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Last Updated :वाशिंगटन , गुरुवार, 22 जनवरी 2026 (19:18 IST)

What is Board of Peace : डोनाल्ड ट्रंप का बोर्ड ऑफ पीस क्या है, पाकिस्तान भी बना मेंबर, PM मोदी और पुतिन समेत 60 देशों को न्योता, किसने स्वीकारा और किसने ठुकराया?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा युद्ध खत्म करने के लिए 'बोर्ड ऑफ पीस' का ऐलान किया है। पीएम मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग समेत 60 देशों को न्योता मिला है। जानें क्या है ट्रंप का 20-सूत्रीय शांति

Trump Board of Peace Gaza
गाजा में जारी खूनी संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा कदम उठाया है। 15 जनवरी, 2026 को राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने '20-सूत्रीय शांति फॉर्मूले' के दूसरे चरण के तहत एक 'बोर्ड ऑफ पीस' (Board of Peace) के गठन की घोषणा की। इस बोर्ड का मुख्य उद्देश्य युद्ध के बाद गाजा में शासन व्यवस्था को संभालना और वहां पुनर्निर्माण कार्यों की निगरानी करना है।  खास बात यह भी है कि इस बोर्ड ऑफ पीस में पाकिस्तान भी शामिल है। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उन कई वैश्विक नेताओं में शामिल थे जिन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति ने गाजा पट्टी में इजराइल और हमास के बीच युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण के तहत घोषित बोर्ड में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था।

क्या है 'बोर्ड ऑफ पीस' की भूमिका (What is the role of Board of Peace)

व्हाइट हाउस के मुताबिक यह निकाय एक नई अंतरराष्ट्रीय संस्था और 'अंतरिम शासी प्रशासन' के रूप में काम करेगा। इसके मुख्य कार्यों में शामिल हैं- शासन क्षमता का निर्माण और क्षेत्रीय संबंधों में सुधार।  गाजा का पुनर्निर्माण और बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करना।  पूंजी जुटाना और विकास कार्यों के लिए फंडिंग सुनिश्चित करना। विश्व नेताओं को लिखे पत्र में ट्रंप ने इसे 'वैश्विक संघर्षों को सुलझाने का एक साहसी और नया दृष्टिकोण' बताया है।

बोर्ड में कौन-कौन शामिल हैं (Board of Peace members)

इस शक्तिशाली बोर्ड की अध्यक्षता खुद डोनाल्ड ट्रंप करेंगे। इसके प्रमुख सदस्यों में शामिल हैं- 
मार्को रुबियो (अमेरिकी विदेश मंत्री), स्टीव विटकॉफ (विशेष वार्ताकार), और जेरेड कुशनर।
अजय बंगा (विश्व बैंक के अध्यक्ष) और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर। निकोले म्लादेनोव को बोर्ड का 'उच्च प्रतिनिधि' नियुक्त किया गया है, जो हमास के शासन से गाजा को मुक्त कर वहां 'नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा' (NCAG) के गठन की कमान संभालेंगे।
 

PM मोदी सहित 60 देशों को आमंत्रण

 
ट्रंप प्रशासन ने दुनिया के करीब 60 देशों के प्रमुखों को इस बोर्ड का 'संस्थापक सदस्य' बनने के लिए आमंत्रित किया है। आमंत्रित नेताओं की सूची में शामिल हैं- भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, और इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू। इसके अलावा यूक्रेन के जेलेंस्की, तुर्की के एर्दोगन और पाकिस्तान के शहबाज शरीफ को भी न्योता भेजा गया है।

दो धड़ों में बंटी दुनिया

इन देशों ने किया स्वीकार- हंगरी (विक्टर ओर्बन), संयुक्त अरब अमीरात (UAE), अर्जेंटीना, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, मोरक्को, इजरायल और पाकिस्तान ने इस बोर्ड में शामिल होने पर सहमति जताई है। भारत और चीन ने अभी तक इस बोर्ड में शामिल होने को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। नॉर्वे ने इस प्रस्ताव को अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ बताते हुए खारिज कर दिया है। वहीं, यूक्रेन और ब्रिटेन ने बोर्ड में रूस की भागीदारी पर गहरी चिंता व्यक्त की है। कनाडा शामिल होने को तैयार है, लेकिन उसने स्थायी सदस्यता के लिए जरूरी $1 बिलियन (एक अरब डॉलर) की फीस देने से साफ इनकार कर दिया है।  Edited by : Sudhir Sharma