ईरान के गलियारों से एक ऐसी खबर आ रही है जिसने ग्लोबल पॉलिटिक्स के समीकरण बदल दिए हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि अगर किसी देश की चुनी हुई सरकार और डिप्लोमेट्स सिर्फ 'नाम' के रह जाएं और असली ताकत सेना के जनरलों के हाथ में आ जाए, तो क्या होगा? ईरान में ठीक यही हो रहा है।
हालिया रिपोर्ट्स और Institute for the Study of War (ISW) के आंकड़ों के मुताबिक, ईरान में सत्ता का संतुलन पूरी तरह से बदल गया है। यहाँ की Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) अब देश की 'सुप्रीम पावर' बन चुकी है, और उन्होंने अमेरिका को सीधे तौर पर 'समुद्री डकैत' (Pirates) करार दे दिया है।
IRGC का उदय: जब डिप्लोमेसी फेल हो गई
ईरान में अब राष्ट्रपति या विदेश मंत्री अब्बास अराघची की बात नहीं सुनी जा रही है। मॉडरेट लीडर्स को पूरी तरह से साइडलाइन कर दिया गया है।
सत्ता के नए केंद्र:
मेजर जनरल अहमद वाहिदी: IRGC के कमांडर जो अब ईरान के मुख्य नीति-निर्माता बन गए हैं।
मोहम्मद बागेर ज़ोलघद्र: सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव, जो सीधे सैन्य फैसलों को लागू कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के हालिया हमलों में घायल होने की खबरों के बाद, हार्डलाइनर्स (कट्टरपंथियों) ने कमान अपने हाथ में ले ली है। अब पश्चिम के साथ बातचीत के लिए कोई 'वास्तविक अधिकार' किसी सिविलियन लीडर के पास नहीं बचा है।
अमेरिका पर 'समुद्री डकैती' का आरोप : क्या है पूरा मामला?
ईरानी सैन्य कमांड सेंटर 'खातम अल-अंबिया' ने सरकारी टेलीविजन पर एक बयान जारी कर पूरी दुनिया को चौंका दिया। ईरान ने अमेरिका की नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade) को अवैध बताते हुए इसे 'समुद्री डकैती' कहा है।
ईरान का तर्क : अवैध नाकाबंदी : ईरान का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में अमेरिका का ईरानी जहाजों को रोकना पूरी तरह गैर-कानूनी है।
बदले की चेतावनी : ईरान ने साफ कहा है कि अगर उनके बंदरगाहों (Ports) को खतरा हुआ, तो वे फारस की खाड़ी (Persian Gulf) और ओमान सागर में किसी भी जहाज को सुरक्षित नहीं रहने देंगे।
"ईरान द्वारा 'समुद्री डकैती' जैसे कड़े शब्दों का इस्तेमाल यह दर्शाता है कि अब वे कूटनीतिक भाषा को छोड़कर सीधे टकराव की ओर बढ़ रहे हैं।" — Global Security Analyst
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर कब्जा और ग्लोबल इम्पैक्ट
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण 'ऑयल चोक पॉइंट' है। यहां से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है। IRGC ने अब यहां सख्त सैन्य नियंत्रण बहाल कर दिया है।
इसका आप पर क्या असर होगा?
तेल की कीमतें : अगर ईरान ने यहां आवाजाही रोकी, तो भारत समेत पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू सकते हैं।
सप्लाई चेन : ग्लोबल ट्रेड रूट प्रभावित होने से इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य सामान महंगे हो सकते हैं।
युद्ध की आहट : ट्रंप प्रशासन की 'Maximum Pressure' नीति और ईरान की जवाबी कार्रवाई ने एक बड़े युद्ध की आशंका पैदा कर दी है।
क्या कहते हैं रणनीतिकार?
ईरान की इस आक्रामकता के पीछे दो मुख्य कारण हैं। पहला, घरेलू स्तर पर मोजतबा खामेनेई की स्थिति को लेकर अनिश्चितता और दूसरा, अमेरिका में ट्रंप प्रशासन की वापसी की संभावना।
निवेशकों के लिए : अगर आप स्टॉक मार्केट या कमोडिटी में निवेश करते हैं, तो कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों और खाड़ी देशों की खबरों पर कड़ी नजर रखें। अगले 3-6 महीने ग्लोबल मार्केट के लिए बहुत उतार-चढ़ाव भरे हो सकते हैं।
क्या शांति का रास्ता बंद हो चुका है?
ईरान में सेना का सुप्रीम होना और अमेरिका को समुद्री डकैत कहना यह संकेत देता है कि अब 'शांति वार्ता' (Peace Talks) का दौर खत्म हो चुका है। जब सत्ता उन लोगों के हाथ में आ जाती है जो युद्ध के मैदान से फैसले लेते हैं, तो डिप्लोमेसी के दरवाजे अपने आप बंद हो जाते हैं।
वर्तमान में स्थिति एक नाजुक धागे पर टिकी है। क्या अमेरिका ईरान की इस चुनौती को स्वीकार करेगा या दबाव और बढ़ेगा? यह आने वाला वक्त ही बताएगा। हालिया ISW रिपोर्ट्स और ईरानी स्टेट मीडिया के बयानों से स्पष्ट है कि खाड़ी क्षेत्र में तनाव अब तक के उच्चतम स्तर पर है। भारत जैसे देशों के लिए, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस क्षेत्र पर निर्भर हैं, यह खबर बेहद महत्वपूर्ण है।