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केरल में CM चेहरे पर फंस गई कांग्रेस, प्रचंड जीत के 9 दिन बाद भी फैसला नहीं, जानें क्यों हो रही देरी?
केरल विधानसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज करने के बाद भी कांग्रेस अब वहां पर अपने मुख्यमंत्री चेहरे का चयन नहीं कर सकी है। पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु जहां पर केरल के साथ विधानसभा चुनाव हुए थे वहां पर मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण हो चुका है लेकिन कांग्रेस अपने गण केरल में मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर फंस गई है। मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर पार्टी के भीतर गहराता असमंजस उसकी सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गया है। चुनाव परिणाम आए नौ दिन बीत चुके हैं, लेकिन मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर नहीं लग सकी है।
दरअसल कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद के लिए कई मजबूत दावेदारों का होना है और अगर आपसी सहमति से मुख्यमंत्री का चयन नहीं हुआ तो केरल में पार्टी दो फाड़ में बंट सकती है। यहीं वजह है कि दिल्ली से लेकर तिरुवनंतपुरम तक लगातार बैठकों और मंथन का दौर जारी है।
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री चयन को लेकर अब दिल्ली में पार्टी आलाकमान जल्द फैसला लेगा, इसको लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के मुरलीधरन तथा वीएम सुधीरन को भी दिल्ली बुलाया गया है ताकि किसी सर्वमान्य नाम पर सहमति बनाई जा सके। जबकि मुख्यमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदार पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल दिल्ली में ही मौजूद है।
केरल में तीन चेहरों के बीच फंसी कांग्रेस-केरल में मुख्यमंत्री पद की दौड़ फिलहाल तीन बड़े नेताओं के बीच सिमट गई है। एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। उनके अलावा वीडी सतीशन और वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्नीथला भी मुख्यमंत्री पद की रेस में शामिल हैं।
बताया जा रहा है कि पार्टी पर्यवेक्षकों अजय माकन और मुकुल वासनिक ने तिरुवनंतपुरम में नव-निर्वाचित विधायकों से व्यक्तिगत रायशुमारी की थी, जिसमें वेणुगोपाल को सबसे ज्यादा समर्थन मिला। कांग्रेस के अधिकांश विधायक केसी वेणुगोपाल के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि 63 कांग्रेस विधायकों में से करीब 47 ने उन्हें अपनी पहली पसंद बताया है। वहीं कुछ विधायकों ने रमेश चेन्नीथला को दूसरी पसंद बताया।
वहीं मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर बने गतिरोध के बीच राहुल गांधी ने केरल कांग्रेस के पूर्व अध्यक्षों और वर्तमान कार्यकारी अध्यक्षों को दिल्ली बुलाकर अलग-अलग दौर की बैठकें की हैं। इससे पहले राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष खरगे ने मुख्यमंत्री पद के तीनों प्रमुख दावेदारों से व्यक्तिगत और सामूहिक बातचीत भी की। बैठकों में केरल कांग्रेस अध्यक्ष सनी जोसेफ और पार्टी की राज्य प्रभारी दीपा दासमुंशी भी मौजूद रहीं।
केरल में क्यों डर रही कांग्रेस? मुख्यमंत्री चेहरे के चयन में इतनी देरी से लगता है कि केरल में कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि सत्ता का नेतृत्व तय करना बन गई है। पार्टी नेतृत्व यह सुनिश्चित करना चाहता है कि मुख्यमंत्री ऐसा हो जो संगठन, सहयोगी दलों और विधायकों के बीच संतुलन बनाए रख सके।
हालांकि विधायकों का झुकाव केसी वेणुगोपाल की ओर बताया जा रहा है, लेकिन कांग्रेस आलाकमान अंतिम फैसला लेने से पहले किसी भी तरह की नाराजगी से बचना चाहता है। यही कारण है कि लगातार बैठकों और मंथन के बावजूद मुख्यमंत्री के नाम पर अब तक आधिकारिक घोषणा नहीं हो सकी है। अब सबकी निगाहें दिल्ली में होने वाली अंतिम बैठकों और कांग्रेस हाईकमान के फैसले पर टिकी हैं।
वहीं मुख्यमंत्री चयन में हो रही देरी पर पार्टी नेता रमेश चेन्नीथला ने कहा कि कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है, जहां फैसले चर्चा और सहमति से लिए जाते हैं। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि वहां सभी निर्णय कुछ नेताओं तक सीमित रहते हैं, जबकि कांग्रेस में सभी पक्षों की राय ली जाती है।
