पाकिस्तान का ‘डबल गेम’! एक तरफ शांति वार्ता, दूसरी ओर सऊदी अरब में 13,000 सैनिक तैनात
पाकिस्तान एक ओर अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच शांति वार्ता में मध्यस्थ बना है, वहीं दूसरी ओर सऊदी अरब में 13,000 सैनिक और लड़ाकू विमान तैनात कर चुका है। हार्मुज संकट के बीच पाकिस्तान की इस दोहरी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं कि वह शांति की दिशा में काम करेगा या क्षेत्रीय संघर्ष में सऊदी अरब की मदद करेगा।
शांति वार्ता विफल होने के बाद हार्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका हार्मुज की नाकेबंदी की तैयारी कर है तो ईरान भी इस पर पूर्ण नियंत्रण बनाए हुए हैं। ऐसे में पाकिस्तान की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
पाकिस्तान ने सऊदी अरब में क्यों भेजी सेना?
गौरतलब है कि पिछले वर्ष सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रणनीतिक रक्षा समझौता हुआ था, जिसके तहत दोनों देश में किसी भी एक पर हुए हमले को खुद पर हुआ हमला मानेंगे। कहा जा रहा है कि ये सैनिक रक्षा के लिए तैनात है और ईरान पर हमला नहीं करेंगे।
पाकिस्तान समय-समय पर अपने सैनिक सऊदी अरब भेजता है ताकि वहां की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा को मजबूत किया जा सके। सऊदी अरब पाकिस्तान को तेल और आर्थिक मदद देता रहा है। बदले में पाकिस्तान रक्षा सहयोग देकर इस रिश्ते को मजबूत बनाए रखता है। पाकिस्तानी सैनिक और लड़ाकू जेट केवल सऊदी अरब की रक्षा के लिए वहां तैनात हैं।
कहां तैनात है पाकिस्तानी सेना?
सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, पाकिस्तान का यह सैन्य दल अब्दुल अजीज एयरबेस पर पूर्वी क्षेत्र में तैनात किया गया है। इस तैनाती का मुख्य उद्देश्य संयुक्त सैन्य समन्वय को बढ़ाना, दोनों देशों की सशस्त्र सेनाओं के बीच ऑपरेशनल रीडनेस में सुधार करना और क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करना है।
गौरतलब है कि अमेरिका और इजराइल ने मिसाइल और ड्रोन हमलों से ईरान में भारी तबाही मचाई है। जवाब में ईरानी सेना ने भी इजराइल के साथ ही खाड़ी देशों में भी अमेरिकी ठिकानों पर जबरदस्त बमबारी की है।
edited by : Nrapendra Gupta
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