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महिलाओं का यौन शोषण यूरोप-अमेरिका में बना नया शौक

europol
Europols Project Medusa: यूरोप-अमेरिका अपने आप को न केवल बहुत सुशिक्षित, सुसभ्य और सुसपंन्न समाज मानते हैं, नारी-समानता का प्रखर पैरोकार भी बताते हैं। दावा करते हैं कि उनके यहाँ महिलाओं और लड़कियों को न केवल समान अधिकार प्राप्त हैं, वे पूर्णतः सुरक्षित भी हैं। लेकिन, इस ढोल में कितना पोल या दिया तले कितना अंधेरा है, अखिल यूरोपीय पुलिस अधिकरण 'यूरोपोल' के एक सफ़ाई अभियान ने इन्हीं दिनों उजागर कर दिया है।
 
अपनी महिला परिचितों या संगिनियों को नशीली दवाएं देकर उनका यौन शोषण करना और ऑनलाइन नेटवर्क पर अपने अनुभवों का आदान-प्रदान करना, यूरोप-अमेरिका में पुरुषों का एक नया शौक बन गया है। यूरोपोल की रिपोर्ट के अनुसार, 9 देशों— जर्मनी, ब्रिटेन, ब्राज़ील, कनाडा, फ्रांस, हंगरी, नीदरलैंड, स्पेन और संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के जांचकर्ताओं ने पहली बार उन पुरुषों की पहचान कर उनके ऑनलाइन नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई की है, जो अपनी महिला संगिनियों को बेहोश करने के लिए उन्हें नशीली दवाएँ देकर उनका यौन शोषण किया करते थे।

अपने कुकर्मों के वीडियो भी बनाते हैं

यही नहीं, वे अपने कुकर्मों के वीडियो भी बनाते और उन्हें ऑनलाइन पोस्ट कर देते थे। यूरोपोल का कहना है कि जून, 2026 में चलाए गए इस जाँच अभियान से इस गोरखधंधे के 274 नए मामले मिले हैं। इन मामलों में बलात्कार, यौन उत्पीड़न, गंभीर शारीरिक चोट पहुंचाने और हत्या तक की कोशिशों जैसे अपराध शामिल हैं।
 
यूरोपोल ने नीदरलैंड की राजधानी हेग में बताया कि 156 संदिग्ध पीड़ितों और अपराधियों की पहचान की गई है। अपराधियों या पीड़ितों के बारे में मिली जानकारी जारी नहीं की गई, ताकि अभी भी चल रही जांचों पर कोई असर न पड़े। 9 देशों के इस सामूहिक अभियान का नेतृत्व जर्मनी और ब्रिटेन के अधिकारियों ने किया और यूरोपीय पुलिस एजेंसी यूरोपोल ने तालमेल बिठाया। 'प्रोजेक्ट मेदूसा' नाम के इस बहुराष्ट्रीय अभियान की सफलता में जर्मनी के संघीय अपराध कार्यालय (BKA) और जर्मनी के ही हैम्बर्ग राज्य के आपराधिक पुलिस कार्यालय की भी प्रमुख भूमिका रही है।

बलात्कारियों का नेटवर्क पकड़ा गया

यूरोपोल के अभियान से पता चला कि लड़कियों-महिलाओं के साथ यौन दुराचार करने वाले सभी 9 देशों के पुरुष, खुद बनाए वीडियो और अपनी सीख-सलाहों का आपस में आदान- प्रदान करते रहे हैं। यूरोपोल के अनुसार, पुरुष अपने शिकार को अधिकतर नशीली दवाएं देकर बेहोश कर दिया करते हैं और फिर उनका जमकर यौन शोषण करते हैं। जर्मनी के संघीय अपराध कार्यालय (BKA) का कहना है कि यह दुराचार, पीड़िताओं को अक्सर अपने ही करीबी लोगों के द्वारा झेलना पड़ता है और वह लंबे समय तक—कभी-कभी सालों तक—चलता रहता है।
 
यूरोपोल के अनुसार, यौन दुराचार के वीडियो मुख्य रूप से 'पोर्नोग्राफ़ी' कहलाने वाली अश्लील सामग्री के इंटरनेट प्लेटफ़ॉर्मों और महिलाओं के प्रति घृणा फैलाने वाली चैट- मंडलियों में शेयर किए जाते हैं। अपराधी, इस्तेमाल की जाने वाली नशीली या बेहोशी की दवाओं के असर के साथ-साथ उन्हें कहाँ और कैसे पाया जाए, इस बारे में भी जानकारी आपस में बाँटते हैं। हाल ही में चलाए गए एक अभियान में ऐसे चार नेटवर्कों की पहचान की गई और उनका सफ़ाया किया गया।

"पेलिको का मामला अकेला मामला नहीं है"

यूरोपोल के अभियान से जो तथ्य सामने आए हैं, वे फ़्रांसीसी महिला जिज़ेल पेलिको के साथ वर्षों तक चले अकल्पनीय दुराचार कांड की याद दिलाते हैं। इस समय 74 वर्ष की इस महिला को लगभग दस वर्षों तक, उसके अपने ही पति ने उसे बार-बार नशीली दवाएं देकर, दर्जनों लोगों द्वारा उसका बलात्कार करवाया। जर्मनी के संघीय अपराध कार्यालय (BKA) का कहना है कि पीड़िताओं को बेबस करने के लिए नशीली दवाएं अक्सर शराब के साथ मिलाकर उन्हें पिलाई जाती हैं, जो जानलेवा भी हो सकती हैं। कई पीड़िताओं को पता ही नहीं चलता कि उनका कैसा और कितना यौन उत्पीड़न हुआ है। यूरोपोल का कहना है कि 'दी गई नशीली दवाओं और दर्द निवारक दवाओं की वजह से पीड़िताएं या तो घटना को याद नहीं रख पातीं या अपने साथ बलात्कार के शारीरिक प्रभाव को तुरंत महसूस नहीं कर पातीं।' इस तरह के दुराचार के पीछे काम करने वाले ऑनलाइन नेटवर्क का सफ़ाया करने के उद्देश्य से, अप्रैल 2026 में "प्रोजेक्ट मेदूसा" शुरू किया गया।
 
यूरोपोल के अनुसार, तब से अब तक इस परियोजना में शामिल देशों में 57 पुरुषों को गिरफ़्तार किया गया है और 158 पीड़िताओं को बचाया गया है। पिछले जून महीने में, डच पुलिस ने ब्रिटिश और जर्मन पुलिस से मिली जानकारी के आधार पर चार संदिग्ध अपराधियों को गिरफ़्तार किया।

बलात्कारियों का नेटवर्क बढ़ता ही गया

यह सारी जांच वास्तव में जर्मन टेलीविज़न NDR की एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुई। ब्रिटेन की "नैशनल क्राइम एजेंसी" (NCA) के अनुसार, जांचकर्ताओं द्वारा किया गया अब तक का काम इससे पहले NDR की दो महिला पत्रकारों की खोज का परिणाम है। दोनों जर्मन महिला पत्रकारों ने 2024 के अंत में बताया कि अपनी खोज से उन्हें पता चला कि बलात्कारी गिरोहों के सदस्य, महिलाओं को नशीली दवाएं देकर कैसे उनके साथ बलात्कार करते थे और उनकी वीडियो रिकॉर्डिंग अपने चैट ग्रुप में कैसे शेयर किया करते थे। ये वीडियो अश्लीलता (पोर्नोग्राफ़ी) के प्लेटफ़ॉर्मों के द्वारा भी शेयर किए जा रहे थे।
 
जर्मन टेलीविज़न NDR के पत्रकार, 2022 से ही कानून मनवाने वाली घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों प्रकार की एजेंसियों को इस अंतरराष्ट्रीय गिरोह के बारे में आगाह कर रहे थे। जर्मनी के ही "लोअर सैक्सनी" राज्य की एक महिला के मामले में — जिसके पति ने कम से कम 15 सालों तक उसे बार-बार नशीली दवाएं देकर उसका यौन शोषण किया और करवाया था— NDR के पत्रकारों की लगातार पूछताछ के बाद ही जांच शुरू हुई।

"प्रोजेक्ट मेदूसा"

22 से 24 जून 2026 तक, 29 जांचकर्ता लंदन में "नैशनल क्राइम एजेंसी" (NCA) के मुख्यालय में इकट्ठा हुए। वहाँ, उन्होंने "प्रोजेक्ट मेदूसा" के तहत अपराधियों, पीड़ितों, महिलाओं के प्रति घृणा फैलाने वाले समूहों और आवश्यक जांच के लिए नई कड़ियों की पहचान करने के उपायों पर चर्चा की। अप्रैल 2026 में शुरू किया गया "प्रोजेक्ट मेदूसा" एक संयुक्त प्रयास है, जिसका उद्देश्य महिलाओं के साथ यौन दुराचार को बढ़ावा देने वाले ऑनलाइन नेटवर्क को फैलने से रोकना और तहस-नहस करना है; साथ ही इन अपराधों की जांच और दोषियों पर मुकदमा चलाने के लिए राष्ट्रीय सीमाओं के आर-पार जाने वाली रणनीतियों को मज़बूत करना है। इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व जर्मनी और ब्रिटेन मिल कर कर रहे हैं।
लेखक के बारे में
राम यादव
राम यादव डायचे वेले हिन्दी (जर्मनी) के पूर्व प्रमुख हैं। देश-विदेश की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक घटनाक्रम पर इनकी अच्छी पकड़ है। आधी सदी से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता एवं लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। .... और पढ़ें