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Last Modified: ढाका , शुक्रवार, 19 दिसंबर 2025 (08:37 IST)

कौन था उस्मान हादी, जिसकी मौत से बांग्लादेश में मचा बवाल

हिंसक भीड़ ने 2 अखबारों के दफ्तर में लगाई आग, सेना तैनात

bangladesh violence
Bangladesh Violence news : शेख हसीना के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान एक अहम नेता उस्मान हादी की मौत के बाद, बांग्लादेश में अशांति फैल गई। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए। तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं के बाद स्थिति नियंत्रण के लिए सड़कों पर सेना तैनात कर दी गई।
 
बांग्लादेश के जुलाई आंदोलन के प्रमुख नेता शरीफ उस्मान हादी की सिंगापुर में इलाज के दौरान मौत हो गई। उन्हें 12 दिसंबर को चुनाव प्रचार के दौरान गोली मारी गई थी। सिर में गोली लगने से वह गंभीर रूप से घायल थे। हादी की मौत की खबर से बांग्लादेश में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात-ए-इस्लामी ने भी उनकी मौत पर शोक जताया। 
 
इकिलाब मंच ने चेतावनी दी कि जब तक हमलावर गिरफ्तार नहीं होते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो देश को ठप कर दिया जाएगा। 
 
प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश की राजधानी ढाका में दो अखबारों के ऑफिस में आग लगा दी। भीड़ ने पहले प्रोथोम आलो के दफ्तर में तोड़फोड़ कर उसमें आग लगा दी। इसके बाद करवान बाजार स्थित द डेली स्टार के कार्यालय पर आधी रात के बाद हमला किया गया। सेना की मदद से पत्रकारों को बाहर निकाला गया। यह पता नहीं चला है कि भी ने अखबारों को अपना निशाना क्यों बनाया? 
 
घटना के बाद अंतरिम सरकार प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने जांच और कार्रवाई का भरोसा दिया है। यूनुस ने देश में एक दिन के राजकीय शोक का भी एलान किया है।
 
कौन थे उसमान हादी : इंकलाब मंच के प्रवक्ता उसमान हादी बांग्लादेश में शेख हसीना के खिलाफ जुलाई में हुए आंदोलन का प्रमुख चेहरा थे। इसने 5 अगस्त को हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार को गिरा दिया था। उस्मान हादी फरवरी में होने वाले चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार को तौर पर दावेदारी कर रहे थे। उनके परिवार में पत्नी और एक बेटा है।
 
क्यों भंग हुआ था इंकलाब मंच : इंकलाब मंच पिछले साल जुलाई में हुए बांग्लादेश छात्र आंदोलन के दौरान चर्चा में आया था। इस समूह को कट्टरपंथी संगठन कहा गया है और यह अवामी लीग को कमजोर करने की कोशिशों में आगे रहा है। छात्र आंदोलन में भूमिका के बावजूद, यूनुस सरकार ने इस मंच को भंग कर दिया था और राष्ट्रीय चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी।
Edited by : Nrapendra Gupta
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