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Ali Khamenei Funeral : खामेनेई की अंतिम यात्रा पर बवाल, रूट बदलने से भड़के समर्थक, ईरान ने भारत को क्यों कहा धन्यवाद
ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा के दौरान अंतिम समय में जुलूस का मार्ग बदल दिए जाने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कई दिनों तक सरकारी प्रचार और आधिकारिक घोषणाओं के बाद अंतिम यात्रा के तय रूट में अचानक बदलाव होने से हजारों लोग भ्रमित हो गए। इस मामले पर सरकार समर्थक नेताओं और कट्टरपंथी खेमे से जुड़े मीडिया कार्यकर्ताओं ने भी आयोजन समिति पर कुप्रबंधन, गलत सूचना देने और लोगों को गुमराह करने के आरोप लगाए हैं।
हजारों लोग पुराने रूट पर करते रहे इंतजार
इस्लामिक रिपब्लिक के अधिकारियों द्वारा पहले जारी कार्यक्रम के अनुसार, खामेनेई के पार्थिव शरीर को लेकर वाहन पूर्वी तेहरान की दमावंद स्ट्रीट से आजादी स्क्वायर तक लगभग 20 किलोमीटर लंबे मार्ग से गुजरने वाला था, लेकिन अंतिम यात्रा के दिन ट्रक ने केवल शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के पास से आजादी स्क्वायर तक का छोटा रास्ता तय किया। रूट में अचानक बदलाव की जानकारी समय पर नहीं मिलने के कारण पूर्वी तेहरान में सुबह से इंतजार कर रहे हजारों लोग अंतिम दर्शन से वंचित रह गए।
आयोजकों ने मांगी माफी
लोगों के विरोध के बाद तेहरान में आईआरजीसी की मोहम्मद रसूलुल्लाह कोर के कमांडर और अंतिम यात्रा आयोजन समिति के प्रमुख हसन हसनजादेह ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। उन्होंने दावा किया कि भारी भीड़ के कारण रास्ते पूरी तरह बंद हो गए थे, इसलिए रूट बदलना पड़ा। हालांकि उनका यह स्पष्टीकरण लोगों के गुस्से को शांत नहीं कर सका।
सरकार समर्थक भी हुए नाराज
खामेनेई के कार्यालय से जुड़े मेहदी फजाएली ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कार्यक्रम में कई सकारात्मक पहलू थे, लेकिन सरकारी मीडिया लोगों की नाराजगी दिखाने में पूरी तरह विफल रहा। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे थे।
प्रिंसिपलिस्ट खेमे से जुड़े मीडिया एक्टिविस्ट मेयसाम सईदी ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि उनसे झूठ क्यों बोला गया। उन्होंने पूछा कि यदि भीड़ की वजह से रूट बदला गया था तो पार्थिव शरीर को कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही नए स्थान पर कैसे पहुंचा दिया गया।
एक अन्य मीडिया कार्यकर्ता अबूजर नसर ने भी आयोजन समिति पर खराब प्रबंधन और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया। उनका कहना था कि पार्थिव शरीर को एक रात पहले ही मिकदाद सैन्य अड्डे पर पहुंचा दिया गया था, लेकिन इसकी जानकारी लोगों को नहीं दी गई। इससे हजारों लोग घंटों तक पुराने रूट पर बेवजह इंतजार करते रहे।
अंतिम विदाई से वंचित रहे लोग
'जिहाद-ए-तबयीन' नामक टेलीग्राम चैनल ने भी आयोजन समिति की आलोचना करते हुए कहा कि लोगों से वादा किया गया था कि अंतिम यात्रा पूर्वी तेहरान से निकलेगी, लेकिन वास्तविकता इससे अलग थी। कई लोग दूसरे शहरों से अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे थे, लेकिन वे खामेनेई को अंतिम विदाई भी नहीं दे सके। हालांकि ईरानी सरकारी मीडिया इस अंतिम यात्रा को देश के इतिहास की सबसे बड़ी जनसभाओं में से एक बता रहा है, लेकिन रूट बदलने का विवाद अब इस पूरे आयोजन का सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है।
ईरान ने भारत को कहा धन्यवाद
इस बीच ईरान ने खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भारत सरकार और भारतीय प्रतिनिधिमंडल का आभार व्यक्त किया है। भारत की ओर से कांग्रेस नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने तेहरान पहुंचकर अंतिम संस्कार में भाग लिया।
The Embassy of the Islamic Republic of Iran in the Republic of India extends its heartfelt gratitude and sincere appreciation to the friendly Government and people of India, especially the official delegation that attended on behalf of the Government and people of India, for… pic.twitter.com/Xv01SK2fjz
— Iran in India (@Iran_in_India) July 5, 2026
भारत स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी संदेश में कहा कि भारत सरकार, भारतीय जनता और आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और मानवीय संबंधों का प्रतीक है। दूतावास ने इसे आपसी सम्मान और सच्ची एकजुटता का मजबूत संदेश बताया।
ईरान ने खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए भारत समेत लगभग 100 देशों को आमंत्रित किया था। अंतिम यात्रा तेहरान के अलावा इराक के नजफ और कर्बला सहित कई शहरों से होकर गुजरेगी। अधिकारियों के अनुसार पार्थिव शरीर को लगभग 12 घंटे की यात्रा के बाद मेहराबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक ले जाया जाएगा। इसके बाद 9 जुलाई को उनके गृह नगर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
