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केरल में UDF की ऐतिहासिक जीत, LDF का सफाया; BJP ने भी बढ़ाया जनाधार
जितिन राज
यूनाइटेड ड्रेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने केरल विधानसभा चुनाव 2026 में ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव कर दिया है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने 103 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि Left Democratic Front (एलडीएफ) 35 सीटों तक सिमट गया। वहीं Bharatiya Janata Party के नेतृत्व वाले एनडीए ने 3 सीटें जीतकर सीमित लेकिन अहम मौजूदगी दर्ज कराई।
राज्यभर में दिखी सत्ता विरोधी लहर ने एलडीएफ के एक दशक पुराने शासन को खत्म कर दिया। तालीपारंबा, पय्यन्नूर, उडुमा और त्रिक्करिपुर जैसे पारंपरिक वामपंथी गढ़ भी यूडीएफ के खाते में चले गए, जिसे केरल की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan को भी अपने गढ़ धर्मडम में शुरुआती राउंड्स में पीछे रहना पड़ा, जो इस चुनाव में सत्ता विरोधी लहर की तीव्रता को दर्शाता है। चुनाव परिणामों में एलडीएफ को बड़ा झटका लगा, जहां कई वरिष्ठ मंत्री चुनाव हार गए। इनमें वी. शिवनकुट्टी, पी. राजीव, एम.बी. राजेश, वीना जॉर्ज, के.बी. गणेश कुमार समेत कई बड़े नाम शामिल हैं। इसके अलावा के.के. शैलजा और टी.पी. रामकृष्णन जैसे प्रमुख नेता भी हार गए।
यूडीएफ के भीतर Indian National Congress सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और 64 सीटें जीतीं, जबकि Indian Union Muslim League ने 22 सीटों के साथ अहम भूमिका निभाई। वहीं भाजपा ने भी केरल में अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। पार्टी ने नेमोम सीट बरकरार रखने के साथ चथन्नूर और कझाकूट्टम में पहली बार जीत दर्ज की। यह चुनाव नतीजे केरल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत देते हैं, जहां दशकों पुराने राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। Edited by : Sudhir Sharma
