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होर्मुज में ईरान का बड़ा कदम: पाकिस्तान का जहाज रोका, मध्यस्थता पर लगा झटका?
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच मध्यस्थता का प्रयास कर रहे पाकिस्तान को उस समय बड़ा झटका लगा जब ईरान की IRGC ने कराची जा रहे एक जहाज को वापस लौटा दिया। बताया जा रहा है कि उसके पास हार्मुज से गुजरने की मंजूरी नहीं थी। यह भी दावा किया जा रहा है कि ईरान पाकिस्तान की मध्यस्थता में बातचीत नहीं चाहता।
ईरानी अधिकारी अलीरेजा तंगसिरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि कंटेनर जहाज SELEN को IRGC नौसेना ने वापस लौटा दिया है क्योंकि उसने कानूनी प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया था और उसके पास होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति नहीं थी।
کشتی کانتینربر SELEN به دلیل عدم رعایت پروتکلهای قانونی و نداشتن مجوز عبور از #تنگه_هرمز، توسط نیروی دریایی سپاه به عقب بازگردانده شد.
— علیرضا تنگسیری (@alirezatangsiri) March 24, 2026
عبور هرگونه شناور از این آبراهه مستلزم هماهنگی کامل با حاکمیت دریایی ایران است و این مهم جز به پشتوانه مردم شریف ایران به دست نمیآمد. pic.twitter.com/g6ei29Y90Q
गौरतलब है कि हार्मुज पर इस समय पूरी तरह ईरान का नियंत्रण है। इस जलमार्ग से किसी भी जहाज के गुजरने के लिए ईरान के समुद्री प्राधिकरण के साथ पूर्ण कॉर्डिनेशन आवश्यक है।
ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम को लेकर समझौता करने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान के लिए यह बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि ईरान ने पाकिस्तान जहाज रोककर यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह अमेरिका से वार्ता को लेकर ज्यादा गंभीर नहीं है।
पाकिस्तान कैसे बना मध्यस्थ?
ईरान ने संकेत दिए थे कि वह युद्ध को रोकने और तनाव कम करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ पाकिस्तान की धरती पर बातचीत करने को तैयार है। ईरान के इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच सार्थक और निर्णायक बातचीत में मदद करने के लिए तैयार है। उन्होंने इसे पाकिस्तान के लिए एक 'सम्मान' की बात बताया।
शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा कि पाकिस्तान मध्य पूर्व में युद्ध को खत्म करने के लिए किए जा रहे बातचीत के प्रयासों का स्वागत करता है। यह इस क्षेत्र और पूरी दुनिया की शांति और स्थिरता के हित में है।
पाकिस्तान की बैक चैनल डिप्लोमेसी
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से 23 मार्च को बात की। पाकिस्तान अब बैक-चैनल डिप्लोमेसी चला रहा है, जिसमें अमेरिकी दूत स्टीव विटकोफ और जारेड कुश्नर जैसे व्यक्तियों से संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है। तुर्की और मिस्र भी इस प्रक्रिया में शामिल हैं। यह कोई अचानक हुई घटना नहीं है। पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका की सफलता के पीछे व्यावहारिक, भौगोलिक और ऐतिहासिक कारण हैं।
कहां अटकी बात?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ईरान के खिलाफ युद्ध में जीता का दावा करते हुए कहा कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न करने पर पूरी तरह सहमत हो गया है। तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े तेल-गैस संबंधी एक बहुत बड़ा तोहफा अमेरिका को भेजा है। हालांकि ईरान ने भी युद्ध समाप्त करने के लिए कई शर्ते लगाई है।
edited by : Nrapendra Gupta
