ईरान में हुए हमले में 165 मासूम बच्चियों की मौत हो गई थी। इस खबर ने पूरी दुनिया को दहशत में डाल दिया था। इस बीच एक नया चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान में बच्चियों के स्कूल पर हमला इजरायल ने नहीं, बल्कि अमेरिका ने किया था। हालांकि अमेरिका ने इसमें अपना हाथ होने से इनकार किया था। इस हमले में 7 से 12 साल की 165 से ज्यादा स्कूली बच्चियां मारी गई थीं। जिन्हें बाद में एक साथ एक ही जगह पर दफनाया गया था।
क्या टॉमहॉक मिसाइल का हुआ इस्तेमाल : बता दें कि ईरान के दक्षिणी प्रांत होर्मोजगान के मिनाब शहर में 28 फरवरी को एक लड़कियों के स्कूल पर हुए भीषण हमले को लेकर नई जांच रिपोर्ट सामने आई है। दावा किया गया है कि तमाम फैक्ट-चेक और मीडिया जांच के मुताबिक 150 से ज्यादा बच्चियों की जान लेने वाले इस हमले में इस्तेमाल की गई मिसाइल अमेरिका की टॉमहॉक मिसाइल थी।
7 से 12 साल की स्कूली छात्राएं हुईं थी हमले का शिकार : दरअसल, ईरान और अमेरिका के बीच हो रहे युद्ध का सबसे दर्दनाक हमला मिनाब शहर के एक गर्ल्स एलिमेंट्री स्कूल पर हुआ था, जिसे लेकर अब सवाल उठे, लेकिन इसकी जिम्मेदारी किसी ने भी नहीं ली। इस हमले में करीब 165 से 180 लोगों की मौत हो गई, जबकि मरने वालों में ज्यादातर 7 से 12 साल की स्कूली छात्राएं थीं। यह घटना उस समय हुई जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ व्यापक सैन्य अभियान की शुरुआत की थी और उनके टार्गेट पर ईरानी सुप्रीम लीडर अली खामेनाई थे।
डबल-टैप स्ट्राइक हुई थी : रिपोर्टों के मुताबिक ये स्कूल इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की नौसेना के एक सैन्य परिसर के पास स्थित था, यही वजह थी कि अमेरिका के हमले में इसे निशाना बना गया। इसे लेकर जब इजरायल और अमेरिका से सवाल किए गए थे, तो उन्होंने इसे ईरान का खुद का हमला कहते हुए बात टाल दी। खुद डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा था कि इस हमले में अमेरिका का हाथ नहीं है। हालांकि शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि हमले में डबल-टैप स्ट्राइक हुई थी, यानी पहले विस्फोट के बाद जब छात्र और कर्मचारी प्रार्थना हॉल में शरण लेने पहुंचे, तब दूसरी मिसाइल गिरी।
अमेरिका की सबसे घातक मिसाइल : डच फैक्ट-चेकिंग समूह बेलिंगकैट (Bellingcat), द न्यूयॉर्क टाइम्स और द वॉशिंगटन पोस्ट की जांच में बताया गया है कि जो हमला ईरानी स्कूल पर हुआ, उसमें अमेरिका की सबसे घातक मिसाइलों में से एक टॉमहॉक का इस्तेमाल किया गया था। आमतौर पर युद्ध में लंबी दूरी के टार्गेट हिट करने के लिए BGM-109 टॉमहॉक लैंड अटैक मिसाइल है। यह लंबी दूरी की क्रूज़ मिसाइल है, जिसे आमतौर पर अमेरिकी सेना इस्तेमाल करती है।
ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी की ओर से जारी वीडियो के विश्लेषण में भी इसी तरह की मिसाइल दिखाई देने की बात कही गई। विशेषज्ञों का कहना है कि इस युद्ध में शामिल देशों में फिलहाल केवल अमेरिका के पास टॉमहॉक मिसाइल मौजूद है। इतना ही नहीं हथियार विशेषज्ञ ट्रेवर बॉल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि वीडियो और सैटेलाइट तस्वीरों से हमले की जगह की पहचान की गई है। उनके मुताबिक यह फुटेज पहली बार दिखाता है कि इलाके में अमेरिकी मिसाइलें इस्तेमाल हुईं थी। विश्लेषण में यह भी पाया गया कि हमले से आसपास की दो इमारतें गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुईं, जिनमें एक क्लिनिक और एक अंडरग्राउंड बंकर था।
ट्रंप ने बताया ईरान की गलती : खास बात यह है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले को ईरान की ही गलती बता दिया था। वहीं, इजराइल ने इस हमले में शामिल होने से इनकार कर दिया था। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुरुआत में कहा था कि यह हमला शायद ईरान की गलती हो सकता है, क्योंकि उसके हथियार सटीक नहीं होते। हालांकि बाद में यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड ने बताया कि इस घटना की जांच की जा रही है। कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर यह भी माना कि हमला शायद अमेरिकी बलों का किया हुआ हो सकता है। वहीं अमेरिकी रक्षा मंत्री हेगसेथ ने पेंटागन में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि घटना की जांच जारी है और अमेरिका जानबूझकर किसी नागरिक लक्ष्य को निशाना नहीं बनाता।
इस घटना को लेकर संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों और UNESCO ने इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया है। उनका कहना है कि स्कूल जैसे नागरिक संस्थानों को निशाना बनाना युद्ध अपराध माना जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इस मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी की है।
Edited By: Naveen R Rangiyal