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पेट्रोल-डीजल और घरेलू रसोई गैस सिलेंडर हो सकते हैं महंगे, जल्द हो सकता है ऐलान
वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने के बावजूद अप्रैल 2022 से खुदरा ईंधन कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे सरकारी तेल कंपनियों पर भारी दबाव बढ़ गया है।
पिछले सप्ताह पेट्रोलियम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी थी कि सरकारी तेल विपणन कंपनियां पेट्रोल पर करीब 20 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 100 रुपये प्रति लीटर का नुकसान झेल रही हैं। इसके बावजूद कंपनियां फिलहाल खुदरा कीमतों को स्थिर बनाए हुए हैं।
बीते 4 वर्ष: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल में भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े।
— Hardeep Singh Puri (@HardeepSPuri) May 1, 2026
बीते 60 दिन: Military conflict व Strait of Hormuz के बंद होने के कारण कच्चे तेल के आयात की लागत तेज़ी से बढ़ी, फिर भी देश में ईंधन के दाम नहीं बढ़े।
जबकि इसी अवधि में… pic.twitter.com/JlczGAtTqL
इस बीच अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें हाल ही में चार साल के उच्चतम स्तर 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, हालांकि बाद में इसमें थोड़ी नरमी आई, लेकिन कीमतें अब भी 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और होरमुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर असर के कारण आपूर्ति बाधित हो रही है।
सूत्रों के अनुसार, कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है, हालांकि तेल विपणन कंपनियां अभी खुदरा दरों को स्थिर रखने की कोशिश कर रही हैं। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने उद्योग की ओर से कहा है कि बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई के चलते वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। इसका असर होरमुज़ जलडमरूमध्य पर भी पड़ा है, जो वैश्विक तेल व्यापार का एक महत्वपूर्ण मार्ग है और जहां से दुनिया के करीब 20% तेल का परिवहन होता है। Edited by : Sudhir Sharma
