शिवांगी सक्सेना
गेस्ट हाउस में बुधवार सुबह भीषण आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई। आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। हालांकि शुरुआती पड़ताल में अग्नि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन और निर्माण से जुड़ी गडबड़ियों के संकेत मिले हैं। मरने वालों में 9 भारतीय और 12 विदेशी नागरिक शामिल हैं।
हादसे के कुछ वीडियो सामने आए। कई लोगों ने जलती इमारत से छलांग लगा दी। उनकी जान बचाने के लिए स्थानीय निवासियों ने पास की एक दुकान से गद्दे लाकर जमीन पर बिछा दिए।
'फ्लरिश स्टे बी एन बी' पिछले 7-8 साल से हौज रानी इलाके में चल रहा था। इसे केवल 6 कमरे बनाने की इजाजत थी। लेकिन समय के साथ चार मजिलें और बन गईं। इसमें 25 कमरे बना दिए गए। यह गेस्ट हाउस बिना वैध फायर एनओसी के संचालित हो रहा था। इसके बेसमेंट में भी लोग रुके हुए थे।
मालवीय नगर मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 3 के निकट बने इस गेस्ट हाउस में प्रति बिस्तर के हिसाब से सुविधा दी जाती थी। दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) की शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि आग की शुरुआत भूतल पर सीढ़ियों के पास हुई हो सकती है। जांच में यह भी सामने आया है कि इमारत की खिड़कियां सील थीं, जिसके कारण अंदर मौजूद लोगों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो गया। बचाव कार्य में भी मुश्किलें आईं।
स्थानीय लोगों ने बचाया, फंसे लोगों को निकाला
चश्मदीद इसरार अली मौके पर पहुंचने वाले शुरूआती लोगों में थे। उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर फंसे लोगों को बाहर निकालने में मदद की। वह डीडब्ल्यू को बताते हैं, "जैसे ही धुआं दिखाई दिया, हम होटल की ओर दौड़ पड़े। उस समय सुबह करीब 8:45 बजे का समय रहा होगा। हम लगातार लोगों को आवाज देकर बाहर निकलने और जान बचाने के लिए कूदने को कह रहे थे। होटल में कई विदेशी नागरिक भी ठहरे हुए थे। वे हमारी भाषा नहीं समझ पा रहे थे।”
दिल्ली पुलिस के अनुसार आग सुबह करीब 9 बजे लगी। जिसके बाद मौके पर दमकल विभाग की आठ गाड़ियां भेजी गईं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया। हालांकि स्थानीय निवासियों का आरोप है कि दमकल की गाड़ियां 45 मिनट देरी से आईं।
अग्निशमन अधिकारियों ने बताया कि पांच मंजिला यह इमारत गेस्ट हाउस के रूप में संचालित की जा रही थी। यहां ठहरे यात्री बांग्लादेश, अफ्रीका, मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के दूसरे देशों से आए थे। इनमें से अधिकांश लोग अपने परिजनों के साथ चिकित्सा उपचार के लिए दिल्ली पहुंचे थे। पास ही में साकेत के मैक्स अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था।
इसरार ने डीडब्ल्यू बताया, "कई शव बाथरूम और बिस्तरों के नीचे मिले। आग और धुएं से बचने के लिए लोगों ने वहां छिपने की कोशिश की थी। होटल में आने-जाने के लिए केवल एक ही मुख्य गेट था। उस पर इलेक्ट्रॉनिक लॉक लगा हुआ था। आग लगने के बाद बिजली चली गई, जिसके कारण लॉक ने काम करना बंद कर दिया और गेट नहीं खुल सका। कई लोग इमारत में ही फंसे रह गए।"
इलाके के निवासी मोहम्मद अफजल ने बताया कि आग लगने के बाद लोगों को बाहर निकालने के लिए स्थानीय लोगों ने पत्थरों और हथौड़ों की मदद से गेट का लॉक तोड़ा। अफजल बताते हैं कि हौज रानी में इस तरह से संचालित होने वाली यह अकेली इमारत नहीं है। पास में अस्पतालों और कॉलेजों की मौजूदगी के कारण बड़ी संख्या में मरीज, उनके परिजन और छात्र यहां के होटलों और गेस्ट हाउसों में ठहरते हैं। इसी मांग का फायदा उठाने के लिए इलाके में कई ऐसे होटल और गेस्ट हाउस चल रहे हैं।
अफजल ने यह भी कहा,"जांच की जाए तो कई रिहायशी मकानों के बेसमेंट या एक मंजिल को बेड-एंड-ब्रेकफास्ट (बी एंड बी) में बदल दिया गया है। आशंका है कि ये बिना एनओसी से चल रहे हैं। इन सबकी जांच होनी चाहिए।"
मामले की जांच जारी
पुलिस, दमकल विभाग और दूसरी आपातकालीन सेवाओं के संयुक्त प्रयास से कुल 49 लोगों को इलाज के लिए मैक्स अस्पताल साकेत, एम्स ट्रॉमा सेंटर और पंडित मदन मोहन मालवीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें से आठ लोगों को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी अभिलाष कुमार मलिक ने बताया कि इमारत में बेसमेंट, भूतल और उसके ऊपर पांच मंजिलें थीं। हर मंजिल, यहां तक कि छत पर भी कमरे बनाए गए थे। इमारत की बनावट ने अंदर फंसे लोगों की स्थिति को और गंभीर बना दिया।
कुमार ने आधिकारिक बयान में कहा, "इसकी वजह से फंसे लोगों के पास बाहर निकलने की बहुत कम गुंजाइश बची थी। खिड़कियां सील थीं। हवा के आने-जाने का कोई रास्ता नहीं था। ऐसी इमारतें एक शाफ्ट की तरह काम करती हैं, जहां गर्मी और धुआं कुछ ही सेकंड में पूरी इमारत में फैल जाता है। इससे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना बेहद मुश्किल हो गया।"
पुलिस ने बताया कि मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। होटल के मालिक लवकेश बजाज को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। बताया जा रहा है कि लवकेश बजाज के उसी इलाके में दो और गेस्ट हॉउस थे। घटना के बाद से ही इन सभी के गेट पर ताला लग गया और स्टाफ भाग गया।
दिल्ली सरकार में गृह मंत्री आशीष सूद भी घटनास्थल पहुंचे। उन्होंने कहा कि मामले की पड़ताल जारी है। यदि अग्नि सुरक्षा नियमों से संबंधी नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मालवीय नगर अग्निकांड पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने मृतकों के परिजनों को दो लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
बंद किए जाएंगे बी एंड बी
सूत्रों के अनुसार, इमारत के मालिक लवकेश बजाज ने दिल्ली पुलिस को बताया कि उनके पास गेस्ट हाउस के रोजमर्रा के कामकाज की निगरानी के लिए पर्याप्त समय नहीं था। इसलिए उन्होंने इसकी जिम्मेदारी एक अन्य व्यक्ति को सौंप रखी थी, जो बुकिंग, खातों और पूरे प्रबंधन का काम देखता था।
उन्होंने यह भी बताया कि इमारत में किए गए कुछ बदलाव, जैसे कमरों का आकार बढ़ाना और अन्य परिवर्तन, एक अन्य व्यक्ति के सुझाव पर किए गए थे। उस व्यक्ति ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि दिल्ली में कई जगह इसी तरह की व्यवस्था अपनाई जाती है और यह आम बात है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि विदेश मंत्रालय संबंधित देशों के दूतावासों के संपर्क में है और प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
घटना के बाद इलाके में मौजूद सभी होटलों, गेस्ट हॉउस और बी एंड बी ने शटर गिरा दिए। ये सभी मालवीय नगर की संकरी गलियों और आवासीय इलाकों में चल रहे थे। फिलहाल आशीष सूद ने नियमों का उल्लंघन करने वाले सभी बी एंड बी (बेड एंड ब्रेकफास्ट) को तुरंत सील करने के निर्देश दिए हैं।
वहीं, पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि दिल्ली सरकार की बी एंड बी नीति करीब एक महीने पहले ही वापस ले ली गई थी।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आश्वासन दिया कि मामले में तेज कार्रवाई हो रही है। अग्नि सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाली अवैध संपत्तियों, अनधिकृत गेस्ट हाउसों और अन्य प्रतिष्ठानों के खिलाफ पूरे शहर में विशेष अभियान चलाया जाएगा।