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Last Updated :वॉशिंगटन , बुधवार, 25 मार्च 2026 (18:26 IST)

डोनाल्ड ट्रंप के 15 प्वाइंट वाले प्रस्ताव टेंशन में इजराइल, क्या पाकिस्तान के 'शांति दूत' वाला प्लान हुआ फेल

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क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को मनाने में जुटे हुए हैं। ईरान को अमेरिका की तरफ से 15 पॉइंट वाला सीजफायर प्रस्ताव मिल गया है। पाकिस्तान के अधिकारियों से यह खबर सामने आई है। पाकिस्तान के अधिकारियों के मुताबिक, इस प्लान में कई महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं। डोनाल्ड ट्रंप ईरान जंग से पीछे हटते और किसी कीमत पर ईरान के साथ सीजफायर की कोशिश करते दिख रहे हैं। 

इधर क्या पाकिस्तान के शांति दूत बनने के अरमान पूरे हो पाएंगे। यदि पाकिस्तान इस युद्ध में मध्यस्थ (Mediator) बनने की कोशिश कर रहा था तो ट्रंप का सीधा हस्तक्षेप उस योजना को दरकिनार कर सकता है। ट्रंप के प्रस्ताव ने इजराइल की टेंशन को बढ़ा दिया है। ईरान को पाकिस्तान का मध्यस्तता करना भी पसंद नहीं आ रहा है।  ईरान में इस समय हालात काफी मुश्किल हो गए हैं। अमेरिका और इजराइल के साथ चल रहे युद्ध का असर आम लोगों की जिंदगी पर साफ दिख रहा है। ऊपर से महंगाई और लंबे समय से चल रही इंटरनेट बंदी ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है।
 

कहीं कच्चा समझौता न कर लें ट्रंप 

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व वाली सरकार ने ईरान को 15-सूत्रीय युद्धविराम योजना भेजी है। ‘न्यूयॉर्क टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के जरिए यह प्लान ईरानी अधिकारियों को सौंप दी गई है। ईरान इस बात से इनकार कर रहा है कि समझौते के लिए उसकी अमेरिका से कोई बातचीत नहीं हो रही है लेकिन ट्रंप की इस पूरी कवायद से इजरायल का टेंशन बढ़ गया है। इजराइल को लग रहा है कि ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ जारी सैन्य दबाव को बीच में ही छोड़कर एक 'कच्चा समझौता' कर सकता है। इजराइली वित्त मंत्री निर बरकात ने कहा है कि ट्रम्प और नेतन्याहू मिलकर ईरान से जुड़ी स्थिति को संभाल रहे हैं। बरकात ने कहा कि ईरान के साथ कोई भी समझौता ऐसा होना चाहिए, जिससे तेहरान के पास कोई सैन्य क्षमता बाकी न रहे और अमेरिका व इजराइल की स्थिति मजबूत बनी रहे।

इजराइल की टेंशन के 3 बड़े कारण

अधूरा मिशन: नेतन्याहू सरकार का लक्ष्य ईरान के 'प्रॉक्सी नेटवर्क' को जड़ से उखाड़ना है। ट्रंप का शांति प्रस्ताव इस मिशन को बीच में ही रोक सकता है।
 
सुरक्षा गारंटी: ट्रंप की नीति अक्सर 'आइसोलेशनिस्ट' (अलग-थलग रहने वाली) होती है। इजराइल को डर है कि अगर भविष्य में ईरान ने समझौता तोड़ा, तो क्या अमेरिका फिर से युद्ध में कूदेगा?
 
यरूशलेम और बस्तियाँ: शांति वार्ता में फिलिस्तीन और क्षेत्रीय सीमाओं पर दबाव बढ़ सकता है।
asim munir and trump

क्या पाकिस्तान का 'शांति दूत' वाला प्लान फेल हो गया?

पाकिस्तान पिछले कुछ समय से खुद को ईरान और पश्चिमी देशों के बीच एक 'ब्रिज' (पुल) के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा था। लेकिन ट्रंप के आने से समीकरण बदल गए हैं:
 
ट्रंप का 'डायरेक्ट डील' अंदाज : ट्रंप किसी तीसरे पक्ष (जैसे पाकिस्तान) के बजाय सीधे देशों के प्रमुखों से बात करना पसंद करते हैं। इससे पाकिस्तान की प्रासंगिकता (Relevance) खत्म हो जाती है।
 
चीन का प्रभाव : पाकिस्तान की मध्यस्थता के पीछे अक्सर चीन का समर्थन होता है। ट्रंप प्रशासन चीन समर्थित किसी भी शांति पहल को दरकिनार करना चाहेगा।
 
आर्थिक संकट : पाकिस्तान की अपनी आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि इजराइल या अमेरिका उसे एक गंभीर मध्यस्थ के रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।

ईरान ने उड़ाया ट्रंप की डिप्लोमेसी का मजाक

ईरान की एंबेसी ने इस स्क्रीनशॉट के जरिए ट्रंप की ‘डिप्लोमेसी’ का सरेआम मजाक उड़ाया है। स्क्रीनशॉट में ऊपर ‘President of PEACE (You)’ लिखा है और नीचे ‘मैसेज योरसेल्फ’ का फीचर दिख रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि ईरान ये कहना चाह रहा है कि ट्रंप ने ये सारे मैसेज खुद को ही भेजे हैं और खुद ही उनका जवाब भी मान लिया है। फोटो में दिख रहा है कि Hey Ayatollah और I will cease attacks for 5days जैसे मैसेज भेजे गए हैं लेकिन दूसरी तरफ से कोई रिप्लाई नहीं आया है। ईरानी एंबेसी ने ट्रंप के ही शब्दों को लिखकर चश्मा पहने हुए इमोजी के साथ पोस्ट किया ‘यही है ईरान के साथ हुई अच्छी और सफल बातचीत’। यह इस बात की ओर इशारा है कि ट्रंप की नजर में जो ‘सफल बातचीत’ है, वह ईरान के लिए सिर्फ एक मजाक है।  Edited by : Sudhir Sharma
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