हिन्दी कविता - वसंत


शम्भू नाथ|
मधुर मधुर बहती हवाएं, छोड़ रही संवाद 
प्रकृति छटा बिखेर रही, आया है मधुमास  
आया है अनोखा मास, उमंगे उड़ रही हैं 
भंवरा गीत सुनाता,कलियां खिल रही हैं >
 
महक रही हैं क्यारी,मच रहा उल्लास 
सजी बसंती मचल रही है, होगा अब उत्पात >  
मधुर मधुर बहती हवाएं, छोड़ रही संवाद 
प्रकृति छटा बिखेर रही, आया है मधुमास



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