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  4. Councillor Bizarre Response to Women Who Went to Complain About Water Supply in indore

पानी की शिकायत लेकर गईं महिलाओं को पार्षद का अजीब जवाब, मुसलमानों की तरह ज्‍यादा बच्‍चे पैदा करो, महिलाएं बोलीं, नहलाएंगे कैसे?

कई जगह पानी के लिए मारामारी, चितावद में महिलाओं की ऐलान, नल नहीं तो बिल नहीं

indore water crisis
इंदौर में तापमान बढ़ने के साथ ही पानी की सस्‍मयाएं भी विकराल होती जा रही हैं। लोग टेंकरों की तरफ रूख कर रहे हैं। टेंकरवालों ने भी अपने भाव बढ़ा दिए हैं। लोगों को पानी के लिए जमकर परेशान होना पड रहा है। उस पर लोग शिकायत कर रहे हैं तो उन्‍हें अजीब जवाब मिल रहे हैं।

इंदौर के वार्ड नंबर 70 में लोकनायक नगर की महिलाएं जब पानी की समस्या लेकर यहां के पार्षद भरत सिंह रघुवंशी के पास पहुंचीं, तो पार्षद ने उन्हें अजीब और चौंकाने वाला जवाब दिया। पार्षद रघुवंशी ने कहा कि परिवार तो बड़ा होना चाहिए, नहीं बढ़ेगा तो काम कैसे चलेगा? मुसलमानों को देखो।
बता दें कि शहर के 85 में से 14 वार्डों में नर्मदा सप्लाई और बोरिंग दोनों ही संकट में आ गए हैं। जिससे हालात खराब होते जा रहे हैं। जब कुछ महिलाएं शिकायत लेकर पार्षद के पास गईं तो उन्‍हें ज्‍यादा बच्‍चे पैदा करने के लिए कहा, इस पर महिलाओं ने पलटकर कहा इतने बच्चे हो जाएंगे तो नहलाएंगे किससे, पानी है कहां? वहीं, निगम प्रशासन का कहना है कि मांग और आपूर्ति में अंतर आ गया है। जहां ज्‍यादा संकट है वहां पानी मुहैया करा रहे हैं, ऐसे क्षेत्रों की मैपिंग कर रहे हैं।

कई जगह जलस्‍तर घटा, बोरिंग सूखे : कुछ क्षेत्रें में जलस्तर तेजी से गिरा है और कई बोरिंग सूख चुके हैं। कई इलाकों में नर्मदा का पानी नहीं पहुंचता, जिससे लोग पूरी तरह टैंकरों पर निर्भर हैं। परदेशीपुरा और आसपास के क्षेत्रों में हालात और भी खराब हैं। यहां के निवासी बताते हैं कि लोग सुबह 4 बजे से ही साइकिल और ठेलों पर डिब्बे लादकर पानी की तलाश में निकल जाते हैं। पानी भरने में रोज 2 से 3 घंटे लग रहे हैं।

नल नहीं तो बिल नहीं : वहीं वार्ड 64 के चितावद में महिलाओं ने घोषणा कर दी है कि अगर नल नहीं आएगा तो बिल नहीं भरेंगे। रहवासियों का कहना है कि वे चार साल से पानी की समस्या झेल रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं मिला। टैंकर कुछ मिनट के लिए आता है, जिससे सभी को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। लोगों को सुबह पांच बजे उठकर पानी की व्‍यवस्‍था में लगना पड रहा है।

कई जगह से आ रहीं शिकायतें : पानी की समस्या को लेकर सीएम हेल्पलाइन में सबसे ज्यादा शिकायतें दर्ज हो रही हैं। अप्रैल महीने में पेयजल और नए कनेक्शन से जुड़ी 1586 शिकायतें सामने आईं, जबकि 258 शिकायतें दूषित और बदबूदार पानी को लेकर दर्ज की गईं। पानी की कमी के पीछे पुरानी पाइपलाइन, लीकेज और मेंटेनेंस की कमी इस समस्या की बड़ी वजह हैं।

हजारों शिकायतें लंबित : नगरीय विकास विभाग पर दबाव अप्रैल में नगरीय विकास एवं आवास विभाग से जुड़ी 5 हजार 378 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से 3 हजार 260 अब भी लंबित हैं। 4 मई तक 5 हजार 884 शिकायतें लंबित हो चुकी हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि संकट कितना ज्‍यादा है।

टेंकर वालों की मनमानी शुरू : संकट के समय में निजी टैंकर संचालकों की मनमानी भी सामने आ रही है। पहले 500 रुपए में मिलने वाला पानी का टैंकर अब 700 से 1000 रुपए तक पहुंच गया है। वहीं, नर्मदा लाइन से पानी की सप्लाई भी घट गई है। पहले जहां नल एक घंटे तक चलते थे, अब सिर्फ 15 मिनट ही पानी मिल पा रहा है।

क्‍या कह रहे निगम कमिश्‍नर : नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने बताया कि पानी की मांग ज्‍यादा है और आपूर्ति उतनी नहीं हो पा रही है। जहां पाइपलाइन नहीं है, वहां नि:शुल्क टैंकरों की संख्या बढ़ाई जा रही है और ज्‍यादा संकट वाले इलाकों की मैपिंग की जा रही है। अवैध मोटर पंप लगाने वालों पर कार्रवाई भी जारी है।
Edited By: Naveen R Rangiyal
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