Haridwar kumbh mela 2021 : नागा साधुओं के हिमालय में तप करने के 10 राज

में आज भी हजारों ऐसे स्थान हैं जिनको देवी-देवताओं और तपस्वियों के रहने का स्थान माना गया है। हिमालय में जैन, बौद्ध और हिन्दू संतों के कई प्राचीन मठ और गुफाएं हैं। मान्यता है कि गुफाओं में आज भी कई ऐसे तपस्वी हैं, जो हजारों वर्षों से तपस्या कर रहे हैं। इस संबंध में हिन्दुओं के दसनामी अखाड़े, नाथ संप्रदाय के सिद्धि योगियों के इतिहास का अध्ययन किया जा सकता है। उनके इतिहास में आज भी यह दर्ज है कि हिमालय में कौन-सा मठ कहां पर है और कितनी गुफाओं में कितने संत विराजमान हैं। आओ जानते हैं हिमालय में साधुओं और नागा बाबाओं के करने के 10 राज।

1. भारत का प्रारंभिक इतिहास हिमालय से ही जुड़ा हुआ है। यहीं पर त्रिविष्टप (तिब्बत) क्षेत्र को प्राचीन आर्यों का मूल निवास स्थान माना गया है। यहीं पर इंद्र, दक्ष, कश्यप, गंधर्व, कुबेर, यक्ष, देव आदि दिव्यात्माओं का क्षेत्र रहा है। यहीं पर शिव का कैलाश है जो का केंद्रीय तीर्थ है। प्राचीन काल में हिमालय में ही देवता रहते थे। यहीं पर ब्रह्मा, विष्णु और शिव का स्थान था और यहीं पर नंदनकानन वन में इंद्र का राज्य था। इंद्र के राज्य के पास ही गंधर्वों और यक्षों का भी राज्य था।
2. स्वर्ग की स्थिति दो जगह बताई गई है मुण्डकोपनिषद् के अनुसार सूक्ष्म-शरीरधारी आत्माओं का एक संघ है। इनका केंद्र हिमालय की वादियों में उत्तराखंड में स्थित है। इसे देवात्मा हिमालय कहा जाता है। देवात्मा हिमालय कहा जाता है। इन दुर्गम क्षेत्रों में स्थूल-शरीरधारी व्यक्ति सामान्यतया नहीं पहुंच पाते हैं। अपने श्रेष्ठ कर्मों के अनुसार सूक्ष्म-शरीरधारी आत्माएं यहां प्रवेश कर जाती हैं। जब भी पृथ्वी पर संकट आता है, नेक और श्रेष्ठ व्यक्तियों की सहायता करने के लिए वे पृथ्वी पर भी आती हैं।
3. हिमालय क्षेत्र में प्रकृति के सैकड़ों देखने को मिलेंगे। एक ओर जहां सुंदर और अद्भुत झीलें हैं तो दूसरी ओर हजारों फुट ऊंचे हिमखंड। यही से भारत की प्रमुख नदियों का उद्गम होता है।

4. कहते हैं कि हिमालय की वादियों में रहने वालों को कभी दमा, टीबी, गठिया, संधिवात, कुष्ठ, चर्मरोग, आमवात, अस्थिरोग और नेत्र रोग जैसी बीमारी नहीं होती। हिमालय क्षेत्र के राज्य जम्मू-कश्मीर, सिक्किम, हिमाचल, उत्तराखंड, असम, अरुणाचय आदि क्षेत्रों के लोगों का स्वास्थ्य अन्य प्रांतों के लोगों की अपेक्षा बेहतर होता है।

5. यहां पर ध्यान और योग के माध्यम से यहां की औसत आयु की सीमा कई गुना बढ़ाई जा सकती है। तिब्बत के लोग निरोगी रहकर कम से कम 100 वर्ष तो जीवित रहते ही हैं। कई लोगों की उम्र 125 से अधिक रही है।

6. हजारों किलोमीटर क्षेत्र में फैला हिमालय चमत्कारों की खान है। मान्यता है कि कस्तूरी मृग और येति का निवास हिमालय में ही है। येति या यति एक विशालकाय हिम मानव है जिसे देखे जाने की घटना का जिक्र हिमालय के स्थानीय निवासी करते आए हैं। येति आज भी एक है।
7. पुराणों के अनुसार प्राचीनकाल में विवस्ता नदी के किनारे मानव की उत्पत्ति हुई थी। यहीं से मानव संपूर्ण धरती पर फैल गए और भिन्न भिन्न तरह की जातियों को जन्म दिया।

8. हिमालय क्षेत्र में प्रकृति के सैकड़ों चमत्कार देखने को मिलेंगे। इस क्षेत्र में कई प्रयोगों के दौरान पाया गया कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अचानक काम करना बंद कर देते हैं। कई पर्यटकों की इलेक्ट्रॉनिक घड़ियां अचानक बंद हो जाती हैं। कई बार तो घड़ियों के समय में बदलाव की घटनाएं भी सामने आईं। जम्मू-कश्मीर की लेह सीमा में स्थित एक चमत्कारिक पहाड़ी है जिसे लोग मैग्नेटिक हिल कहते हैं। सामान्यतौर पर पहाड़ी के फिसलन पर वाहन को गियर में डालकर खड़ा किया जाता है। यदि ऐसा नहीं किया जाए तो वाहन नीचे की ओर लुढ़ककर खाई में गिर सकता है लेकिन इस मैग्नेटिक हिल पर वाहन को न्यूट्रल करके खड़ा कर दिया जाए तब भी यह नीचे की ओर नहीं जाता, बल्कि ऊपर की ओर ही खींचा चला जाता है। कहते हैं कि हिमालय में एलियंस रहते हैं। यहां का कैलाश पर्वत सबसे ज्यादा चमत्कारिक स्थान है। इस तरह यहां कई तरह के चमत्कारिक स्थान है।
9. हनुमानजी हिमालय के एक क्षेत्र से ही संजीवनी का पर्वत उखाड़कर ले गए थे। हिमालय ही एकमात्र ऐसा क्षेत्र है, जहां दुनियाभर की जड़ी-बूटियों का भंडार है। हिमालय की वनसंपदा अतुलनीय है। हिमालय में लाखों जड़ी-बूटियां हैं जिससे व्यक्ति के हर तरह के रोग को दूर ही नहीं किया जा सकता बल्कि उसकी उम्र को दोगुना किया जा सकता है। इसके अलावा ऐसी भी कई चमत्कारिक जड़ी-बूटियां हैं जिनका वर्णन अथर्ववेद, आयुर्वेद और जड़ी-बूटियों के ग्रंथों में मिलता है। सोमवल्ली, संजीवनी बूटी, अरुंधती, ब्रह्मकमल जैसी वनस्पतियां हिमालय के एक विशेष क्षेत्र में पाई जाती हैं।
10. आध्यात्मिक शोधों के लिए, साधनाओं सूक्ष्म शरीरों को विशिष्ट स्थिति में बनाए रखने के लिए यह स्थान विशेष रूप से उपयुक्त है। इतिहास पुराणों के अवलोकन से प्रतीत होता है कि इस क्षेत्र को देवभूमि कहा गया और स्वर्गवत माना गया है। यहां प्राचीन काल में देवी और देवता साक्षात रहते थे। यहां आकर योग और ध्‍यान करके आसानी से मोक्ष पाया जा सकता है।



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