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8000 सैनिक, 16 फाइटर जेट, मध्यस्थता की आड़ में कौनसा गेम खेल रहा Pakistan? US और ईरान के साथ विश्वासघात

Pakistan Saudi Arabia
ईरान और अमेरिका युद्‍ध में दलाल बना पाकिस्तान विश्वासघात का गेम खेल रहा है। मध्यस्तता की आड़ में वह अमेरिका और ईरान के साथ डबल गेम खेल रहा है। पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ हुए रक्षा समझौते के तहत 8,000 सैनिक, लड़ाकू विमान और एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए हैं।

पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी।  इस तैनाती को सऊदी अरब की सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है। एक सरकारी सूत्र ने बताया कि गोपनीय रक्षा समझौते में आवश्यकता पड़ने पर 80,000 तक पाकिस्तानी सैनिकों को सऊदी अरब भेजने की संभावना का भी प्रावधान है, ताकि सऊदी सेना के साथ मिलकर सीमाओं की सुरक्षा की जा सके।
 
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समय पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ऐसे में इस्लामाबाद और रियाद के बीच सैन्य सहयोग तेजी से बढ़ाया जा रहा है। तीन सुरक्षा अधिकारियों और दो सरकारी सूत्रों ने इस तैनाती की पुष्टि की है। सूत्रों के मुताबिक यह एक बड़ी और युद्ध के लिए सक्षम सैन्य तैनाती है, जिसे सऊदी अरब पर संभावित हमले की स्थिति में उसकी सेना की मदद के लिए भेजा गया है। हालांकि पाकिस्तान की सेना, विदेश मंत्रालय और सऊदी सरकार की ओर से इस पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।
 
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष हुए गोपनीय रक्षा समझौते के तहत दोनों देशों ने हमले की स्थिति में एक-दूसरे की रक्षा करने का वादा किया था। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ पहले यह संकेत दे चुके हैं कि इस समझौते के तहत सऊदी अरब पाकिस्तान की परमाणु सुरक्षा छतरी के दायरे में आता है।
 
सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान ने लगभग 16 लड़ाकू विमानों का एक पूरा स्क्वाड्रन सऊदी अरब भेजा है। इनमें अधिकतर चीन के सहयोग से बने जेएफ-17 फाइटर जेट शामिल हैं, जिन्हें अप्रैल की शुरुआत में तैनात किया गया। दो सुरक्षा अधिकारियों ने यह भी बताया कि पाकिस्तान ने ड्रोन के दो स्क्वाड्रन भी भेजे हैं।
 
इसके अलावा करीब 8,000 सैनिकों की तैनाती की गई है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सैनिक भेजने का आश्वासन भी दिया गया है। साथ ही चीन का HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम भी सऊदी अरब में लगाया गया है। इन उपकरणों का संचालन पाकिस्तानी सैन्यकर्मी कर रहे हैं, जबकि इसका खर्च सऊदी अरब उठा रहा है।
 
दो सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, ईरान संघर्ष के दौरान भेजे गए पाकिस्तानी सैनिक और वायुसेना कर्मी मुख्य रूप से सलाहकार और प्रशिक्षण की भूमिका निभाएंगे। हालांकि इससे पहले से ही हजारों पाकिस्तानी सैनिक सऊदी अरब में विभिन्न समझौतों के तहत तैनात हैं।
 
पाकिस्तान लंबे समय से सऊदी अरब को सैन्य सहयोग देता रहा है, जिसमें प्रशिक्षण और सलाहकार मिशन शामिल हैं। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने के कारण अब पाकिस्तान की यह रणनीतिक स्थिति और अधिक संवेदनशील मानी जा रही है। Edited by : Sudhir Sharma
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