चांदीपुरा वायरस के खतरे के खिलाफ AMC मुस्तैद, अहमदाबाद में सघन निगरानी शुरू, आखिर क्या है यह वायरस
Chandipura Virus Ahmedabad: मानसून की बारिश के बीच चांदीपुरा वायरस और डेंगू जैसी घातक बीमारियों का खतरा बढ़ने की आशंका को देखते हुए अहमदाबाद नगर निगम (AMC) ने पूरे शहर में 'ऑपरेशन मानसून' शुरू कर दिया है। मच्छरों और वायरस से फैलने वाली महामारियों को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सभी जोन में सर्विलांस, लार्वा डिस्ट्रक्शन (मच्छरों के अंडों व लार्वा का खात्मा), फॉगिंग और बुखार के मरीजों की निगरानी का काम युद्धस्तर पर तेज कर दिया है। इसके अलावा, राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने भी विशेष रूप से चांदीपुरा वायरस की जांच और रोकथाम के लिए अलग-अलग विशेष टीमों का गठन किया है।
चांदीपुरा वायरस को लेकर विशेष सावधानी
राज्य में पहले सामने आए चांदीपुरा वायरस के मामलों को ध्यान में रखते हुए अहमदाबाद शहर में बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासन द्वारा बाल स्वास्थ्य को केंद्र में रखकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। शहर के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि यदि कोई भी संदिग्ध मामला सामने आता है, तो तुरंत प्रशासन को इसकी सूचना दी जाए। इसके साथ ही, शहर के सभी बाल रोग विशेषज्ञों (Pediatricians) को भी लगातार अलर्ट मोड पर रहने के लिए कहा गया है।
घर-घर सघन जांच और मच्छरों के पनपने वाले स्थानों का खात्मा
स्वास्थ्य विभाग की टीमें रोजाना शहर के विभिन्न इलाकों में घर-घर जाकर जलजमाव वाले स्थानों की जांच कर रही हैं। घरों में इस्तेमाल होने वाले कूलर, ओवरहेड टंकियों, गमलों, छतों पर पड़े पुराने टायरों, निर्माणाधीन साइटों और अन्य संभावित जगहों पर बारीकी से जांच की जा रही है। यदि किसी भी स्थान पर मच्छरों का लार्वा पाया जाता है, तो उसे तुरंत नष्ट किया जा रहा है। साथ ही जरूरत के अनुसार प्रभावित इलाकों में फॉगिंग और एंटी-लार्वा दवाओं का छिड़काव भी किया जा रहा है।
सार्वजनिक स्थानों पर पैनी नजर और बुखार के मरीजों की ट्रैकिंग
इस विशेष अभियान के तहत न केवल आवासीय क्षेत्रों, बल्कि स्कूलों, आंगनबाड़ियों, अस्पतालों, सार्वजनिक पार्कों, बाजारों और अन्य भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों को भी स्वास्थ्य विभाग की निगरानी के दायरे में लाया गया है। डेंगू और मलेरिया के मामलों का समय पर पता लगाकर उनका इलाज शुरू करने के लिए फीवर सर्विलांस (बुखार के मरीजों की जांच) बढ़ा दिया गया है। रोजाना बुखार के मरीजों का डेटा इकट्ठा कर जरूरी टेस्ट किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, मानसून के पूरे सीजन के दौरान यह विशेष मॉनिटरिंग लगातार जारी रहेगी।
क्या है चांदीपुरा वायरस?
चांदीपुरा वायरस (Chandipura Virus - CHPV) एक दुर्लभ लेकिन बेहद खतरनाक और जानलेवा वायरस है। यह मुख्य रूप से 15 साल से कम उम्र के बच्चों को अपना शिकार बनाता है और उनके केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है। यह बहुत तेजी से फैलता है। एक सामान्य सा दिखने वाला बुखार महज 24 से 48 घंटों के भीतर मरीज को कोमा में पहुंचा सकता है या उसकी जान ले सकता है।
यह वायरस सैंडफ्लाई (रेत मक्खी) नाम के एक छोटे कीट के काटने से फैलता है। कुछ मामलों में यह मच्छरों और टिक्स (किल्नी) के काटने से भी फैल सकता है। हालांकि यह वायरस कोरोना की तरह एक इंसान से दूसरे इंसान में (खांसने, छींकने या छूने से) नहीं फैलता। यह बीमारी अक्सर मानसून (बारिश के मौसम) और उसके ठीक बाद ज्यादा फैलती है, क्योंकि इस दौरान सैंडफ्लाई के पनपने के लिए अनुकूल माहौल होता है।

