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क्षमावाणी पर्व 2020 : आत्मिक शुद्धता का पर्व है पयुर्षण, देता है क्षमा भाव का संदेश

बुधवार,सितम्बर 2, 2020
Kshamavani Parv Sepcial
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1 सितंबर 2020 को दिगंबर जैन समुदाय के दशलक्षण महापर्व की समाप्ति हो गई है। इसके अंतर्गत मनाया जाने वाला खास पर्व
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दिगंबर जैन समाज में पर्युषण पर्व के अंतर्गत आने वाली दशमी तिथि यानी 28 अगस्त, शुक्रवार को धूप/सुगंध दशमी पर्व मनाया जाएगा। लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के चलते मंदिरों में उत्साह की कमी दिखाई दे रही है।
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23 अगस्त 2020, रविवार से दिगंबर जैन समाज में पर्वों के राजा कहे जाने वाले महापर्व पर्युषण शुरू हो गए हैं, लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के चलते इस पर्व में उत्साह की कमी दिखाई देगी।
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श्वेतांबर समाज 8 दिन तक पर्युषण पर्व मनाते हैं जिसे 'अष्टान्हिका' कहते हैं जबकि दिगंबर 10 दिन तक मनाते हैं जिसे वे 'दशलक्षण' कहते हैं। ये दसलक्षण हैं- क्षमा, मार्दव, आर्जव, सत्य, संयम, शौच, तप, त्याग, आकिंचन्य एवं ब्रह्मचर्य।
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श्वेतांबर जैन समाज महापर्व पर्युषण की समाप्ति पर 22 अगस्त को संवत्सरी महापर्व मनाया जाएगा।
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श्वेतांबर और दिगंबर जैन समाज के पर्युषण पर्व भाद्रपद मास में मनाए जाते हैं। श्वेतांबर के व्रत समाप्त होने के बाद दिगंबर समाज के व्रत प्रारंभ होते हैं। श्वेतांबर के पर्युषण 22 अगस्त 2020 को समाप्त हो रहे हैं और दिगंबर जैन समाज के व्रत 23 अगस्त से ...
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21 अगस्त, शुक्रवार को दिगंबर जैन समाज में रोट तीज पर्व मनाया जाएगा। इस बार कोरोना संक्रमण के चलते मंदिरों में भीड़ नहीं होगी। इस दिन सभी धर्मावलंबी मंदिरों में बैठकर ही श्री रोटतीज व्रत का पूजन एवं कथा का श्रवण एवं पाठ करते हैं,
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दिगंबर जैन समाज में 21 अगस्त, शुक्रवार को रोट तीज पर्व मनाया जा रहा है। इस बार कोरोना संक्रमण के चलते मंदिरों में भीड़ नहीं होगी।
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दिगंबर जैन समाज में 21 अगस्त 2020, शुक्रवार को रोट तीज पर्व मनाया जाएगा। रोट तीज के दिन बनाया जाने वाला यह एक विशेष व्यंजन है, जो सभी घरों में रोटतीज (भाद्रपद शुक्ल तृतीया) के दिन बनाया जाता है।
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पर्युषण का अर्थ है परि यानी चारों ओर से, उषण यानी धर्म की आराधना। श्वेतांबर और दिगंबर समाज के पर्युषण पर्व भाद्रपद मास में मनाए जाते हैं। श्वेतांबर के व्रत समाप्त होने के बाद दिगंबर समाज के व्रत प्रारंभ होते हैं। दिगंबर समाज के व्रत 23 अगस्त से ...
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श्वेतांबर जैन समाज के पर्वाधिराज पर्युषण 15 अगस्त से प्रारंभ हो गए हैं। यह पर्युषण पर्व 22 अगस्त 2020 तक चलेंगे। इस दौरान जैन धर्मावलंबी तप और आराधना में लीन होंगे।
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आज आषाढ़ शुक्ल पंचमी है। आषाढ़ शुक्ल पंचमी को जैन दिगंबर संत आचार्यश्री विद्यासागर जी का 53वां दीक्षा दिवस है। विश्व-वंदनीय जैन संत आचार्यश्री 108 विद्यासागरजी महाराज भारत भूमि के प्रखर तपस्वी, चिंतक, कठोर साधक, लेखक हैं
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जैन धर्म के सोलहवें तीर्थंकर शांतिनाथ का जन्म ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भरणी नक्षत्र में इक्क्षवाकु कुल में कुरूजांगल प्रदेश के हस्तीनापुर नगर में हुआ था। शांतिनाथ अवतारी थे। उनके जन्म से ही चारों ओर शांति का राज कायम हो गया था। वे ...
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अहिंसा के पालनकर्ता कौन? सामान्य-सा जवाब होगा महावीर को मानने वाले जैन मतावलंबी, गांधी के अनुयायी। लेकिन क्या वास्तव में मात्र जैन कुल में जन्म लेने वाला
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जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी जैन धर्म के संस्थापक नहीं प्रतिपादक थे। उन्होंने श्रमण संघ की परंपरा को एक व्यवस्थित रूप दिया। उन्होंने 'कैवल्य ज्ञान' की जिस ऊंचाई को छुआ था वह अतुलनीय है। उनके उपदेश हमारे जीवन में किसी भी तरह के ...
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जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंककर भगवान महावीर जैन धर्म के संस्थापक नहीं प्रतिपादक थे। उन्होंने श्रमण संघ की परंपरा को एक व्यवस्थित रूप दिया।
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भगवान महावीर स्वामी के चौंतीस भव (जन्म) इस प्रकार हैं -
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भगवान महावीर स्वामी के उपदेश आज भी दुनिया के लिए बहुत जरूरी है। अहिंसा का मार्ग अपना कर दुनिया को बचाया जा सकता है। वर्तमान में परिस्थितियां बहुत बिगड़ गई है। लोग हिंसा का मार्ग अपना कर अपना ही अहित करने लगे है।
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जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी अहिंसा के मूर्तिमान प्रतीक थे। उनका जीवन त्याग और तपस्या से ओत-प्रोत था। उन्होंने एक लंगोटी तक का परिग्रह नहीं रखा।
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