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Last Updated :मुंबई , शुक्रवार, 29 मई 2026 (13:19 IST)

RBI ला रहा है प्लास्टिक के नोट! न फटेंगे, न गलेंगे; जानिए कागजी नोटों की जगह क्यों पड़ी इसकी जरूरत

plastic currency
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में करेंसी नोटों की लगातार बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए प्लास्टिक या पॉलीमर नोट छापने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। यह नोट लंबे समय तक ना फटेगा और ना ही गलेगा। साथ ही इसे बनाने की लागत भी कम आएगी।
 
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पटना और मुंबई में हुई केंद्रीय बैंक की पिछली दो बोर्ड बैठकों में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई है। ऐसी संभावना है कि आम जनता के लिए प्लास्टिक नोटों के इस्तेमाल का पायलट प्रोजेक्ट जल्द ही शुरू किया जा सकता है। RBI की वित्त वर्ष 2025 की सालाना रिपोर्ट से पता चला है कि कागजी नोटों की छपाई पर होने वाला खर्च पिछले वित्त वर्ष के 5,101.4 करोड़ रुपए से बढ़कर 6,372 रुपए हो गया था।
 
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कहां से आया रुपया

रुपया शब्द संस्कृत के रुप्यकम से आया है। इसका मतलब होता है चांदी का सिक्का। शुरुआत में जो मूल रुपया इस्तेमाल में लाया जाता था वो चांदी का होता था, इसकी वजह से इसका नाम रुपया पड़ा। मध्यकाल में भारत में रुपए का प्रयोग सबसे पहले सूरी वंश के शासक शेरशाह सूरी ने किया था। उन्होंने देश पर 1540 से 1545 तक राज किया था। उस समय 10 ग्राम सोने से बने सिक्कों को रुपया कहा जाता था। उन्होंने ही सोने के साथ ही तांबे का भी सिक्का चलाया।
 

देश में कबसे छप रहे हैं कागज के नोट?

पहली बार देश में कागज के नोटों का प्रचलन 1861 के पेपर करेंसी एक्ट के बाद शुरू हुआ था। उससे पहले देश में सिक्कों का प्रचलन था। पहली कागजी मुद्रा विक्टोरिया पोट्रेट मुद्रा थी। ये नोट 10, 20, 50, 100 और 1000 रुपए के नोट में उपलब्ध थे। नोट पर क्वीन की तस्वीर थी और यह 2 भाषाओं में उपलब्ध थे। वर्ष 1923 में जॉर्ज पंचम की तस्वीर के साथ ही अधिक भाषाओं और विवरण वाले नोट प्रकाशित हुए। नोटों की प्रिटिंग बैंक ऑफ इंग्लैंड में होती थी। 1928 में भारत पहली बैंक नोट प्रेस नासिक में स्थापित हुई।
 

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया कब से छाप रहा है नोट?

रिजर्व बैक भारत की अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करता है। यह केंद्रीय बैंक भारत में बैंकिंग प्रणाली भी संचालित करता है। 1935 में रिजर्व बैंक की स्थापना रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ऐक्ट 1934 के अनुसार हुई थी। 1938 में RBI ने सबसे पहले 5 रुपए का नोट जारी किया। बाद में इसी वर्ष 10, 100, 1000 और 10,000 रुपए के नोट जारी किए गए। 1940 में 1 रुपए का नोट जारी हुआ और फिर 1943 में 2 रुपए का नोट जारी कर दिया गया।
 
आजादी से पहले आरबीआई स्वतंत्र बैंक हुआ करता था लेकिन स्वतंत्रता के बाद इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया। पूरे भारत में रिजर्व बैंक के कुल 29 क्षेत्रीय कार्यालय हैं। बैंक का मुख्यालय मुंबई में स्थित है। मौद्रिक नीति तैयार करना, उसका कार्यान्वयन और निगरानी करना आदि महत्वपूर्ण कार्य रिजर्व बैंक के ही जिम्मे हैं। मुद्रा जारी करना, उसका विनिमय करना और परिचालन योग्य न रहने पर उन्हें नष्ट करना भी RBI का काम है। आज भी देश में जारी हर नोट पर रिजर्व बैंक के गर्वनर के साइन होते हैं।

40 से ज्यादा देशों में चलती है प्लास्टिक करेंसी

इस तकनीक की शुरुआत सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया ने 1988 में की थी। दुनिया भर में 40 से अधिक देश प्लास्टिक (पॉलिमर) करेंसी का उपयोग पूर्ण या आंशिक रूप से कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, कनाडा, विएतनाम और मालदीव जैसे देशों में केवल प्लास्टिक के नोट ही चलते हैं। इन देशों ने कागज के नोट छापना पूरी तरह बंद कर दिया है। सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, सऊदी अरब, चिली और मेक्सिको समेत कई देशों में कुछ चुनिंदा नोट प्लास्टिक के हैं। यहां कागज के साथ ही प्लास्टिक के नोट भी चलते हैं।
 

क्या होगा फायदा?

  • ये कागजी नोटों की तुलना में लगभग 2.5 गुना ज्यादा चलते हैं।
  • ये पानी, चाय या कॉफी गिरने से खराब नहीं होते और इन पर गंदगी नहीं चिपकती।
  • फटने या कटने के बाद इन नोटों को रिसाइकिल करके अन्य प्लास्टिक उत्पाद बनाए जा सकते हैं।
लेखक के बारे में
नृपेंद्र गुप्ता
नृपेंद्र गुप्ता पिछले 21 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं। प्रिंट एवं डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य का अनुभव। वर्तमान में वेबदुनिया की न्यूज टीम में सहायक संपादक के रूप में कार्यरत हैं।   अनुभव : नृपेंद्र गुप्ता 2 दशक से ज्यादा समय से प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में कार्य.... और पढ़ें