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अधिकारियों से कहते हैं, लड़कियां ताड़ने के लिए सूट पहनकर आते हो, इंदौर एयरपोर्ट डायरेक्टर की PMO में शिकायत, जांच टीम आई
एयरपोर्ट डायरेक्टर पर अधिकारियों को गाली बकने, भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप
इंदौर के देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट के डायरेक्टर सुनील मग्गीरवार के खिलाफ गंभीर आरोपों से भरा एक शिकायत पत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय (पीएमओ), नागर विमानन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) मुख्यालय, चीफ विजिलेंस ऑफिसर और सांसद शंकर लालवानी तक पहुंचा है।
इस शिकायत पत्र में एयरपोर्ट डायरेक्टर पर तानाशाही रवैया अपनाने, अधिकारियों और कर्मचारियों को गाली देने, अभद्र भाषा में बात करने, भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और अनुचित दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
यह शिकायत हाई कोर्ट के वरिष्ठ एडवोकेट मनोज रायजादा के नाम से की गई है। पीएमओ से शिकायत को जांच के लिए 17 अप्रैल को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को भेजा गया था। जहां से सोमवार को जीएम सिविल प्रभु सरकार सहित अन्य अधिकारियों का दल इंदौर एयरपोर्ट पहुंचा और जांच शुरू करते हुए दस्तावेज खंगाले और अधिकारियों के बयान लिए। कल भी अधिकारियों ने शिकायत के बिंदुओं पर जांच की। शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि एयरपोर्ट डायरेक्टर सुनील मग्गीरवार ने कुछ ही दिनों में इंदौर एयरपोर्ट का माहौल खराब और तनावपूर्ण बना दिया है। पत्र के अनुसार वे अधिकारियों और कर्मचारियों से अपमानजनक और स्तरहीन भाषा (गाली) का प्रयोग करते हैं तथा लगातार ट्रांसफर की धमकियां देते रहते हैं। शिकायत में सबसे गंभीर आरोपों में से एक यह है कि एक बैठक के दौरान विंटर यूनिफॉर्म सूट पहनकर आए ऑपरेशनल अधिकारियों से डायरेक्टर ने कहा “आप लोग कोई काम नहीं करते, सिर्फ सूट पहनकर यहां लड़कियों को ताड़ने आते हो, कल से कोई सूट पहनकर नहीं आएगा।” पत्र में यह भी कहा गया है कि एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) अधिकारियों को मेडिकल जांच के लिए भोपाल जाना होता है, लेकिन डायरेक्टर ने उन्हें निजी वाहन से यात्रा करने पर रोक लगा दी, जबकि नियमों के तहत अधिकारी इसके पात्र हैं। इससे अधिकारियों में नाराजगी व्याप्त है।
शिकायत एक अन्य आरोप में कहा गया है कि डायरेक्टर मग्गीरवार ने ज्वाइन करने के बाद एक माह से ज्यादा सरकारी गेस्ट हाउस में निवास किया था, उसके बाद वे एयरपोर्ट डायरेक्टर के लिए आरक्षित बंगले में शिफ्ट हुए। इसके बाद भी उन्होंने हाउस रेट अलाउंस (एचआरए) लिया। जबकि गेस्ट हाउस चार्ज ना के बराबर होते हैं और एचआरए की राशि बहुत ज्यादा मिलती है। जिससे एयरपोर्ट अथॉरिटी को आर्थिक नुकसान हुआ, जिसकी जांच की जाए।
सीआईएसएफ से गार्ड लेकर पूरी करते हैं अनुचित मांगें : शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि एयरपोर्ट डायरेक्टर ने सीआईएसएफ से पर्सनल गार्ड लिया है। इस एहसान के बदले सीआईएसएफ की अनुचित मांगों और कार्यों को पूरा करवाने के लिए अधिकारियों पर दबाव बनाते हैं। सवाल उठाया गया है कि क्या वे सीआईएसएफ गार्ड के लिए पात्र हैं।
पत्र में यह भी दावा किया गया है कि डायरेक्टर सिविल विभाग के कुछ अधिकारियों से सांठगांठ कर गैरजरूरी निर्माण कार्यों को तुरंत मंजूरी देते हैं, जबकि अन्य अनुभागों की फाइलों को अनावश्यक रूप से रोका जाता है, जिसकी जांच फाइलें देखकर की जा सकती है। शिकायत में मध्यप्रदेश फ्लाइंग क्लब (एमपीएफसी) गेट के सामने चल रहे सिविल कार्य का उदाहरण देते हुए लाखों रुपए गैरजरूरी तरीके से खर्च करने का आरोप लगाया गया है।
डीजीसीए के निरीक्षण को लेकर भी शिकायत में गंभीर बातें कही गई हैं। आरोप है कि निरीक्षण के दौरान एयरपोर्ट डायरेक्टर स्वयं एयरपोर्ट अथॉरिटी की कमियां अधिकारियों के सामने उजागर करते हैं, ताकि बाद में अधिकारियों पर दबाव बनाया जा सके और नए सिविल कार्यों के नाम पर आर्थिक पैसा कमाया जा सके। साथ शिकायत में "मे आई हेल्प यू" टेंडर को लेकर आरोप है कि प्रक्रिया में गलती के कारण प्रचालन अनुभाग ने टेंडर निरस्त करने का नोट दिया था, लेकिन डायरेक्टर ने सांठगांठ कर उसे आगे बढ़ाने का दबाव बनाया। हालांकि बाद में क्षेत्रीय कार्यालय ने टेंडर निरस्त कर नया टेंडर जारी करने के निर्देश दिए। शिकायत में एक और गंभीर आरोप लगाया गया है। कहा गया है कि एक अधिकारी को अस्वस्थ होने के बावजूद अचानक रिलीव कर दिया गया। शिकायत के अनुसार डायरेक्टर ने यह तक कहा कि “सांसद लालवानी एयरपोर्ट पर ज्यादा दखल देते हैं, जो मुझे पसंद नहीं है और ये सांसद का आदमी है, उन्हें खबरें पहुंचाता है।"
डायरेक्टर के ट्रांसफर की मांग : शिकायतकर्ता ने पत्र में लिखा है कि इंदौर एयरपोर्ट मध्यप्रदेश का सबसे व्यस्त विमानतल है, जहां प्रतिदिन 100 से अधिक फ्लाइट ऑपरेट होती हैं। ऐसे महत्वपूर्ण एयरपोर्ट पर इस प्रकार का माहौल सुरक्षा और संचालन दोनों के लिए ठीक नहीं है। पत्र में मांग की गई है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और एयरपोर्ट डायरेक्टर का ट्रांसफर किसी छोटे स्टेशन पर किया जाए, वे इतने बड़े एयरपोर्ट को संभालने के योग्य नहीं हैं।
सभी आरोप तथ्यहीन हैं : इस बारे में एयरपोर्ट डायरेक्टर सुनील मग्गीरवार ने बताया कि मेरे खिलाफ की गई शिकायत के सभी आरोप तथ्यहीन हैं। मैंने जांच अधिकारियों को सभी आरोपों को लेकर बिंदुवार जवाब भी दे दिया है। ना तो मैंने किसी अधिकारी के साथ बुरा व्यवहार या गलत भाषा का प्रयोग किया है ना ही कोई गलत टिप्पणी की है। नियमानुसार ट्रांसफर के बाद हमें दो माह तक गेस्ट हाउस में रहने की पात्रता होती है। आवास खाली ना होने के कारण में गेस्ट हाउस में रहा और उसका तय शुल्क भी दिया। यह सही है कि इस दौरान मैंने एचआरए भी लिया। एचआरए कितना मिला और शुल्क कितना दिया यह एचआर से चेक करना पड़ेगा।
Edited By: Naveen R Rangiyal
इस शिकायत पत्र में एयरपोर्ट डायरेक्टर पर तानाशाही रवैया अपनाने, अधिकारियों और कर्मचारियों को गाली देने, अभद्र भाषा में बात करने, भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और अनुचित दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
यह शिकायत हाई कोर्ट के वरिष्ठ एडवोकेट मनोज रायजादा के नाम से की गई है। पीएमओ से शिकायत को जांच के लिए 17 अप्रैल को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को भेजा गया था। जहां से सोमवार को जीएम सिविल प्रभु सरकार सहित अन्य अधिकारियों का दल इंदौर एयरपोर्ट पहुंचा और जांच शुरू करते हुए दस्तावेज खंगाले और अधिकारियों के बयान लिए। कल भी अधिकारियों ने शिकायत के बिंदुओं पर जांच की। शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि एयरपोर्ट डायरेक्टर सुनील मग्गीरवार ने कुछ ही दिनों में इंदौर एयरपोर्ट का माहौल खराब और तनावपूर्ण बना दिया है। पत्र के अनुसार वे अधिकारियों और कर्मचारियों से अपमानजनक और स्तरहीन भाषा (गाली) का प्रयोग करते हैं तथा लगातार ट्रांसफर की धमकियां देते रहते हैं। शिकायत में सबसे गंभीर आरोपों में से एक यह है कि एक बैठक के दौरान विंटर यूनिफॉर्म सूट पहनकर आए ऑपरेशनल अधिकारियों से डायरेक्टर ने कहा “आप लोग कोई काम नहीं करते, सिर्फ सूट पहनकर यहां लड़कियों को ताड़ने आते हो, कल से कोई सूट पहनकर नहीं आएगा।” पत्र में यह भी कहा गया है कि एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) अधिकारियों को मेडिकल जांच के लिए भोपाल जाना होता है, लेकिन डायरेक्टर ने उन्हें निजी वाहन से यात्रा करने पर रोक लगा दी, जबकि नियमों के तहत अधिकारी इसके पात्र हैं। इससे अधिकारियों में नाराजगी व्याप्त है।
सीआईएसएफ से गार्ड लेकर पूरी करते हैं अनुचित मांगें : शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि एयरपोर्ट डायरेक्टर ने सीआईएसएफ से पर्सनल गार्ड लिया है। इस एहसान के बदले सीआईएसएफ की अनुचित मांगों और कार्यों को पूरा करवाने के लिए अधिकारियों पर दबाव बनाते हैं। सवाल उठाया गया है कि क्या वे सीआईएसएफ गार्ड के लिए पात्र हैं।
पत्र में यह भी दावा किया गया है कि डायरेक्टर सिविल विभाग के कुछ अधिकारियों से सांठगांठ कर गैरजरूरी निर्माण कार्यों को तुरंत मंजूरी देते हैं, जबकि अन्य अनुभागों की फाइलों को अनावश्यक रूप से रोका जाता है, जिसकी जांच फाइलें देखकर की जा सकती है। शिकायत में मध्यप्रदेश फ्लाइंग क्लब (एमपीएफसी) गेट के सामने चल रहे सिविल कार्य का उदाहरण देते हुए लाखों रुपए गैरजरूरी तरीके से खर्च करने का आरोप लगाया गया है।
डीजीसीए के निरीक्षण को लेकर भी शिकायत में गंभीर बातें कही गई हैं। आरोप है कि निरीक्षण के दौरान एयरपोर्ट डायरेक्टर स्वयं एयरपोर्ट अथॉरिटी की कमियां अधिकारियों के सामने उजागर करते हैं, ताकि बाद में अधिकारियों पर दबाव बनाया जा सके और नए सिविल कार्यों के नाम पर आर्थिक पैसा कमाया जा सके। साथ शिकायत में "मे आई हेल्प यू" टेंडर को लेकर आरोप है कि प्रक्रिया में गलती के कारण प्रचालन अनुभाग ने टेंडर निरस्त करने का नोट दिया था, लेकिन डायरेक्टर ने सांठगांठ कर उसे आगे बढ़ाने का दबाव बनाया। हालांकि बाद में क्षेत्रीय कार्यालय ने टेंडर निरस्त कर नया टेंडर जारी करने के निर्देश दिए। शिकायत में एक और गंभीर आरोप लगाया गया है। कहा गया है कि एक अधिकारी को अस्वस्थ होने के बावजूद अचानक रिलीव कर दिया गया। शिकायत के अनुसार डायरेक्टर ने यह तक कहा कि “सांसद लालवानी एयरपोर्ट पर ज्यादा दखल देते हैं, जो मुझे पसंद नहीं है और ये सांसद का आदमी है, उन्हें खबरें पहुंचाता है।"
डायरेक्टर के ट्रांसफर की मांग : शिकायतकर्ता ने पत्र में लिखा है कि इंदौर एयरपोर्ट मध्यप्रदेश का सबसे व्यस्त विमानतल है, जहां प्रतिदिन 100 से अधिक फ्लाइट ऑपरेट होती हैं। ऐसे महत्वपूर्ण एयरपोर्ट पर इस प्रकार का माहौल सुरक्षा और संचालन दोनों के लिए ठीक नहीं है। पत्र में मांग की गई है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और एयरपोर्ट डायरेक्टर का ट्रांसफर किसी छोटे स्टेशन पर किया जाए, वे इतने बड़े एयरपोर्ट को संभालने के योग्य नहीं हैं।
Edited By: Naveen R Rangiyal
