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लंदन में CJI सूर्यकांत के कार्यक्रम में हंगामा क्यों हुआ, Cockroach Janta Party ने क्या कहा
यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के बिर्कबेक कॉलेज में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के संबोधन के बाद उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब कुछ प्रतिभागियों ने भारत में कथित तौर पर असहमति की आवाजों को दबाए जाने को लेकर सवाल पूछने की कोशिश की। हालांकि कार्यक्रम के संचालक ने इन सवालों को विषय से बाहर बताते हुए उन्हें पूछने की अनुमति नहीं दी। ऑनलाइन आंदोलन 'कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)' के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने भी इन वीडियो क्लिप्स को शेयर किया।
हाल ही में CJI सूर्यकांत ने फर्जी डिग्री धारकों और 'बेरोजगार युवाओं के एक्टिविस्ट बनने' पर टिप्पणी करते हुए 'कॉकरोच' और 'पैरासाइट' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। इसी टिप्पणी के विरोध में ऑनलाइन आंदोलन ने खुद को 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम दिया है। यह संगठन 6 जून को दिल्ली में परीक्षा संबंधी विवादों को लेकर प्रदर्शन करने की भी घोषणा कर चुका है।
Big News! Chief Justice of India Surya Kant heckled. “Give us some respect please,” a young student said! https://t.co/1qzhnkAFBn
— Saurav Das (@SauravDassss) June 5, 2026
क्या था पूरा मामला
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस कार्यक्रम में "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अंतरराष्ट्रीय कानून" विषय पर व्याख्यान दिया था। व्याख्यान के बाद आयोजित इंटरैक्टिव सत्र के दौरान हुई इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
वीडियो में एक छात्रा CJI से कहती दिखाई देती है कि उन्होंने लोकतंत्र और AI के संदर्भ में महत्वपूर्ण बातें रखीं, लेकिन भारत में बढ़ती असहमति-विरोधी प्रवृत्ति को लेकर देश और विदेश के कई कानूनी विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं। छात्रा अपना सवाल पूरा कर पाती, उससे पहले मंच पर मौजूद एंकर ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि पूरे सम्मान के साथ, हम यह सवाल नहीं ले पाएंगे क्योंकि आज का विषय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अंतरराष्ट्रीय कानून है।
CJI सूयकांत ने एआई को लेकर क्या कहा
CJI सूर्यकांत ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल एक काल्पनिक तकनीक नहीं, बल्कि वास्तविकता बन चुकी है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। उन्होंने कहा कि इस दशक में लिए जाने वाले फैसले यह तय करेंगे कि भविष्य में तकनीक, शक्ति, स्वतंत्रता और न्याय के बीच संबंध किस प्रकार के होंगे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक न तो स्वभाव से पूरी तरह लाभकारी होती है और न ही स्वभाव से हानिकारक। इसका प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि समाज उसे किन कानूनी, राजनीतिक और नैतिक ढांचों के भीतर अपनाता और उपयोग करता है।
उन्होंने कहा कि तकनीक अपने आप में न तो स्वाभाविक रूप से कल्याणकारी है और न ही स्वाभाविक रूप से नुकसानदायक। इसका प्रभाव उन कानूनी, राजनीतिक और नैतिक व्यवस्थाओं पर निर्भर करता है, जिनके तहत समाज इसका उपयोग करने का निर्णय लेते हैं। उन्होंने आगे कहा कि कानून की जिम्मेदारी न तो तकनीकी प्रगति का विरोध करना है और न ही उसके सामने बिना किसी सवाल के समर्पण कर देना है। बल्कि कानून का दायित्व यह सुनिश्चित करना है कि तकनीकी शक्ति हमेशा संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक वैधता और मानवीय गरिमा के प्रति जवाबदेह बनी रहे। Edited by : Sudhir Sharma
