MoU मानो तभी खुलेगा Hormuz Strait, दुनिया के सबसे बड़े समुद्री रास्ते के लिए ईरान की नई शर्त
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को लेकर ईरान ने नया रुख अपनाया है। ईरान ने साफ कहा है कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग को दोबारा पूरी तरह खोलने के लिए अमेरिका को पहले समझौता ज्ञापन (MoU) की शर्तों का पालन करना होगा और ईरान के नियमों को स्वीकार करना होगा। तेहरान का कहना है कि इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य को सामान्य रूप से संचालित करने का कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर असर
अमेरिका-ईरान टकराव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही एक बार फिर प्रभावित हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में सिर्फ 10 जहाज इस समुद्री मार्ग से गुजर पाए, जिनमें अधिकांश ईरानी तेल टैंकर शामिल हैं। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल बाजार पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
ईरानी सेना ने क्या कहा?
ईरानी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमिनिया ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने का एकमात्र रास्ता यही है कि अमेरिका इस्लामाबाद बैठक में हुए समझौता ज्ञापन (MoU) का सम्मान करे, अपनी कथित शत्रुतापूर्ण गतिविधियां बंद करे और ईरान को अपने कानून लागू करने दे। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण ईरान की राष्ट्रीय और सार्वजनिक मांग है, जिस पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
ईरानी संसद अध्यक्ष का भी कड़ा संदेश
ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि देश की राष्ट्रीय सुरक्षा सीधे तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रशासन में ईरान की भूमिका से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि तेहरान किसी भी बाहरी ताकत को अपनी शर्तें ईरान पर थोपने की अनुमति नहीं देगा।
गालिबाफ ने आरोप लगाया कि अमेरिका हर अवसर पर अपने हितों को आगे बढ़ाने के लिए ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश करता है। उन्होंने कहा कि चाहे युद्ध हो या कूटनीतिक वार्ता, ईरान अपने राष्ट्रीय हितों, सुरक्षा और दीर्घकालिक रणनीति को ध्यान में रखकर ही निर्णय लेगा।
वैश्विक बाजार की नजर होर्मुज पर
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह का तनाव अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, शिपिंग और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल सकता है।

