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Last Updated : गुरुवार, 9 अप्रैल 2026 (15:18 IST)

इंदौर के स्‍वाद का स्‍याह पहलू, मावा, घी, पनीर के हर महीने 5 नमूने फेल, स्‍वच्‍छ शहर में मिलावट का जहर

डॉक्‍टरों की चेतावनी : हो सकता है पीलिया, टाईफाइड और हेजा

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इंदौर पूरे देश में अपनी सफाई और स्‍वाद के लिए जाना जाता है, चाहे कचोरी- समोसे की बात हो या दाल बाफले की। चाहे इंदौर का पोहा हो या जलेबी। देश- दुनिया के लोग इंदौर के खाने के शौकीन हैं, लेकिन इंदौर के स्‍वाद का एक स्‍याह पहलू यह भी है कि यहां हर महीने कम से कम 5 फूड सैंपल फेल हो रहे हैं। यानी खाने पीने में जमकर मिलावट की जा रही है।

हैरान करने वाली बात है कि इंदौर में घी, मावा, पनीर, मिठाई, तेल, नमकीन आदि कई खाद्य सामग्रियों के नमूने फेल हो रहे हैं। वित्तीय वर्ष की रिपोर्ट में 893 में से 65 सैंपल हुए फेल, 480 सैंपलों की रिपोर्ट का अब भी इंतजार है। बता दें कि इंदौर स्‍वाद नगरी है यहां हर गली में खाने पीने की दुकान मिल जाएगी, लेकिन स्‍वाद के अलावा यहां गंदगी और मिलावट का भी तड़का लगाया जा रहा है। डॉक्‍टर ऐसे अमानक खाद्य सामग्रियों के सेवन को स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बेहद खतरनाक मानते हैं।

हर महीने 5 सैंपल फेल : खाद्य एवं सुरक्षा विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में इंदौर में हर महीने 5 से ज्यादा फूड सैंपल फेल हुए हैं। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि प्रशासन की सख्ती के बाद भी शहर में मिलावटखोर सक्रिय हैं और लोगों की सेहत से खुलेआम खिलवाड़ कर रहे हैं।

साल 2025-26 के हाल : शहर में खाद्य सुरक्षा की स्थिति को लेकर यह चिंताजनक तस्वीर विभाग की रिपोर्ट में ही सामने आई है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आंकड़े बताते हैं कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 1373 सैंपल लिए गए, जिनमें से 893 की जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई। इन रिपोर्ट में 65 सैंपल फेल पाए गए। 12 महीनों में 65 सैंपल फेल होने का सीधा मतलब है कि हर महीने औसत 5 से ज्यादा और हर हफ्ते 1 से ज्यादा सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे। यह आंकड़ा इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यह सिर्फ जांच में पकड़े गए मामलों की बात करता है। असल में बाजार में इससे कहीं ज्यादा मिलावट होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

92 प्रतिशत से ज्यादा सैंपल पास: हालांकि मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी मनीष स्वामी का कहना है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 65 सैंपल फेल हुए हैं, लेकिन दूसरा पक्ष यह भी है कि 893 सैंपल में से 828 सैंपल पास हुए हैं, जो कुल सैंपलों का 92.7 प्रतिशत है, यानी इंदौर में 92 प्रतिशत से ज्यादा खाद्य पदार्थ जांच में सही पाए गए हैं। विभाग लगातार सख्ती से कार्रवाई कर रहा हैं, ताकि मिलावट पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सके।

ये खाद्य पदार्थ हो रहे फेल : इंदौर में लगातार खाद्य पदार्थ फेल होने के मामले सामने आ रहे हैं। जो उत्‍पाद फेल हो रहे हैं उनमें मावा, पनीर समेत दूध से बनी सभी सामग्री, मिठाई, घी, बेसन, तेल, नमकीन, पैक्‍ड जूस आदि। कई प्रोडक्‍ट पर लेबलिंग का पालन नहीं किया।
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ये है आंकड़ों की हकीकत?
  • कुल सैंपल – 1373
  • प्राप्त जांच रिपोर्ट – 893
  • लंबित रिपोर्ट – 480
  • फेल सैंपल – 65
  • औसत – हर महीने 5+ सैंपल फेल
  • दर्ज प्रकरण – 47
  • निर्णित प्रकरण – 75
  • दोष सिद्ध – 75
  • कुल जुर्माना – 1,13,05,000 रुपए
अभी 480 खाद्य पदार्थों की रिपोर्ट आना है : खाद्य औषधि प्रशासन द्वारा वित्तीय वर्ष में कुल 1373 सैंपल लिए गए, जिन्हें जांच के लिए भोपाल स्थित राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया। इनमें से अब तक सिर्फ 893 सैंपलों की रिपोर्ट ही मिली है। 480 सैंपलों की रिपोर्ट अब भी मिलना बाकी है। इससे साफ है कि मिलावट खोरी का प्रतिशत और बढ़ेगा, साथ ही देरी से रिपोर्ट मिलने के कारण कार्रवाई लेट हो रही है और मिलावटखोरों को छूट मिल रही है।

75 मामलों में दोषी पाए गए मिलावटखोर: रिपोर्ट के मुताबिक 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच फेल हुए 65 सैंपलों में से 47 मामलों में अब तक प्रकरण दायर किए जा चुके हैं, वहीं इस दरमियान कुल 75 मामलों में कोर्ट ने निर्णय दिए हैं। इनमें वे मामले भी शामिल है, जो पहले से लंबित थे। खास बात यह है कि इन सभी मामलों में आरोपी मिलावटखोर दोषी पाए गए है। इन पर 1.13 करोड़ का जुर्माना भी लगाया गया है।
  • मिलावटी सामग्री से सेहत को खतरा
  • डॉक्‍टरों ने मिलावटी सामग्री को बताया खतरनाक
  • नकली सामग्री से सेहत को हो सकता है नुकसान
  • पीलिया, टाईफाइड और हेजे का खतरा
  • संक्रमण बढ़ा तो बढ़ा सकता है मर्ज
पीलिया, टाईफाइड और हेजे का खतरा : मिलावटी या अमानक खाद्य सामग्री के सेवन को डॉक्‍टर बेहद खतरनाक बताते हैं। जनरल फिजिशियन डॉ प्रवीण दाणी ने वेबदुनिया को बताया कि किसी भी तरह की मिलावटी वस्‍तू सेहत के लिए खराब है। इनसे संक्रमण का खतरा होता है। ऐसी सामग्रियों को प्रिर्जेवेशन की जरूरत होती है। उन्‍होंने बताया कि संक्रमण की वजह से पीलिया, टाईफाइड और हेजा जैसी बीमारियां होने की आशंका रहती है। अगर संक्रमण बढ़ता है तो यह खतरनाक भी हो सकता है। ऐसे में लोगों को ऐसी सामग्री खाने से बचना चाहिए।
रिपोर्ट : नवीन रांगियाल 
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