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Bengaluru Creche Abuse Case: थर्ड पार्टी डे-केयर पर सवाल, कामकाजी दंपतियों की चिंता बढ़ी

working woman Day Care Safety India
प्रभाकर मणि तिवारी
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में एक आईटी कंपनी के क्रेच में बच्चों के साथ दुर्व्यवहार की घटना ने देश में खासकर कामकाजी दंपतियों की चिंता तो बढ़ाई ही है, थर्ड पार्टी सेवाओं के बढ़ते प्रचलन पर भी सवाल खड़ा कर दिया है। ALSO READ: दुर्गा स्क्वॉड कैसे बदलेगा बंगाल में महिला सुरक्षा का हाल?
 
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले की रहने वाली अनुष्का चटर्जी बेंगलुरु की एक आईटी कंपनी में नौकरी करती है। उनके पति भी एक विदेशी कंपनी में मैनेजर हैं। लेकिन अनुष्का ताजा घटना के बाद अपने बच्चे  के लिए परेशान है। वो डीडब्ल्यू से कहती है, "मैं बच्चे को दफ्तर के क्रेच में छोड़ कर नौकरी करती हूं। पति तो देर रात लौटते हैं। लेकिन ताजा घटना से परेशान हूं।"
 
अनुष्का के घर पर बूढ़ी मां और एक छोटी बहन है, लेकिन वो उनको बच्चे की देख-रेख के लिए नहीं बुला सकती। वो बताती हैं कि उनके ससुराल में भी ऐसा कोई नहीं है जो यहां आकर रह सके।
 
भारत में कामकाजी दंपतियों का कोई सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। मोटे अनुमान के मुताबिक, दक्षिण भारतीय राज्यों में यह आंकड़ा करोड़ों में है। अकेले बेंगलुरु की करीब 1.30 करोड़ की आबादी में इनकी तादाद 15 से 20 लाख के बीच होने का अनुमान है।
 
दरअसल, देश में एकल परिवारों की बढ़ती संख्या ने एक नई समस्या को जन्म दिया है।  वह है बच्चों का लालन-पालन। इसी वजह से शहरी इलाकों में डे-केयर क्रेच की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। निजी क्षेत्र की कई कंपनियां अपने महिला कर्मचारियों की सहूलियत के लिए परिसर में ही क्रेच की सुविधा देती हैं। लेकिन यह सेवा थर्ड पार्टी सर्विस प्रोवाइडरों के जरिए मुहैया कराई जाती है। खासकर बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसी आईटी हब समझे जाने वाले शहरों में ऐसे सर्विस प्रोवाइडरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
 
कोलकाता की मौमिता सान्याल और उनके पति पुणे स्थित एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करते हैं। मौमिता डीडब्ल्यू से बताती है, "परिसर में स्थित क्रेच में बेटी को छोड़ कर वह निश्चिंत हो जाती थी। लेकिन बेंगलुरु की घटना के बाद पता चला कि यह क्रेच भी थर्ड पार्टी की ओर से ही चलाया जाता है। इससे चिंता बढ़ गई है।" उनका कहना है कि फ्लैट और कार की ईएमआई का बोझ होने के कारण वो नौकरी भी नहीं छोड़ सकतीं। ALSO READ: मिस्र के रेगिस्तान में मिला सैंकड़ों साल पुराना शहर
 

थर्ड पार्टी का बढ़ता चलन

जानकारों का कहना है कि देश में विभिन्न क्षेत्रों में आउटसोर्सिंग बढ़ने के कारण थर्ड पार्टी सेवा मुहैया कराने वाली कंपनियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इनमें विभिन्न कंपनियों के सफाईकर्मी और सुरक्षाकर्मी जैसे निचले स्तर के कर्मचारियों के अलावा क्रेच की सुविधा मुहैया कराने वाली कंपनियां शामिल हैं।
 
बच्चों के हित में काम करने वाले एक गैर-सरकारी संगठन के कार्यकर्ता एम। वेणुगोपाल डीडब्ल्यू से कहते हैं, "थर्ड पार्टी की सेवाएं लेना बड़ी कंपनियों के लिए मुफीद है। किसी अप्रिय घटना की स्थिति में उन पर कोई आंच नहीं आती। पूरा दोष इन सर्विस प्रोवाइडरों पर मढ़ दिया जाता है। इसमें कंपनी का फायदा है।"
 
पश्चिम बंगाल की स्टेट चाइल्ड प्रोटेक्शन सोसाइटी की सदस्य निकिता चटर्जी डीडब्ल्यू से कहती हैं, "हम थर्ड पार्टी सर्विस प्रोवाइडरों के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन ऐसे प्रोवाइडरों से क्रेच जैसी अहम सेवा लेने वाली बड़ी कंपनियों की भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। कामकाजी दंपतियों की बढ़ती संख्या के कारण उनके लिए क्रेच की सुविधा बेहद अहम और जरूरी है। बड़ी कंपनियों को थर्ड पार्टी की सेवाएं लेते समय मानवीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और वहां काम करने वालों की निगरानी के लिए एक तंत्र विकसित करना चाहिए।" ALSO READ: सच्ची मुहब्बत के नाम पर कैसे दुनिया को ठग रहे हैं स्कैमर्स
 

कैपजेमिनी घटना में आगे क्या हो रहा है 

कर्नाटक स्टेट कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स के अध्यक्ष संतोष कुमार ने पत्रकारों को बताया, "जिस क्रेच में वह घटना हुई वहां 35 बच्चे रहते थे और 14 कर्मचारी उनकी देख-रेख करते थे। हम इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। बेंगलुरु के ऐसे सभी डे-केयर सेंटरों की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।"
 
इस बीच, कैपजेमिनी कंपनी के जिस डे-केयर क्रेच में वह घटना हुई थी, उसे फिलहाल बंद कर दिया गया है। कंपनी ने एक बयान में कहा है कि वह भारत में अपनी सभी यूनिट्स में डे-केयर सेवा मुहैया कराने वालों की नए सिरे से समीक्षा कर रही है। इसके अलावा इससे प्रभावित महिला कर्मचारियों को कुछ समय के लिए वर्क फ्रॉम होम की सुविधा देने पर भी विचार किया जा रहा है।
 
लेकिन सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि कामकाजी दंपतियों के लिए क्रेच की सुविधा बहुत अहम है। इसलिए इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकार को इस मामले में कुछ नियम तय कर कंपनियों के लिए उसका पालन अनिवार्य करना चाहिए।
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