दिग्गजों से सुसज्जित मुंबई इंडियन्स प्लेऑफ से बाहर हुई, क्या रहे कारण
इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के प्लेऑफ की दौड़ से बाहर होने के बाद मुंबई इंडियंस के पास अब आत्म अवलोकन का समय है। टीम के पास सब कुछ था। धुआंधार सलामी बल्लेबाज, मजबूत मध्यक्रम, शानदार ऑलराउंडर्स धारदार गेंदबाज लेकिन नतीजा सिफर।
इससे यह बात साबित होती है कि अगर टीम में एकता ना हो तो दिग्गज खिलाड़ियों का झुंड भी कुछ नहीं कर सकता। हार्दिक पांड्या, रोहित शर्मा और सूर्यकुमार यादव कभी एक मंच पर दिखे ही नहीं। टीम को एक के बाद एक विवादों ने जकड़े रखा और एक ईकाई की तरह टीम नहीं दिखी।
1) सलामी बल्लेबाजी की जोड़ी स्थिर नहीं- मुंबई इंडियन्स ने 1 करोड़ रुपए में क्विंटन डि कॉक को खरीद तो लिया था लेकिन उनका उपयोग नहीं कर सकी। वह एक शतक बनाकर कुछ खास नहीं कर पाए। बीच में रोहित शर्मा चोटिल हो गए और उनका इंतजार टीम को करना पड़ा। सिर्फ एक रियान रिकल्टन ही थे जो सफल और असफल होने के बावजूद भी टीम के सलामी बल्लेबाज बने रहे। टीम ने एक बार तो विल जैक्स तक से सलामी बल्लेबाजी करवा ली।
2) सूर्या तिलक की फ्लॉप जोड़ी -
मध्यक्रम मुंबई इंडियन्स की सबसे बड़ी परेशानी का सबब रहा। सूर्याकुमार यादव सिर्फ एक बार 51 पार जा सके और तिलक वर्मा की गुजरात के खिलाफ सिर्फ एक बार 49 गेंदों में शतकीय पारी आई। दोनों बुरी तरह असफल रहे। सूर्यकुमार यादव की बात करें तो उन्होंने 10 मैचों में 20 से भी कम की औसत से 195 रन बनाए हैं। उन्होंने सिर्फ एक अर्धशतक जड़ा है और उनकी स्ट्राइक रेट (145)पर भी काफी सवाल उठे हैं।
3) हार्दिक का खराब फॉर्म और कप्तानी
कप्तान और खिलाड़ी के तौर पर पंड्या के लिए आईपीएल 2026 भुला देने वाला रहा है क्योंकि पिछले साल ग्रुप चरण में चौथे स्थान पर रहने के बाद मुंबई इंडियन्स अब टूर्नामेंट से बाहर हो गई है। उनकी कप्तानी में मुंबई ने अपने 10 मैच में से 3 जीते हैं और सात गंवाए हैं।पंड्या ने मौजूदा सत्र में अब तक 186 रन बनाए हैं और चार विकेट लिए हैं।उनकी अनुपस्थिति में सूर्या ने दिल्ली के खिलाफ विजय जरूर दिलाई लेकिन बैंगलूरू के खिलाफ टीम मात खा गई। हार्दिक और सूर्या के बाद अगले सत्र में कप्तान कौन होगा मुंबई को यह भी समझ नहीं आ रहा।
4) जसप्रीत बुमराह रहे बेअसर
अगर पूरे सत्र पर नजर डालें, तो यह बुमराह के करियर के सबसे बुरे सपने जैसा रहा । 11 मैचों में सिर्फ 3 विकेट, 109.66 की औसत और 8.89 की इकॉनमी—ये आंकड़े उस गेंदबाज के नहीं लगते जिसने सालों तक बल्लेबाजों पर खौफ बनाया हो। समस्या सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी गेंदबाजी में वो धार और कंट्रोल भी गायब दिखा है, जिसके लिए वे जाने जाते हैं। इस सीजन में कई बार उन्होंने विकेट लेने के मौके बनाए, लेकिन या तो किस्मत ने साथ नहीं दिया या छोटी-छोटी गलतियां भारी पड़ गईं जैसे नो-बॉल, लाइन-लेंथ में हल्का सा बदलाव या पेस में गिरावट।
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