भारत के कप्तान के तौर पर शुभमन गिल ने अपनी पहली टेस्ट सीरीज़ जीत दर्ज की। वेस्टइंडीज़ पर 2-0 की जीत के बाद उन्होंने कहा कि अब वह "टीम के सभी खिलाड़ियों को मैनेज करने की आदत डाल रहे हैं।"
प्रेजेंटेशन समारोह में उन्होंने कहा, "यह सब कुछ सही परिस्थितियों में सही विकल्प चुनने की बात है। मैं कोशिश करता हूं कि जिस स्थिति में हम हैं, उसमें सबसे सही निर्णय लिया जाए। कभी-कभी आपको कुछ कड़े फैसले भी लेने पड़ते हैं। उस एक्स-फ़ैक्टर को चुनना होता है, जिनसे आपको रन या विकेट मिल सकते हैं।"
सात टेस्ट में चार जीत किसी भी कप्तान के लिए शानदार शुरुआत है, लेकिन जब आप भारत की कप्तानी करते हैं तो इसके साथ अतिरिक्त जिम्मेदारी भी आती है। दिल्ली टेस्ट में भारत ने 270 रन की बढ़त के बाद वेस्टइंडीज़ को फ़ॉलो-ऑन दिया। इसके बाद दूसरी पारी में जॉन कैंपबेल और शे होप के बीच 177 रन की तीसरे विकेट की साझेदारी हुई और मैच पांचवें दिन तक पहुंच गया।
भारत के कप्तान के तौर पर शुभमन गिल ने अपनी पहली टेस्ट सीरीज़ जीत दर्ज की। वेस्टइंडीज़ पर 2-0 की जीत के बाद उन्होंने कहा कि अब वह "टीम के सभी खिलाड़ियों को मैनेज करने की आदत डाल रहे हैं।"
प्रेजेंटेशन समारोह में उन्होंने कहा, "यह सब कुछ सही परिस्थितियों में सही विकल्प चुनने की बात है। मैं कोशिश करता हूं कि जिस स्थिति में हम हैं, उसमें सबसे सही निर्णय लिया जाए। कभी-कभी आपको कुछ कड़े फैसले भी लेने पड़ते हैं। उस एक्स-फ़ैक्टर को चुनना होता है, जिनसे आपको रन या विकेट मिल सकते हैं।"
सात टेस्ट में चार जीत किसी भी कप्तान के लिए शानदार शुरुआत है, लेकिन जब आप भारत की कप्तानी करते हैं तो इसके साथ अतिरिक्त जिम्मेदारी भी आती है। दिल्ली टेस्ट में भारत ने 270 रन की बढ़त के बाद वेस्टइंडीज़ को फ़ॉलो-ऑन दिया। इसके बाद दूसरी पारी में जॉन कैंपबेल और शे होप के बीच 177 रन की तीसरे विकेट की साझेदारी हुई और मैच पांचवें दिन तक पहुंच गया।
फ़ॉलो-ऑन के सवाल पर गिल ने कहा, "हम लगभग 300 रन आगे थे और विकेट काफ़ी डेड था। हमने सोचा कि अगर हम 500 रन भी बना लें तो हमें पांचवें दिन छह या सात विकेट लेने होंगे, जो मुश्किल हो सकता था।"
नितीश कुमार रेड्डी इस एकादश में तेज़ गेंदबाज़ी ऑलराउंडर के तौर पर खेलें, लेकिन उन्होंने पूरे मैच में एक भी ओवर नहीं फेंका। गिल ने कहा, "[उन्होंने] इस मैच में ओवर नहीं फेंका, लेकिन हम नहीं चाहते कि खिलाड़ी सिर्फ़ विदेशों में ही खेलें। इससे उन पर बहुत दबाव पड़ता है। अगर हम कुछ खिलाड़ियों को तैयार करना चाहते हैं, जो हमें विदेशों में जीत दिला सकें, तो हमें उन्हें मौके देने होंगे।"