वियाग्रा पर भी भारी हैं वाजीकरण रसायन

वाजीकरण रसायनों को कामशक्ति बढ़ाने व यौन जीवन को खुशहाल बनाने का दावा करने वाली दवाओं के रूप में बेचा जा रहा है। वैज्ञानिक प्रमाणीकरण के अभाव में ये दवाएँ अपेक्षित लोकप्रियता हासिल नहीं कर पा रही हैं।
उन्होंने बताया कि हालाँकि बाजार में ऐसे रसायनों को कामशक्ति बढ़ाने व यौन जीवन को खुशहाल बनाने का दावा करने वाली दवाओं के रूप में बेचा जा रहा है, लेकिन वैज्ञानिक प्रमाणीकरण के अभाव में ये दवाएँ देशी व विदेशी बाजार में अपेक्षित लोकप्रियता हासिल नहीं कर पा रही हैं। हमारा शोध इसी कमी को पूरा करने की दिशा में है और यह अपनी तरह का पहला शोध है।

प्रो. दीक्षित के निर्देशन में 'वाजीकरण' रसायन के फाइटोकेमिकल एवं फार्मोकोलाजिकल प्रभाव विषय पर शोध कर रहे छात्र नागेंद्रसिंह चौहान ने बताया फिलहाल उनका शोध सफेद मूसली, ताल मखाना, अकरकरा, साजन मिश्री, साजन पंजा व शिवलिंगी नामक औषधीय पौधों पर केन्द्रित है।

चौहान ने बताया कि अब तक के शोध निष्कर्ष व चूहों पर किए गए प्रयोगों से यह पता चला है कि इन औषधीय घटकों में मानव शरीर के यौवन काल की उमंग-तरंग को लंबे समय तक बरकरार रखने की अद्भुत ताकत है।

उन्होंने कहा कि भले ही इन पौधों से बनी दवाओं को कामशक्ति बढ़ाने व यौन जीवन को खुशहाल बनाने वाला बताकर बेचा जाता है, परंतु ये जड़ी-बूटियाँ पूरे शरीर को सेहतमंद बनाने का काम करती हैं।

हाल ही में स्विटजरलैंड में आयोजित 57वीं इंटरनेशनल कांग्रेस एंड एनुअल मीटिंग ऑफ द सोसायटी फॉर मेडिसिनल प्लांट एंड नेचुरल प्रोडक्ट रिसर्च में 87 देशों से आए वैज्ञानिकों व शोधार्थियों के बीच नागेन्द्र के शोध-पत्र को सर्वेश्रेष्ठ शोध प्रस्तुति का अवॉर्ड दिया गया।

इसी शोध कार्य पर नेशनल फेलोशिप हासिल करने वाले चौहान ने बताया कि विभिन्न वाजीकरण रसायनों को मिलाकर एक नई औषधि की खोज की गई है, जिसका चूहों पर भी सफल प्रयोग किया जा चुका है व अगले चरण में मनुष्यों पर इसका प्रयोग होगा।

सागर| भाषा|
कामशक्ति बढ़ाने व यौन जीवन को खुशहाल बनाने का दावा करने वाली दवाओं का बाजार दुनियाभर में तेजी से फैलता जा रहा है। इसमें से आधे से कुछ कम हिस्सा जड़ी-बूटी आधारित दवाओं का है।वैज्ञानिक प्रमाणन के अभाव में भारत की आयुर्वेदिक दवाएँ इस बाजार में अपना जलवा नहीं दिखा पा रही हैं, लेकिन सागर विश्वविद्यालय में चल रहा शोध कार्य भारत को इस बाजार का सिरमौर बनने की राह दिखा सकता है।डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के फार्मेसी विभाग के प्रोफेसर विनोद दीक्षित ने बताया आयुर्वेद में जीवन में यौवन की उमंग-तरंग को बरकरार रखने के लिए 'वाजीकरण' रसायन के सेवन को जरूरी बताया गया है। ऐसे रसायनों के सेवन से शरीर में वाजी यानी अश्व के समान ताकत पैदा हो सकती है।
उन्होंने कहा कि इनसानों में इन रसायनों का उपयोग आयुर्वेदिक दवाओं के रूप में हजारों साल पहले से ही होता चला आ रहा है। नई ईजाद की गई दवा को पेटेंट कराने के लिए भी कोशिश चल रही है। (भाषा)

 

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