर नरोत्तम मिश्रा के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल की हुई बैठक को डैमेज कंट्रोल की ही रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इस मुलाकात के बाद नरोत्तम मिश्रा पार्टी कार्यकर्ताओं की नारजगी को क्रिया की प्रतिक्रिया बताते हुए सब कुछ ठीक होने का दावा कर रहे है। वहीं रविवाार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की अगुवाई में दतिया जिले की भाजपा संगठनात्मक बैठक हुई, जिसमें दिग्गज नेताओं ने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को एकजुटता का मंत्र दिया। 
कांग्रेस में डैमेज कंट्रोल में जुटे पटवारी-दिग्विजय-वहीं दूसरी ओर कांग्रेस में घनश्याम सिंह को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद टिकट के दावेदार रहे अवधेश नायक की नाराजगी  खुलकर सामने आ गई है। रविवार को अवधेश नायक के निर्दलीय चुनाव में उतरने के बयान ने कांग्रेस के बड़े नेताओं के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी। अवधेश नायक के इस बयान के बाद जीतू पटवारी और कांग्रेस के बड़े  नेता तुरंत अवधेश नायक के निवास पर पहुंचे और उनके साथ बंद कमरे में बैठक की।  
 
वहीं 2023 के विधानसभा चुनाव में दतिया से  चुनाव जीतने वाले पूर्व विधायक राजेंद्र भारती अपने बेटे या पत्नी में से किसी एक को  टिकट दिलवाने की पुरजोर कोशिश कर रहे थे, ऐसे में अब घनश्याम सिंह के टिकट के बाद उनके समर्थकों में अंसतोष की बातें सामने आ रही है। राजेंद्र भारती  को मानने के लिए  भी जीतू पटवारी और दिग्विजय सिंह उनके घर पहुंचे और तीनों ही नेताओं की बंद कमरे में बैठक हुई। 
पूर्व विधायक राजेंद्र भारती और वरिष्ठ नेता अवधेश नायक के समर्थकों में असंतोष की चर्चाएं हैं। दोनों नेताओं का अपने-अपने क्षेत्रों और समाज में प्रभाव माना जाता है। यदि यह नाराजगी चुनाव तक बनी रहती है तो कांग्रेस को भी भीतरघात या कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता का सामना करना पड़ सकता है। पार्टी के वरिष्ठ नेता लगातार संवाद और बैठकें कर असंतुष्ट नेताओं को मनाने की कोशिश में जुटे हैं।
 
दतिया विधानसभा चुनाव के पिछले चुनाव नतीजों को देखते तो जीत-हार का अंतर बहुत ही कम रहता है। ऐसे में खुला विरोध जितना नुकसान नहीं पहुंचाता, उससे अधिक असर साइलेंट वोटिंग, कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता और अंदरूनी असंतोष डाल सकता है। यही कारण है कि दोनों दलों का पूरा फोकस अब केवल चुनाव प्रचार पर नहीं, बल्कि संगठन को एकजुट रखने पर भी है।
 
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विकास सिंह
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