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नॉर्वे का राजपरिवार चिंताग्रस्त क्यों है?
Norway Royal Family: यूरोप का सबसे उत्तरी देश नॉर्वे एक राजशाही लोकतंत्र है। पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव के बहुत निकट होने के कारण वहाँ सर्दियों का मौसम बहुत लंबा और बहुत ही बर्फीला होता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यूरोप की अपनी पिछली विदेश यात्रा के समय 18-19 मई को जब नॉर्वे में थे, तब वहां की राजधानी ओस्लो का तापमान दिन में 13 से 18 डिग्री सेंटिग्रेड और रात में 3 से 8 डिग्री सेंटिग्रेड था।
प्रधानमंत्री मोदी इस यात्रा के समय ओस्लो में नॉर्वे के राजा हाराल्ड और रानी सोन्या तथा युवराज हाक्कोन और उनकी पत्नी युवराज्ञी मेत्ते मारित से भी मिले थे। मेत्ते मारित की तबीयत उस समय भी ठीक नहीं थी और उसके बाद में तो और भी चिंताजनक बन गई।
युवराज्ञी मेत्ते मारित की बीमारी
नॉर्वे के राजमहल ने इस बीच शुक्रवार, 5 जून को आधिकारिक तौर पर बताया कि युवराज्ञी मेत्ते मारित को उनके फेफड़े के प्रतिरोपण (lung transplant) के लिए एक प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) में रखा गया है। इसका कारण "युवराज्ञी के फेफड़ों की बीमारी का चिंताजनक रूप से बढ़ जाना है।" ठीक एक दिन पहले उनका ओस्लो के रिक्सहोस्पिटालेट (Rikshospitalet) अस्पताल में कई घंटों तक इलाज हुआ था।
मेत्ते मारित को फेफड़ों की "पल्मोनरी फाइब्रोसिस" (pulmonary fibrosis) नाम की बीमारी होने की बात 2018 से ही ज्ञात है। दिसंबर 2025 में, राजमहल ने घोषणा की थी कि उनके फेफड़ो के लिए संभावित प्रतिरोपण की तैयारियां शुरू हो गई हैं। तब से, 52 वर्षीय मेत्ते मारित सार्वजनिक कार्यक्रमों में आदि में अक्सर ऑक्सीजन-प्रदायी उपकरण के साथ दिखाई देती रही हैं। "पल्मोनरी फाइब्रोसिस" फेफड़ों की एक जानलेवा गंभीर बीमारी है, जिसमें फेफड़ों के ऊतकों (tissue) को नुकसान पहुंचता है और उनमें कठोर निशान (scar tissue) बन जाते हैं। इससे फेफड़ों का लचीलापन खत्म हो जाता है और शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती।
"यह ख़तरनाक बीमारी है"
जिस दिन राजमहल ने अपना बयान जारी किया, उसी दिन मेत्ते मारित के डॉक्टरों ने प्रेस से बात की। ओस्लो के रिक्सहोस्पिटालेट अस्पताल के मुख्य फिजिशियन और "पल्मोनोलॉजिस्ट" तथा प्रतिरोपण (ट्रांसप्लांट) विभाग के प्रमुख "कार्डियोथोरेसिक" सर्जन ने मेत्ते मारित की बीमारी की वर्तमान स्थिति और उनके उपचार के लिए आवश्यक आगे के कदमों के बारे में जानकारी दी।
इन डॉक्टरों ने बताया कि पिछले छह महीनों में मेत्ते मारित के फेपड़ों की हालत काफी ख़राब हो गई है। पिछले एक साल में उनके फेफड़ों में बहुत ज़्यादा "स्कार टिश्यू" (कठोर निशान वाले ऊतक) बन गए हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि "फेफड़ों की कार्यक्षमता की जांच से पता चला है कि केवल पिछले तीन महीनों में उनकी कार्यक्षमता काफी घट गई हुई है--"यह खतरनाक है।" फेफड़ों के विशेषज्ञ ने बताया कि प्रतिरोपण सूची में किसी का नाम शामिल करने के लिए स्पष्ट चिकित्सा निर्देशों का पालन किया जाता है--"मरीज़ के फेफड़ों की बीमारी इतनी गंभीर होनी चाहिए कि हमें यह मानना पड़े कि उसके पास जीने के लिए अब केवल एक साल बचा है।" साथ ही, बीमार व्यक्ति की स्थिति इतनी स्थिर भी होनी चाहिए कि वह उपचार प्रक्रिया और उसके बाद की ठीक होने की अवधि को भी झेल सके।
मेत्ते मारित के लिए जटिल प्रक्रिया
फाइब्रोसिस का सही इलाज सिर्फ़ फेफड़ों का प्रतिरोण (ट्रांसप्लांट) ही है। दवाएं बीमारी के बढ़ने की गति को धीमा तो कर सकती हैं, लेकिन इस प्रक्रिया को पलट नहीं सकतीं। यह प्रक्रिया अपने आप में बहुत मुश्किल और चुनौतीपूर्ण हती है। डॉक्टरों ने इस प्रक्रिया के बारे में बताया कि रोगी को सामान्य निश्चेतक (एनेस्थीसिया) के द्वारा बेहोश करने के बाद छाती की हड्डी (ब्रेस्टबोन) को खोला जाता है, दिल को हार्ट-लंग मशीन से जोड़ा जाता है और बीमार फेफड़े को काट कर निकाल दिया जाता है— जो "पूरी प्रक्रिया का सबसे मुश्किल हिस्सा" है। इस ऑपरेशन में तीन से पांच घंटे तक का समय लगता है।
डॉक्टरों ने बताया कि इस तरह की प्रक्रिया के बाद आगे जो कुछ होगा, उसमें जोखिम भी शामिल है—"यदि हम मान लें कि इन मरीज़ों को प्रतीक्षा सूची में रखा गया है और बारी आने पर उनका सफल प्रतिरोपण ऑपरेशन होता है, तब भी आठ में से एक मरीज़ पहला साल बीतने तक जीवित नहीं रह पाता।" एक दशक बाद, प्रतिरोपण ऑपरेशन करवाने वाले लगभग आधे मरीज़ ही जीवित रहते हैं। इसके अलावा, मरीज़ों को जीवन भर "प्रतिरक्षादमनकारी" (इम्यूनोसप्रेसिव) दवाएं लेनी पड़ती हैं, जो ऑपरेशन के बाद शरीर की अत्यधिक सक्रिय हो गई प्रतिरक्षा-प्रणाली को शांत करती हैं। जो लोग इस सब से उबर पाते हैं, उनमें से कई अच्छी ज़िंदगी भी जी पाते हैं।
उपयुक्त फेफड़े के दानी की तलाश
रिक्सहोस्पिटालेट (Rikshospitalet) के डॉक्टरों ने भरोसा जताया कि प्रतिरोपण के लिए जल्द ही उपयुक्त फेफड़ा मिल जाएगा। पिछले छह महीनों में प्रतीक्षा सूची "बहुत छोटी" रही है। नॉर्वे में हर साल लगभग 100 से 120 मृत अंग दाता (deceased organ donors) हुआ करते हैं, किंतु उनके फेफड़ों में से केवल एक-चौथाई ही प्रतिरोपण के लिए उपयुक्त होते हैं।
डॉक्टरों ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि प्रतिरोपण के लिए दानी से मिले फेफड़े का आकार, मरीज़ के फेफड़े के आकार से मेल खाना चाहिए। इसी प्रकार, दानी के रक्त का ग्रुप मरीज़ के रक्त-ग्रुप से मेल बैठना चाहिए, और उसके ऊतक-प्रकार (टिश्यू टाइप) के खिलाफ कोई एंटीबॉडी नहीं होनी चाहिए। डॉक्टरों ने कहा कि मेत्ते मारित देश के युवराज (यानी भावी राजा) की पत्नी अवश्य हैं, पर तब भी उन्हें कोई विशेष प्राथमिकता नहीं दी जाएगी— "हम हमेशा उस व्यक्ति को प्राथमिकता देते हैं जो सबसे अधिक गंभीर रूप से बीमार है, जिसके पास इंतज़ार करने का समय नहीं है।"
युवराज और परिवार पर असर
युवराज्ञी मेत्ते मारित के फेफड़ों के लिए होने वाले प्रतिरोपण की तैयारी का असर नॉर्वे के पूरे शाही परिवार पर दिखने लगा है। राजमहल ने घोषणा की है कि मेत्ते मारित अब आधिकारिक कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो पाएंगी। युवराज हाक्कोन और मेत्ते मारित के विवाह की 25वीं वर्षगांठ (रजत जयंती) का जश्न— जो इसी वर्ष, यानी अगस्त 2026 में होना था — टाल दिया गया है। साथ ही, मेत्ते मारित सितंबर में होने वाली शाही यात्रा में भी शामिल नहीं होंगी। इसी प्रकार, युवराज हाक्कोन भी अपनी पत्नी के साथ अधिक समय बिताने के लिए अपने कार्यक्रमों को बदलने वाले हैं। शाही परिवार के दोनों बच्चे भी अपनी रोज़मर्रा की जिंदगी को नए सिरे से व्यवस्थित कर रहे हैं।
राजमहल ने घोषणा की है कि राजकुमारी इन्ग्रिद अलेक्सांद्रा 2026 के ऑटम (शरत्कालीन) शिक्षा सेमेस्टर में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में अपनी पढ़ाई नहीं करेंगी; इसके बदले नॉर्वे के ओस्लो विश्वविद्यालय में ही अपनी पढ़ाई जारी रखेंगी। राजकुमार स्वेरे माग्नुस अपनी योजना के अनुसार, यूरोप में ही अपनी आगे की पढ़ाई शुरू करेंगे और ज़रूरत पड़ने पर नॉर्वे लौट आएंगे। नॉर्वे का रजघराना, इन सारी जानकारियों को छिपाने के बदले सार्वजनिक करने के द्वारा, 56 लाख की जनसंख्या वाली अपनी जनता को यही जताना चाहता है कि हम भी आदमी ही हैं, देवता नहीं। आम जनता के समान ही हमें भी सुख-दुख और बीमारियों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
