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Last Modified: शनिवार, 16 मई 2026 (19:41 IST)

ट्रंप का जिनपिंग से बदला या अतिरिक्त सावधानी? एयरपोर्ट पर ही फेंक दिए चीनी उपहार

Donald Trump china visit
standard security protocols: बीजिंग में एयर फोर्स वन पर चढ़ने से पहले चीन की तरफ से दिए गए गिफ्ट्स, बैज, पिन, क्रेडेंशियल्स और बर्नर फोन कचरे में फेंककर क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से अपना हिसाब चुकता कर लिया? या फिर इसके पीछे कुछ और वजह है? इस घटना को ट्रंप के अपमान से जोड़कर देखा जा रहा है।
 
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीजिंग दौरे के खत्म होने पर एयरपोर्ट से एक बेहद हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई। ट्रंप के विमान (Air Force One) पर सवार होने से पहले अमेरिकी सुरक्षा टीम और स्टाफ ने चीनी अधिकारियों द्वारा दिए गए सभी उपहार, क्रेडेंशियल्स, डेलिगेशन पिन और बर्नर फोन आदि एक बड़े से कूड़ेदान में डाल दिए। ALSO READ: जिनपिंग की जिस बात पर अमेरिकी भड़के, ट्रंप बोले- 'भाई' ने एकदम सही कहा, लेकिन...

कहां से आई बदले वाली बात?

प्रेस की एंट्री को लेकर दोनों पक्षों के अधिकारियों में 'तीखी बहस' हुई, जिसके कारण कार्यक्रम में 90 मिनट की देरी हुई थी। ट्रंप को व्यापार और अन्य मोर्चों पर इस दौरे से वैसी बड़ी सफलता नहीं मिली जैसी उम्मीद थी। शी जिनपिंग ने अमेरिका को गिरता हुआ देश (declining nation) कहा था। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने इसे खुद पर न लेते हुए पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के समय की गलतियों से जोड़कर जवाब दिया था। इसीलिए इस पूरे मामले को अमेरिका और ट्रंप के अपमान से जोड़कर देखा गया है। फिर जब अमेरिकी डेलीगेशन ने चीनी सामान को फेंका तो इसे ट्रंप का बदला माना गया। इसे मीडिया में भी बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया। इसी असली वजह स्टैंडर्ड सिक्योरिटी प्रोटोकॉल था। ALSO READ: क्या ताइवान पर टकराएंगे चीन और अमेरिका? जिनपिंग ने राष्ट्रपति ट्रंप को दी सीधी चेतावनी

क्या होता है स्टैंडर्ड सिक्योरिटी प्रोटोकॉल?

अमेरिकी डेलिगेशन (स्टाफ, प्रेस पूल) ने बीजिंग में एयर फोर्स वन पर चढ़ने से पहले चीनी तरफ से दिए गए गिफ्ट्स, बैज, पिन, क्रेडेंशियल्स और बर्नर फोन कचरे में फेंक दिए। ये सब स्पाई/सुरक्षा चिंता की वजह से किया गया। अमेरिकी इंटेलिजेंस को डर है कि चीन इन चीजों (खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स) में माइक्रोफोन, ट्रैकर या मालवेयर डाल सकता है। ये सामान्य प्रैक्टिस है, खासकर हाई-रिस्क देशों के साथ। इसका मकसद जासूसी (espionage), साइबर अटैक, ट्रैकिंग या मालवेयर से बचना होता है। इस रिस्क को ध्यान में रखकर अधिकारी अपने पर्सनल फोन, लैपटॉप, टैबलेट घर पर या एयर फोर्स वन पर छोड़ देते हैं। यात्रा के दौरान सिर्फ "burner phones" (एक बार इस्तेमाल होने वाले साफ फोन) इस्तेमाल होते हैं, जिनमें सीमित फंक्शन होते हैं।

चीन से सबसे बड़ा साइबर खतरा

गिफ्ट्स, बैज, पिन, क्रेडेंशियल्स, स्मृति चिन्ह आदि को कचरे में फेंक दिया जाता है। दरअसल, इनमें माइक्रोफोन, GPS ट्रैकर, मालवेयर या हार्डवेयर बैकडोर छिपे हो सकते हैं। अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसियां (FBI, NSA आदि) चीन को सबसे बड़ा साइबर जासूसी खतरा मानती हैं। ये स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) हाई-लेवल डेलिगेशन के लिए भी है, सिर्फ ट्रंप टीम तक सीमित नहीं। चीन भी अमेरिकी डेलिगेशन पर इसी तरह सतर्क रहता है। स्पाई प्रोटोकॉल का मतलब कुछ भी चीनी/अजनबी मत लाओ, जो जासूसी का जरिया बन सकता है। ये सुरक्षा का मामला है, न कि सिर्फ अपमान का।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
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