Bangladesh Student Protest: बाढ़ के बीच परीक्षा पर भड़के छात्र, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज
प्रभाकर मणि तिवारी
भारत में नीट समेत कई परीक्षाओं के पेपर लीक होने के विरोध में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग के बीच पड़ोसी बांग्लादेश में भी नाराज छात्र शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ALSO READ: चैट जीपीटी के ज्यादा इस्तेमाल से दिमाग कमजोर होने का डर
भारत में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग में दिल्ली में अनशन और धरना जारी है। इसमें जाने-माने पर्यावरणविद सोनम वांगचुक भी हिस्सा ले रहे हैं। अब बीते चार-पांच दिनों से बांग्लादेश में छात्रों की नाराजगी लगातार तेज हो रही है। नाराज छात्र देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन कर रहे हैं और शिक्षा मंत्री डॉ। एएनएम एहसानुल हक मिलन के इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं।
क्यों फूटा बांग्लादेश के छात्रों में गुस्सा?
बांग्लादेश में छात्रों की नाराजगी की नाराजगी की वजह से भयावह बाढ़ के बीच हायर सेकेंडरी बोर्ड की परीक्षाएं जारी रखने का सरकार का फैसला है। ये परीक्षाएं बीती दो जुलाई से शुरू हुई थीं, लेकिन बीते सप्ताह से बाढ़ की हालत और बिगड़ी है।
देश फिलहाल साल की सबसे भयावह बाढ़ से जूझ रहा है। इसकी वजह से अब तक कम से 54 लोगों की मौत हो चुकी है और दस लाख से ज्यादा लोग फंस गए हैं। कई इलाके पूरी तरह पानी में डूब गए हैं।
छात्रों ने पहले लगातार होने वाली भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति को ध्यान में रखते हुए सरकार से परीक्षाओं को स्थगित करने की मांग की थी। उनकी दलील थी कि मौसम की वजह से ज्यादातर छात्रों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में बड़ी परेशानी हो रही है। कइयों के मकान डूब गए हैं। लेकिन सरकार ने आगे मौसम में सुधार का दावा करते हुए परीक्षाओं को जारी रखने का फैसला किया। इससे छात्रों की नाराजगी भड़क उठी।
कितने बड़े स्तर पर हो रहा है विरोध प्रदर्शन
नाराज छात्रों ने शिक्षा में राजनीति के दखल का विरोध करते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग में राजधानी ढाका समेत विभिन्न शहरों में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। करीब 19 हजार छात्रों ने सोमवार को होने वाली परीक्षा में भी हिस्सा नहीं लिया।
विरोध-प्रदर्शन के बीच शिक्षा मंत्री की एक टिप्पणी ने छात्रों की नाराजगी की आग में घी डालने का काम किया। उन्होंने आंदोलनकारी छात्रों को 'ब्रायलर मुर्गी' करार दे दिया। उसके बाद आंदोलन और तेज हो गया। राजधानी ढाका में हजारों छात्र संसद भवन के सामने प्रदर्शन कर रहे हैं। कई जगह पुलिस के साथ भी उनकी भिड़ंत हुई। पुलिस उनको तितर-बितर कर रही है। लेकिन कुछ देर बाद ही छात्र दोबारा वहां जुट रहे हैं। देश में कई हाईवे की भी नाकेबंदी की गई है।
विरोध प्रदर्शन में शामिल एक छात्र ने नाम नहीं छापने की शर्त पर डीडब्ल्यू से कहा, "कई छात्रों को कमर तक पानी और कीचड़ में परीक्षा केंद्रों तक पहुंचना पड़ रहा है। सैकड़ों छात्र नाव से वहां तक पहुंच रहे हैं। जलभराव और बाढ़ के कारण सैकड़ों छात्र समय पर परीक्षा केंद्रों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। कुछ छात्रों के लिए तो परीक्षा केंद्र तक पहुंचना संभव ही नहीं है। ऐसे में हमारे पास शांतिपूर्ण आंदोलन के सिवा कोई चारा नहीं बचा है। शिक्षा मंत्री को फौरन इस्तीफा दे देना चाहिए।" ALSO READ: टैक्स चोरी रोक कर अरबों यूरो कमाना चाहती है जर्मन सरकार
छात्रों को अभिभावकों से मिल रहा है पूरा समर्थन
इस आंदोलन को छात्रों के अभिभावकों का भी समर्थन मिल रहा है। एक छात्र के अभिभावक अमीनुल हक डीडब्ल्यू से कहते हैं, "मौजूदा स्थिति में जान-माल की रक्षा ही सबसे बड़ी प्राथमिकता है। लेकिन सरकार को परीक्षा की पड़ी है। जान बची तो परीक्षा तो बाद में भी हो सकती है।"
संसद भवन के सामने छात्रों के आंदोलन को समर्थन देने पहुंची एक छात्र की मां शमीमा खातून (बदला हुआ नाम) डीडब्ल्यू से कहती हैं, "बाढ़ की मौजूदा परिस्थिति में परीक्षा आयोजित करने का फैसला गले से नीचे नहीं उतरता। ऊपर से छात्रों की मांग पर विचार करने की बजाय शिक्षा मंत्री उनको 'ब्रायलर मुर्गी 'कह रहे हैं। सोमवार को करीब 19 हजार छात्र परीक्षा में शामिल नहीं हो सके। इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?"
उनका कहना था, "मैं एक मां के तौर पर छात्रों की मांग का समर्थन करती हूं। यह उनके भविष्य का सवाल है।" ALSO READ: एआई प्रेमियों से बिछड़ने के गम में डूबे चीन के यूजर
बांग्लादेश की संसद में भी गूंजा छात्र आंदोलन का मामला
छात्रों के इस आंदोलन का मुद्दा संसद में भी उठ चुका है। निर्दलीय सांसद रूमीन फरहाना ने संसद में शिक्षा मंत्री से सवाल किया कि आखिर मौजूदा परिस्थिति में परीक्षाएं क्यों नहीं टाली जा रही हैं? इस पर मंत्री का जवाब था कि मौसम विभाग ने सोमवार को बारिश नहीं होने की भविष्यवाणी की थी। मौसम बेहतर रहने के पूर्वानुमान के कारण ही उस दिन देश भर के 27 सौ केंद्रों में परीक्षा आयोजित करने का फैसला किया गया था। लेकिन उस दिन भारी बारिश के कारण कई इलाके नए सिरे से डूब गए थे।
छात्रों के तेज होते आंदोलन के बीच शिक्षा मंत्री ने बुधवार को अपनी टिप्पणी के लिए संसद में माफी मांग ली है। लेकिन इससे परिस्थिति में कोई सुधार नहीं आया है। शिक्षा मंत्री का कहना था, "सरकार सोमवार को भारी बारिश और विभिन्न इलाकों में जलभराव के बावजूद आयोजित तीन परीक्षाओं को दोबारा आयोजित करने पर विचार कर रही है।"
चटगांव गवर्नमेंट गर्ल्स हाई स्कूल की एक वरिष्ठ शिक्षिका फातिमा अख्तर (बदला हुआ नाम) डीडब्ल्यू से कहती हैं, "पूरा जिला बाढ़ में डूबा है। परीक्षा लायक हालात ही नहीं हैं। ऐसे में परीक्षा के आयोजन और उसे जारी रखने का फैसला सही नहीं था। छात्राओं को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में बड़ी परेशानी हो रही है। कई छात्राएं तो चाह कर भी नहीं पहुंच सकती। कई शहरी इलाकों में भी पानी और कीचड़ भरा है। साथ ही लगातार भारी बारिश हो रही है।"
बांग्लादेश के वरिष्ठ पत्रकार रिजवान अहमद डीडब्ल्यू से कहते हैं, "शिक्षा मंत्री के फैसले और टिप्पणी ने छात्रों की नाराजगी भड़का दी है। अब छात्र उनके इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं और वो इस्तीफा नहीं देने पर। ऐसे में फिलहाल गतिरोध टूटने के आसार कम ही हैं।"

