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आरबीआई मौद्रिक नीति: लगातार दूसरी बार रेपो रेट 5.25% पर बरकरार, लोन की EMI में नहीं होगी बढ़ोतरी

RBI Monetary Policy
RBI Monetary Policy: रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा। इस फैसले से अब लोन की EMI नहीं बढ़ेगी। यानी आपके होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की मासिक किस्त में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी।
 
भारतीय रिजर्व बैंक ने रियल GDP ग्रोथ का अनुमान अब 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया गया है। रेपो रेट को स्थिर रखकर आरबीआई ने एक ओर देश की आर्थिक रफ्तार को बनाए रखा है। दूसरी तरफ पश्चिम एशिया में जारी संकट की वजह से कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों पर भी उसकी नजर है।
 
रेपो वह ब्याज दर है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए केंद्रीय बैंक से कर्ज लेते हैं। आरबीआई ने इसके साथ मौद्रिक नीति रुख को ‘तटस्थ’ बनाए रखा है। इसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक स्थिति के हिसाब से नीतिगत दर में समायोजन को लेकर लचीला बना रहेगा।
 

मौद्रिक नीति की 6 खास बातें 

  • नीतिगत दर रेपो को उम्मीद के मुताबिक 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा।
  • चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को घटाकर 6.6 प्रतिशत किया। पहले इसके 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान था। 
  • 2026-27 के लिए खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 4.6 प्रतिशत था।
  • RBI को अब अर्थव्यवस्था की रफ्तार पहले के मुकाबले थोड़ी धीमी रहने की आशंका है।
  • विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए RBI पूरी तरह सतर्क।
  • सरकार ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकारी बॉन्ड में निवेश पर कैपिटल गेन टैक्स खत्म कर दिया है।
 

क्या बोले RBI गर्वनर संजय मल्होत्रा?

गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने ग्लोबल उथल-पुथल के इस दौर में पहले के ऐसे ही दौरों की तुलना में कहीं बेहतर बुनियादी मजबूती के साथ प्रवेश किया है। हमें भरोसा है कि हम कम से कम नुकसान के साथ इन झटकों का सामना कर लेंगे।
 
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में, ग्लोबल अर्थव्यवस्था में काफ़ी अनिश्चितता रही है, अहम व्यापारिक रास्तों और सप्लाई चेन में रुकावटें आई हैं, बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा है और बिजनेस को लेकर सावधानी का माहौल रहा है। मैं सबसे पहले इस बात पर जोर देना चाहूंगा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने ग्लोबल उथल-पुथल के इस दौर में पहले के ऐसे ही दौरों की तुलना में कहीं बेहतर बुनियादी मजबूती के साथ प्रवेश किया है। हमें भरोसा है कि हम कम से कम नुकसान के साथ इन झटकों का सामना कर लेंगे।
 
आरबीआई के इस फैसले से इकोनॉमी को भी मजबूती मिलेगी क्योंकि ब्याज दरें बढ़ने का डर खत्म होने से बाजार में घरों और नई गाड़ियों की डिमांड बढ़ेगी। इससे प्रॉपर्टी और ऑटोमोबाइल सेक्टर को रफ्तार मिलेगी।
edited by : Nrapendra Gupta
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