Gold Import India: सोने के आयात में 70% गिरावट, मोदी की अपील और 15% शुल्क का असर
Gold Import : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील और 13 मई से शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी किए जाने के बाद सोने के आयात में भारी गिरावट। एक महीने में देश में सोने का आयात पहले के 75-100 टन से करीब 70 फीसदी घटकर 30 फीसदी रह गया है। हालांकि ज्यादा कीमतों की वजह मूल्य के लिहाज से मई में सोने का आयात सालाना आधार पर 34 फीसदी बढ़कर 3.41 अरब डॉलर पहुंच गया। ALSO READ: Top News 19 June : हार्मुज स्ट्रेट से अमेरिकी नाकेबंदी हटी, ईरान से वार्ता टली; सोने के आयात में 70% गिरावट
आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-मई के दौरान सोने का आयात 60.14 फीसदी बढ़कर 9.04 अरब डॉलर पहुंच गया। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर मूल्य का सोना खरीदा था, जो सालाना आधार पर 24 फीसदी की बढ़ोतरी है। हालांकि, मात्रा के लिहाज से इसमें 4.76 फीसदी की गिरावट आई और यह 721.03 टन रहा। देश के कुल आयात में सोने की हिस्सेदारी पांच फीसदी से अधिक है।
क्या है आयात में 70% की गिरावट का मतलब?
यदि किसी महीने में आयात में 70% की गिरावट दर्ज हुई है, तो यह आमतौर पर संकेत देता है कि ऊंची कीमतों और कमजोर मांग के कारण आयातकों ने नई खरीद को काफी हद तक रोक दिया है। यह जरूरी नहीं कि लोगों की सोने में रुचि खत्म हो गई हो, महंगे इंपोर्ट टैक्स की वजह से भी इसी खरीदारी फिलहाल टली हुई है। ALSO READ: 30,000 करोड़ का NSE IPO! टूट सकता है LIC और Hyundai का रिकॉर्ड, जानिए कौन बेच रहा है सबसे ज्यादा शेयर
भारत में क्यों घट रहा है सोने का आयात?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील की है। इसके साथ ही भारत में सोने के आयात में गिरावट के पीछे कई कारण हैं, जिनमें सबसे प्रमुख हैं:
सोने की ऊंची कीमतें : अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची हैं। भारत में भी 24 कैरेट सोना 1.5 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंचने के बाद उपभोक्ताओं की खरीदारी प्रभावित हुई है। कीमत बढ़ने से ज्वेलरी की मांग घटती है और आयात कम हो जाता है।
भू-राजनीतिक अनिश्चितता में कमी: जब वैश्विक तनाव बढ़ता है तो निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोना खरीदते हैं। लेकिन यदि अमेरिका-ईरान जैसे संकटों में तनाव कम होने की उम्मीद बनती है, तो सोने की मांग कमजोर पड़ सकती है।
आयात शुल्क और कर व्यवस्था : सरकार द्वारा सोने के आयात पर लगने वाले शुल्क और नियमों में बदलाव भी आयात को प्रभावित करते हैं। अधिक लागत होने पर आयातक खरीद कम कर देते हैं।
घरेलू मांग में नरमी : शादी-ब्याह और त्योहारों के सीजन के बाहर आमतौर पर ज्वेलरी की मांग कम रहती है। ऊंची कीमतों के कारण उपभोक्ता खरीद टाल रहे हैं या हल्के वजन के आभूषण चुन रहे हैं।
रुपये और डॉलर का असर : सोने का आयात डॉलर में होता है। यदि रुपया कमजोर होता है तो आयात महंगा हो जाता है, जिससे आयातक खरीद घटा सकते हैं।
रीसाइक्लिंग और पुराने सोने की बिक्री : कीमतें बढ़ने पर लोग पुराने गहने बेचते हैं। इससे बाजार में घरेलू स्तर पर सोने की उपलब्धता बढ़ती है और आयात कम होता है।
edited by : Nrapendra Gupta
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