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  4. Why is Hindu New Year called Gudi Padwa
Written By WD Feature Desk
Last Modified: बुधवार, 11 मार्च 2026 (15:32 IST)

हिंदू नववर्ष को क्यों कहते हैं गुड़ी पड़वा?

Hindu New Year Gudi Padwa
Gudi Padwa:19 मार्च 2026 गुरुवार के दिन से हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 प्रारंभ होने वाला है। इसे नव संवत्सर, उगादि, युगादि, वर्ष प्रतिपदा, नवरेह, चेटीचंड, बैसाखी और गुड़ी पड़वा आदि कहा जाता है। गुड़ी पड़वा शब्द का प्रचलन महाराष्ट्र सहित संपूर्ण हिंदी भाषी क्षेत्रों में है। यह सभी क्षेत्रीय नाम है।
 

क्षेत्रीय नाम:

गुड़ी पड़वा: महाराष्ट्र में मनाया जाता है।
नव संवत्सर/ संवत्सरारंभ: हिंदी भाषी क्षेत्रों में।
नवरेह: कश्मीरी पंडितों द्वारा नव वर्ष।
चेटी चंड: सिंधी समुदाय द्वारा।
बैसाखी: पंजाब और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में।
उगादि/युगादि: आंध्र प्रदेश, तमिल, तेलंगाना और कर्नाटक में।
 

1. नाम का अर्थ: गुड़ी+पड़वा

गुड़ी: इसका अर्थ है 'विजय पताका' या झंडा। इस दिन घरों के बाहर एक बांस के डंडे में रेशमी कपड़ा, नीम की पत्तियां, गाठी (शक्कर की माला) और ऊपर एक तांबे या चांदी का लोटा उल्टा रखकर 'गुड़ी' सजाई जाती है।
 
पड़वा: संस्कृत शब्द 'प्रतिपदा' से निकला है, जिसका अर्थ है चंद्रमा के शुक्ल पक्ष का पहला दिन।
 

2. इसे 'गुड़ी पड़वा' क्यों कहते हैं? (प्रमुख कारण)

इस दिन गुड़ी फहराने के पीछे कई ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यताएं हैं:
 
विजय का प्रतीक: माना जाता है कि इसी दिन शालिवाहन ने मिट्टी के सैनिकों में प्राण फूंककर शक शत्रुओं पर विजय प्राप्त की थी। इस जीत की खुशी में लोगों ने अपने घरों पर विजय पताका (गुड़ी) फहराई थी।
 
प्रभु श्री राम का आगमन: एक अन्य मान्यता के अनुसार, रावण का वध कर जब भगवान राम अयोध्या लौटे, तो प्रजा ने खुशियां मनाते हुए 'विजय ध्वज' फहराया था। चूँकि यह चैत्र मास की प्रतिपदा थी, इसलिए इसे गुड़ी पड़वा कहा गया।
 
ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि की रचना: पौराणिक कथाओं के अनुसार, ब्रह्मा जी ने इसी दिन सृष्टि का निर्माण शुरू किया था। इसलिए इसे सत्य युग की शुरुआत और एक नए कालचक्र का प्रतीक मानकर गुड़ी (ब्रह्मध्वज) की पूजा की जाती है।
 

3. परंपरा और वैज्ञानिक आधार

आरोग्य का संदेश: गुड़ी में नीम की पत्तियां और कड़वे प्रसाद (नीम, गुड़, इमली का मिश्रण) का उपयोग किया जाता है। यह बदलती ऋतु (वसंत के आगमन) में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और जीवन के सुख-दुख को समान भाव से स्वीकारने का संदेश देता है।
 
समृद्धि का द्वार: ऊँची फहराती गुड़ी को घर की सुख-समृद्धि और सुरक्षा का रक्षक माना जाता है।
 
संक्षेप में: गुड़ी पड़वा केवल एक कैलेंडर की शुरुआत नहीं है, बल्कि यह अधर्म पर धर्म की जीत और नई उम्मीदों का जश्न मनाने का तरीका है।
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