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नेपाल का सीरियल किलर हाथी 'धुर्बे': 14 साल से एक ही खानदान के पीछे पड़ा है यह गजराज, अब तक ले चुका है 25 जानें!

Nepal Elephent Attack
Nepal Elephent Attack: इंसान और जानवरों के बीच के संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) की कई खबरें आपने सुनी होंगी, लेकिन नेपाल से सामने आई यह घटना न सिर्फ हैरान करने वाली है, बल्कि रोंगटे खड़े कर देने वाली है। नेपाल के जंगलों में घूम रहे 'धुर्बे' (Dhrubye) नाम के एक खूंखार जंगली हाथी ने पिछले 14 वर्षों में एक ही परिवार के चार सदस्यों को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया है।
 
इस परिवार को इस हाथी का ऐसा खौफ था कि उन्होंने अपनी जान बचाने के लिए अपना पुश्तैनी गांव तक छोड़ दिया था। लेकिन किस्मत और उस सनकी हाथी को कुछ और ही मंजूर था। वह नए गांव में भी पहुंच गया और परिवार के बचे हुए सदस्यों को अपना निशाना बना लिया।

गांव बदला, घर बदला... पर नहीं बदला मौत का साया

स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, इस बदनसीब परिवार पर 'धुर्बे' हाथी का कहर साल 2010 से ही टूटा हुआ है। पिछले 14 सालों में इस हाथी ने अलग-अलग हमलों में परिवार के दो सदस्यों को मार डाला था। इस लगातार मंडराते खतरे और खौफ से तंग आकर परिवार ने अपना पुराना गांव छोड़ने का फैसला किया। उन्हें लगा कि दूर चले जाने से वे सुरक्षित हो जाएंगे।
 
लेकिन, हाल ही में, यह हाथी उनके नए ठिकाने पर भी आ धमका। हाथी ने अचानक घर पर हमला कर दिया और वहां मौजूद महिला और उसके महज 4 वर्षीय मासूम बेटे को कुचलकर मार डाला। इस तरह इस अभागे परिवार के चार लोग एक ही हाथी का शिकार बन चुके हैं।

25 लोगों का कातिल है 'धुर्बे' हाथी

नेपाल के वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 'धुर्बे' कोई साधारण हाथी नहीं है। वह इस इलाके का सबसे बदनाम और आक्रामक 'सीरियल किलर' हाथी बन चुका है।
 
वन विभाग की रिपोर्ट : साल 2010 से लेकर अब तक यह अकेला हाथी नेपाल और उसके सीमावर्ती इलाकों में 25 से ज्यादा लोगों की जान ले चुका है। वन्यजीव अधिकारी पिछले कई सालों से रेडियो कॉलर और जीपीएस ट्रैकिंग के जरिए इस पर नजर रख रहे हैं, लेकिन इसकी आक्रामकता और घने जंगलों का फायदा उठाकर यह हर बार आबादी वाले इलाकों में घुसकर तबाही मचाने में कामयाब हो जाता है।

आखिर क्यों एक ही परिवार के पीछे पड़ा है हाथी?

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि हाथी बेहद संवेदनशील और तेज दिमाग वाले जीव होते हैं। उनकी याददाश्त (Memory) गजब की होती है।
 
बदले की भावना या गंध? विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी अतीत की घटना में हाथियों को इंसानों द्वारा चोट पहुंचाई गई हो, तो वे उस इलाके और वहां के लोगों की गंध को सालों तक याद रखते हैं। हालांकि, क्या इस परिवार से हाथी की कोई पुरानी दुश्मनी थी, इस पर वैज्ञानिक तौर पर कुछ कहना मुश्किल है, लेकिन लगातार एक ही परिवार को निशाना बनाना वैज्ञानिकों को भी हैरान कर रहा है।
 
बढ़ता इंसानी दखल : जंगलों के कटने और हाथियों के पारंपरिक रास्तों (Corridors) पर इंसानी बस्तियां बसने के कारण ये बेकाबू हाथी हिंसक हो रहे हैं।

अधिकारियों के सामने बड़ी चुनौती

नेपाल वन विभाग और सुरक्षा बल इस हाथी को पकड़ने या ट्रेंकुलाइज (बेहोश) करने की लगातार कोशिशें कर रहे हैं। लेकिन 'धुर्बे' की फुर्ती और घने जंगलों में छिप जाने की आदत के कारण यह ऑपरेशन बेहद पेचीदा हो चुका है। स्थानीय ग्रामीणों में इस घटना के बाद से भारी आक्रोश और दहशत का माहौल है। लोग मांग कर रहे हैं कि इस खूंखार हाथी से उन्हें हमेशा के लिए निजात दिलाई जाए।
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