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राजकोट बनेगा ‘जीरो वेस्ट सिटी’? 17.70 करोड़ के MRF सेंटर और CBG प्लांट से टॉप-10 स्वच्छ शहरों में जगह बनाने की तैयारी
केंद्र सरकार द्वारा हर साल आयोजित होने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण में पिछले साल राजकोट ने जबरदस्त छलांग लगाते हुए 39वें स्थान से सीधे 19वां स्थान हासिल किया था। अब आने वाले महीनों में नए सर्वेक्षण के परिणाम घोषित होने वाले हैं, ऐसे में राजकोट को देश के टॉप-10 शहरों में स्थान दिलाने के लिए राजकोट महानगरपालिका के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट विभाग ने कमर कस ली है। इसके लिए शहर में म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016 के कड़े क्रियान्वयन के साथ कचरे की उचित प्रोसेसिंग द्वारा लैंडफिल साइट पर 'जीरो वेस्ट' (शून्य कचरा) ले जाने की दिशा में ठोस काम शुरू किया गया है।
₹17.70 करोड़ की लागत से 3 अत्याधुनिक MRF सेंटर्स तैयार
राजकोट शहर में रोजाना पैदा होने वाले लगभग 800 मीट्रिक टन कचरे के वैज्ञानिक निपटान के लिए ₹17 करोड़ 70 लाख की अनुमानित लागत से 3 अलग-अलग स्थानों पर MRF (मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी) सेंटर्स बनाए गए हैं। इनमें से कोठारिया और केएसडी रिफ्यूज ट्रांसफर स्टेशन के दो सेंटर्स पूरी तरह से बनकर तैयार हो चुके हैं, जबकि रैयाधार में तीसरे सेंटर का काम फिलहाल जोरों पर चल रहा है। इन तीनों सेंटर्स की व्यक्तिगत क्षमता 150-150 मीट्रिक टन की होगी, जिससे रोजाना कुल 450 मीट्रिक टन सूखा कचरा प्रोसेस किया जा सकेगा।
प्लास्टिक-कांच का वर्गीकरण और ट्रोमेल मशीनरी का उपयोग
MRF सेंटर का मुख्य लाभ यह होगा कि शहर से इकट्ठा होने वाले कचरे में से रीसायकल और रीयूज़ (पुनः उपयोग) होने वाली चीजें जैसे प्लास्टिक, कांच और गत्ता आदि को अलग किया जाएगा। इस काम के लिए सेंटर्स पर अत्याधुनिक तकनीक वाली तीन प्रकार की ट्रोमेल मशीनें लगाई गई हैं। इन मशीनों में 60 mm और 100 mm आकार के फिल्टर होने के कारण ये सूखे कचरे का सटीक वर्गीकरण करेंगी और कीमती स्क्रैप सामग्री को अलग कर लेंगी, जिससे नाकरावाड़ी लैंडफिल साइट पर कचरे का बोझ बहुत कम हो जाएगा।
नाकरावाड़ी में 'वेस्ट टू कम्पोस्ट' प्लांट का निर्माण
सूखा कचरा अलग होने के बाद बचे हुए गीले कचरे का उपयोग खाद बनाने के लिए किया जाएगा। गीला कचरा आसानी से सड़ने वाला होने के कारण इसे सीधे नाकरावाड़ी ट्रांसफर किया जाएगा, जहां 250 मीट्रिक टन की क्षमता वाला 'वेस्ट टू कम्पोस्ट' (कचरे से खाद) प्लांट जोरों से बन रहा है। शहर में उत्पन्न होने वाले 800 मीट्रिक टन कचरे में से 450 मीट्रिक टन सूखा कचरा MRF सेंटर जाएगा और बाकी बचे कचरे में से 250 मीट्रिक टन कचरे का उपयोग इस प्लांट में खाद बनाने के लिए किया जाएगा।
अडानी ग्रीन्स कंपनी द्वारा स्थापित होगा अत्याधुनिक CBG प्लांट
वेस्ट मैनेजमेंट की प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाने के लिए पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के आधार पर नाकरावाड़ी में एक अत्याधुनिक CBG (कंप्रेस्ड बायो गैस) प्लांट स्थापित करने की योजना भी बनाई गई है। महानगरपालिका द्वारा यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अडानी ग्रीन्स कंपनी को सौंपा गया है। वर्तमान में यह प्रोजेक्ट एग्रीमेंट स्टेज (अनुबंध के चरण) पर है और कंपनी के साथ आधिकारिक समझौता पूरा होने के बाद वहां एक और 250 मीट्रिक टन वेस्ट प्रोसेसिंग क्षमता वाला बायो गैस प्लांट आकार लेगा। Edited by : Sudhir Sharma
