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जैन धर्म के सोलहवें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ

मंगलवार,मई 19, 2020
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अहिंसा के पालनकर्ता कौन? सामान्य-सा जवाब होगा महावीर को मानने वाले जैन मतावलंबी, गांधी के अनुयायी। लेकिन क्या वास्तव में मात्र जैन कुल में जन्म लेने वाला
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जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी जैन धर्म के संस्थापक नहीं प्रतिपादक थे। उन्होंने श्रमण संघ की परंपरा को एक व्यवस्थित रूप दिया। उन्होंने 'कैवल्य ज्ञान' की जिस ऊंचाई को छुआ था वह अतुलनीय है। उनके उपदेश हमारे जीवन में किसी भी तरह के ...
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जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंककर भगवान महावीर जैन धर्म के संस्थापक नहीं प्रतिपादक थे। उन्होंने श्रमण संघ की परंपरा को एक व्यवस्थित रूप दिया।
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भगवान महावीर स्वामी के चौंतीस भव (जन्म) इस प्रकार हैं -
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भगवान महावीर स्वामी के उपदेश आज भी दुनिया के लिए बहुत जरूरी है। अहिंसा का मार्ग अपना कर दुनिया को बचाया जा सकता है। वर्तमान में परिस्थितियां बहुत बिगड़ गई है। लोग हिंसा का मार्ग अपना कर अपना ही अहित करने लगे है।
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जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी अहिंसा के मूर्तिमान प्रतीक थे। उनका जीवन त्याग और तपस्या से ओत-प्रोत था। उन्होंने एक लंगोटी तक का परिग्रह नहीं रखा।
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भगवान महावीर ने विभिन्न विषयों पर दुनिया के लोगों के लिए संदेश दिए हैं। जिन्हें हम महावीर के उपदेश के नाम से जानते हैं। यहा हमने महावीर स्वामी आत्मा पर दिए गए उपदेश प्रस्तुत कर रहे हैं। आप भी जानिए क्या कहते हैं भगवान महावीर-
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कैवल्य ज्ञान क्या है यह समझाना मुश्‍किल है। यहां संक्षिप्त में ही जानें। इसमें कोई संशय नहीं कि महावीर का मार्ग पूर्णत:, स्पष्ट और कैवल्य ज्ञान प्राप्त करने का मार्ग है। यह राजपथ है। उनके उपदेश हमारे जीवन में किसी भी तरह के विरोधाभास को नहीं रहने ...
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वेदों में अहिंसा के सूत्र मिलते हैं। कई अन्य अहिंसक लोग भी हुए हैं। अहिंसा पर प्रवचन देने वाले भी अनेक हैं, लेकिन महावीर स्वामी सबसे अलग हैं और उनकी अहिंसा की धारणा भी कहीं ज्यादा संवेदनशील है। संसार के प्रथम और अंतिम व्यक्ति हैं भगवान महावीर, ...
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यह एक अद्भुत कहानी है। ओशो रजनीश ने अपने किसी प्रवचन में सुनाई थी। आप भी इस कहानी को पढ़े। सवाल यहां जैन धर्म का नहीं दुनिया के किसी भी धर्म को समझने के लिए हमें यही करना चाहिए।
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जैन समुदाय में रोहिणी व्रत का बहुत महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। इस बार यह व्रत 18 अक्टूबर मनाया जा रहा है। 27 नक्षत्रों में शामिल रोहिणी नक्षत्र के दिन यह व्रत होता है, इसी वजह से इसे रोहिणी व्रत कहा जाता है। रोहिणी व्रत का जैन समुदाय में खास महत्‍व है। ...
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आपकी दिव्यध्वनि स्वर्ग और मोक्षमार्ग की खोज में साधक, तीन लोक के जीवों को समीचीन धर्म का कथन करने में समर्थ, स्पष्ट अर्थ वाली, समस्त भाषाओं में परिवर्तित करने वाले स्वाभाविक गुण से सहित होती है।
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सर्व ज्वर नाशक है यह पाठ

बुधवार,जनवरी 1, 2020
सुगंधित जल बिंदुओं और मंद सुगंधित वायु के साथ गिरने वाले श्रेष्ठ मनोहर मंदार, सुंदर, नमेरु,
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गंभीर और उच्च शब्द से दिशाओं को गुंजायमान करने वाला, तीन लोक के जीवों को शुभ विभूति प्राप्त कराने में समर्थ और समीचीन जैन धर्म के स्वामी की जय घोषणा करने वाला
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गर्व रक्षक पाठ

बुधवार,जनवरी 1, 2020
हे प्रभो! तीनों लोकों के कांतिमान पदार्थों की प्रभा को तिरस्कृत करती हुई आपके मनोहर भामंडल की विशाल कांति एक साथ उगते हुए
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21 दिसंबर को जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का जन्म व दीक्षा कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। आइए जानें...
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Jain Chalisa : भगवान पार्श्वनाथ चालीसा

शुक्रवार,दिसंबर 20, 2019
Jain Chalisa- शीश नवा अरिहंत को, सिद्धन करूं प्रणाम। उपाध्याय आचार्य का ले सुखकारी नाम। सर्व साधु और सरस्वती, जिन मंदिर सुखकार। अहिच्छत्र और पार्श्व को, मन मंदिर में धार।|
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अयोध्या हिन्दू, जैन और बौद्ध धर्म का संयुक्त तीर्थ स्थल है। अयोध्या जितनी हिन्दुओं के लिए पवित्र नगरी है उतनी ही जैन धर्म के अनुयायियों के लिए भी पवित्र नगरी है।
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दीपावली की कार्तिक कृष्ण अमावस्या-30 के दिन 527 ईसापूर्व जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर को 72 वर्ष की आयु में पावापुरी उद्यान (बिहार) में निर्वाण प्राप्त हुआ था। कहते हैं कि उस दिन मंगलवार था। इसी दिन भगवान महावीर के प्रमुख गणधर गौतम स्वामी ...
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