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Last Updated : गुरुवार, 12 मार्च 2026 (14:08 IST)

ईरान-इसराइल युद्ध का भारत पर असर : LPG की भारी किल्लत, होटल-रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर

ईरान-इजरायल युद्ध की आग अब हमारी-आपकी रसोई तक: देश में LPG का बड़ा संकट, क्या अब लकड़ी के चूल्हे पर बनेगा खाना?

LPG Crisis India
नई दिल्ली | ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग की तपिश अब सात समंदर पार भारत की रसोइयों और डाइनिंग टेबल तक पहुँच गई है। युद्ध के कारण वैश्विक सप्लाई चेन टूटने से भारत में रसोई गैस (LPG) का संकट गहरा गया है। दिल्ली की पॉश कैंटीनों से लेकर बिहार के सुदूर गांवों तक, गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतारें और हाथापाई की खबरें सामने आ रही हैं।

क्यों ठप हुई सप्लाई? 'होर्मुज' का पेच
भारत अपनी जरूरत का लगभग 60-67% LPG आयात करता है। इस आयात का 85-90% हिस्सा ओमान और ईरान के बीच स्थित 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Hormuz Strait) के रास्ते आता है। युद्ध के कारण इस समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही बंद होने से करीब 60 MMSCмD (मिलियन मानक घन मीटर प्रतिदिन) गैस की आपूर्ति रुक गई है।

प्रमुख आंकड़े एक नज़र में : भारत की कुल खपत: 191 मिलियन मानक घन मीटर/दिन।
प्रभावित सप्लाई : मध्य पूर्व से आने वाली लगभग आधी आयातित गैस।
सबसे ज्यादा असर : कमर्शियल (व्यावसायिक) LPG सिलेंडर पर।

उत्तर से दक्षिण तक हाहाकार : राज्यों का हाल
युद्ध की इस विभीषिका ने भारत के खान-पान उद्योग (Hospitality Sector) की कमर तोड़ दी है:

दिल्ली-NCR : दिल्ली हाई कोर्ट की लॉयर्स कैंटीन ने सिलेंडर की कमी के कारण मुख्य भोजन (Main Course) परोसना बंद कर दिया है।

यूपी और बिहार : यहां स्थिति इतनी संवेदनशील है कि पुलिस की निगरानी में सिलेंडर बांटे जा रहे हैं। कई केंद्रों पर मारपीट की घटनाएं भी हुई हैं।

गोवा : पर्यटन के इस गढ़ में रेस्टोरेंट मालिकों ने चेतावनी दी है कि अगर सप्लाई बहाल नहीं हुई तो आधे से ज्यादा रेस्टोरेंट बंद हो जाएंगे।

तमिलनाडु और पुडुचेरी : चेन्नई के होटलों ने अपना मेन्यू छोटा कर दिया है। अब केवल इडली-सांभर जैसे सीमित व्यंजन मिल रहे हैं। कई जगह जलाऊ लकड़ी की कीमत 300 रुपये से बढ़कर 1,000 रुपये तक पहुंच गई है।

रेलवे और आम जनता पर असर : सिर्फ होटल ही नहीं, भारतीय रेलवे (IRCTC) ने भी अपने वेंडर्स को माइक्रोवेव और इंडक्शन पर शिफ्ट होने को कहा है। सरकार ने रिफाइनरियों को घरेलू सप्लाई (Domestic LPG) को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं, जिसके कारण कमर्शियल सेक्टर में स्टॉक लगभग खत्म हो गया है।

विशेषज्ञों का कहना है : "जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता सुरक्षित नहीं होता, तब तक भारत को वैकल्पिक रूट या अन्य देशों से महंगे दामों पर गैस खरीदने के अलावा कोई रास्ता नहीं दिखेगा। इससे आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ सकती है।"

क्या है सरकार की तैयारी?
केंद्र सरकार स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और अन्य देशों से आपूर्ति बढ़ाने पर बातचीत कर रही है। उत्तराखंड जैसे राज्यों ने तो विकल्प के तौर पर व्यावसायिक उपयोग के लिए 'जलाऊ लकड़ी' उपलब्ध कराने तक की बात कही है।
Edited By: Naveen R Rangiyal
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