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पीएम की 'नो गोल्ड' अपील से ज्वेलरी उद्योग में हड़कंप, सूरत के व्यापारियों ने जताई चिंता
PM Modi Gold Appeal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और बढ़ते आयात घाटे को नियंत्रित करने के लिए नागरिकों से एक साल तक सोना न खरीदने की विनम्र अपील की है। भारत के लिए सोना और कच्चे तेल का आयात विदेशी मुद्रा भंडार पर सबसे बड़ा बोझ डालता है, जिससे रिजर्व के आंकड़ों में भारी उतार-चढ़ाव आता है। सूरत के ज्वेलर्स प्रधानमंत्री की इस राष्ट्रहित की चिंता से सहमत तो हैं, लेकिन इस निर्णय से उद्योग पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर काफी चिंतित नजर आ रहे हैं।
व्यापार में 40% से 80% तक की भारी गिरावट की आशंका
ज्वैलर्स की वर्तमान आर्थिक स्थिति के बारे में दीपक चौकसी ने चिंताजनक आंकड़े पेश किए हैं। सोने की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के कारण ज्वेलर्स का बिजनेस पहले से ही 40% तक कम हो चुका है। यदि प्रधानमंत्री की इस अपील के कारण लोग खरीदारी बंद कर देते हैं, तो टर्नओवर में और 40% की गिरावट आ सकती है। इस प्रकार, ज्वेलरी उद्योग केवल 20% टर्नओवर पर सिमट जाने की आशंका है, जो इस क्षेत्र के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। ALSO READ: Akshaya Tritiya गोल्ड रेट अलर्ट: सोने की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल, क्या इस अक्षय तृतीया गोल्ड खरीदना है फायदे का सौदा?
6 लाख कारीगरों की आजीविका पर संकट
सूरत न केवल हीरा उद्योग के लिए, बल्कि ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग के हब के रूप में भी जाना जाता है। यहाँ लगभग 2000 से 2500 फर्में इस व्यवसाय से जुड़ी हुई हैं, जिनमें करीब 5 से 6 लाख कारीगर अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं। व्यापारियों की मुख्य चिंता यह है कि यदि मांग घटती है, तो इस हस्तकला और कारीगरी से जुड़े लाखों लोग बेरोजगार हो सकते हैं। उद्योग के लिए इन कारीगरों को निरंतर काम प्रदान करना इस समय सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
पुराने सोने को प्रचलन में लाने की योजना की मांग
भारतीय संस्कृति में जन्म से लेकर मृत्यु तक के हर अवसर पर सोने-चांदी का अटूट महत्व है। इस परंपरा को बनाए रखने और बाजार में नकदी प्रवाह (cash flow) को सुचारू रखने के लिए ज्वेलर्स ने सरकार को एक सुझाव दिया है। यदि सरकार 'पुराने सोने को प्रचलन में लाने' की कोई विशिष्ट योजना पेश करती है, तो नया सोना आयात किए बिना बाजार में सोना घूमता रहेगा। इससे लोग अपने मांगलिक अवसर भी मना सकेंगे और कारीगरों को भी पर्याप्त काम मिलता रहेगा। ALSO READ: पीएम मोदी की सोना नहीं खरीदने की अपील से चिंता में सराफा कारोबारी, बाजार में सन्नाटे के साथ ज्वेलरी कंपनियों के शेयर टूटे
आयात घाटा और सरकार की आगामी रणनीति
भारत में सोने और कच्चे तेल का आयात विदेशी मुद्रा भंडार पर सीधा प्रभाव डालता है, जिससे व्यापार घाटा बढ़ता रहता है। इस स्थिति में प्रधानमंत्री की चिंता पूरी तरह से वाजिब है क्योंकि यह देश के दीर्घकालिक आर्थिक हितों से जुड़ी है। हालांकि, अब ज्वेलरी उद्योग की निगाहें सरकार पर टिकी हैं कि क्या इस अपील के साथ ज्वेलर्स और कारीगरों के हित में कोई नई राहत योजना या प्रोत्साहन स्कीम घोषित की जाएगी या नहीं।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala
