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खतरे में युद्धविराम! ट्रंप की चेतावनी के बावजूद लेबनान में इजराइली हमले जारी
Israel Lebanon Conflict: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बावजूद इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू लेबनान पर हमले जारी रखे हुए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इजराइली सेना ने बुधवार को दक्षिणी लेबनान में नए हमले किए, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लेबनान में इजराइल के सैन्य अभियानों को लेकर फिर से आलोचना की थी। दरअसल, ईरान लेबनान में सक्रिय सशस्त्र संगठन हिज्बुल्लाह का मुख्य समर्थक है। लेबनान पर इजराइली हमलों को लेकर ईरान का रुख बेहद सख्त और आक्रामक रहा है। यदि इजराइली हमले जारी रहते हैं तो ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध विराम खतरे में पड़ सकता है।
लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी ने बताया कि इजराइली युद्धक विमानों ने नबातियेह अल-फौका क्षेत्र के साथ-साथ नजदीकी कफ़र तेबनित के बाहरी इलाकों को निशाना बनाया। हालांकि इजराइली सेना की ओर से इस पर तुरंत कोई टिप्पणी नहीं आई है, जिसने पहले कहा था कि उसके अभियान ईरान समर्थित हिजबुल्लाह आंदोलन के खिलाफ हैं।
ट्रंप की नेतन्याहू को नसीहत
दूसरी ओर, हमलों से नाराज ट्रंप ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा कि अमेरिका के बिना इजराइल का कोई अस्तित्व नहीं होता। मेरे बिना इजराइल का वजूद नहीं होता क्योंकि कोई भी अन्य राष्ट्रपति वह करने के लिए तैयार नहीं था जो मैंने किया। उन्होंने कहा कि बीबी (नेतन्याहू) के साथ मेरे अच्छे संबंध रहे हैं, लेकिन अब उन्हें लेबनान के मामले में अधिक जिम्मेदार होना पड़ेगा।
क्या कहना है ईरान का?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) का स्पष्ट कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे किसी भी व्यापक शांति समझौते या युद्धविराम की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि इजराइल दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना पूरी तरह हटाए। ईरान लेबनान के मोर्चे को व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा से अलग नहीं देखता।
ईरान का मानना है कि लेबनान में इजराइली कब्जे और हमलों का मुकाबला केवल सैन्य प्रतिरोध (हिज्बुल्लाह) के जरिए ही किया जा सकता है। हालांकि, हालिया कूटनीतिक वार्ताओं के बीच ईरान ने हिज़्बुल्लाह को अस्थाई युद्धविराम के लिए भी हरी झंडी दी है ताकि लेबनान को और अधिक तबाही से बचाया जा सके।
क्षेत्रीय शांति और युद्धविराम की कोशिश
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में (G7 शिखर सम्मेलन के दौरान) इजराइल के लेबनान में लंबे खिंचते सैन्य अभियान पर थोड़ी निराशा भी जताई है। अमेरिका चाहता है कि लेबनान का मुद्दा सुलझे ताकि ईरान के साथ होने वाली उसकी 'बड़ी डील' और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का व्यापारिक रास्ता सुरक्षित हो सके। दूसरी ओर, नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा कारणों से उनकी सेना जब तक जरूरी होगा, दक्षिणी लेबनान में तैनात रहेगी। अमेरिका इस गतिरोध को सुलझाने के लिए वॉशिंगटन में सीधी वार्ताओं की मध्यस्थता कर रहा है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala
