गुजरात में निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम, प्री-स्कूल सर्टिफिकेट के बिना भी बच्चे को कक्षा-1 में मिलेगा प्रवेश
गुजरात में नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के तहत कक्षा-1 में प्रवेश पाने के लिए बालवाटिका (प्री-स्कूल) पूरी करने का प्रमाण पत्र अनिवार्य होने की गलतफहमी फैल गई थी, जिस पर शिक्षा विभाग ने महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। विभाग ने सभी सरकारी, अनुदान प्राप्त और निजी प्राथमिक विद्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कक्षा-1 में प्रवेश के लिए केवल बच्चे की निर्धारित आयु और जन्म प्रमाण पत्र ही मान्य होगा। बालवाटिका का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की कोई कानूनी बाध्यता या आवश्यकता नहीं है।
निजी स्कूलों की मनमानी पर प्राथमिक शिक्षा निदेशक की कार्रवाई
हाल ही में कुछ निजी स्कूलों द्वारा कक्षा-1 में प्रवेश देने के लिए अभिभावकों से बालवाटिका प्रमाण पत्र की अनिवार्य मांग करने की शिकायतें शिक्षा विभाग तक पहुंची थीं। अभिभावकों की इन व्यापक शिकायतों को ध्यान में रखते हुए प्राथमिक शिक्षा निदेशक कार्यालय ने एक परिपत्र जारी कर स्पष्ट किया है कि स्कूलों द्वारा की जा रही ऐसी मांग कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं है और पूरी तरह से अनुचित है।
आयु का प्रमाण और प्रवेश से जुड़े कानूनी नियम
परिपत्र के अनुसार, प्राथमिक शिक्षा में प्रवेश के लिए बच्चे की आयु तय करने हेतु 'जन्म, मृत्यु और विवाह पंजीकरण अधिनियम' के तहत जारी किया गया जन्म प्रमाण पत्र या अन्य मान्य दस्तावेज आधार माना जाएगा। इसके अलावा, यदि किसी कारणवश बच्चे के आयु का प्रमाण उपलब्ध न हो, तो भी केवल उस आधार पर किसी भी बच्चे को स्कूल में प्रवेश देने से इंकार नहीं किया जा सकता।
नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई और पारदर्शी प्रवेश प्रक्रिया
शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि कोई स्कूल बालवाटिका प्रमाण पत्र न होने के कारण छात्र को प्रवेश देने से मना करेगा, तो इसे शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम की धारा-14 का उल्लंघन माना जाएगा और संबंधित स्कूल के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। स्कूल प्रबंधकों को निर्देश दिया गया है कि वे अभिभावकों को अनावश्यक दस्तावेजों के लिए परेशान न करें, जिससे कक्षा-1 में प्रवेश प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी बनेगी।

