लॉटरी टिकट और लियोनेल मेसी के साथ एक फोटोशूट ने कैसे बदल दी लामिन यमाल की तकदीर?
"जिस बच्चे को कभी खुद लियोनेल मेसी ने अपने हाथों से नहलाया था, आज वही बच्चा मैदान पर मेसी के साम्राज्य को चुनौती देने के लिए तैयार है। यह कहानी सिर्फ फुटबॉल की नहीं है,यह कहानी है गरीबी की मार, माता-पिता के आंसुओं, वफादारी के एक अनोखे वादे और उस किस्मत की... जिसने 5 महीने के एक नवजात को दुनिया का अगला सुपरस्टार चुन लिया था।"
फुटबॉल की दुनिया में जब कोई खिलाड़ी मैदान पर उतरता है, तो वह सिर्फ अपनी टीम के लिए नहीं, बल्कि अपने अतीत, अपने संघर्षों और अपने माता-पिता के आंसुओं के बदले के लिए दौड़ रहा होता है। स्पेन के 19 वर्षीय सनसनी लामिन यमाल (Lamine Yamal) की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। आज दुनिया उनके पैरों का जादू देख रही है, लेकिन इस जादू के पीछे छुपा है एक बेहद भावुक कर देने वाला अतीत।
माता-पिता का संघर्ष और नाम के पीछे का 'रहस्य'
यमाल का जन्म एक बेहद गरीब परिवार में हुआ था। उनके पिता मुनीर नसराउई मोरक्को के रहने वाले हैं और मां शीला एबाना इक्वेटोरियल गिनी की हैं। दोनों बचपन में ही गरीबी के कारण स्पेन के कैटालोनिया में आकर बस गए थे।
यमाल का पूरा नाम लामिन यमाल नसराउई एबाना है। दिलचस्प बात यह है कि खेल की दुनिया में वह जिस 'यमाल' नाम का उपयोग करते हैं, वह उनका सरनेम (उपनाम) नहीं, बल्कि उनके नाम का ही हिस्सा है।
नाम के पीछे की भावुक कहानी: स्पैनिश मीडिया के अनुसार, जब यमाल के पिता पाई-पाई के लिए मोहताज थे, तब उनके दो दोस्तों ने उनकी आर्थिक मदद की थी। पिता ने उस तंगी के दिनों में आभार व्यक्त करने के लिए वादा किया था कि वे अपने बेटे का नाम उन दोस्तों के नाम पर रखेंगे।
अपनी जड़ों को नहीं भूले: क्या है '3-0-4' का राज?
यमाल का बचपन बार्सिलोना के एक ऐसे इलाके में बीता जिसे प्रवासियों का गढ़ और 'वर्किंग क्लास' (कामकाजी वर्ग) का इलाका माना जाता है—रोकाफोंडा। यहाँ कदम-कदम पर अभाव थे, लेकिन सपने बड़े थे।
"आज जब यमाल मैदान पर गोल करते हैं, तो अपनी उंगलियों से 3-0-4 का इशारा करते हैं। यह कोई स्टाइलिश पोज़ नहीं है, बल्कि रोकाफोंडा इलाके का पोस्टकोड (08304) है। यमाल दुनिया को बताना चाहते हैं कि वे चाहे जितने बड़े स्टार बन जाएं, अपनी झुग्गी-झोपड़ी और अपनी जड़ों को कभी नहीं भूलेंगे।"
यमाल अपने माता-पिता के बलिदानों को याद करते हुए भावुक हो जाते हैं। वे कहते हैं, “बेहद कम संसाधनों के बावजूद मेरे माता-पिता ने जिस तरह मुझे फुटबॉल खेलने में मदद की, उसका कर्ज मैं जीवन में कभी नहीं चुका पाऊंगा।”
जब 5 महीने के यमाल से टकराई किस्मत: मेसी के साथ वो जादुई मुलाकात
फुटबॉल इतिहास में कुछ संयोग ऐसे होते हैं जिन पर यकीन करना मुश्किल होता है। एक तरफ सर्वकालिक महानतम फुटबॉलर लियोनेल मेसी हैं और दूसरी तरफ बार्सिलोना के राइट विंग पर उनके उत्तराधिकारी के रूप में उभर रहे लामिन यमाल। आगामी बड़े मुकाबले में जब दोनों टीमें आमने-सामने होंगी, तो इतिहास रचेगा। लेकिन इनका रिश्ता आज का नहीं, बल्कि दो दशक पुराना है।
साल 2007 में, जब मेसी महज 20 साल के थे और बार्सिलोना की टीम में अपनी जगह बना रहे थे, तब लामिन यमाल सिर्फ 5 महीने के एक मासूम बच्चे थे।
फोटोग्राफर का खुलासा: शर्मीले मेसी और खुशमिजाज यमाल
उस ऐतिहासिक तस्वीर को खींचने वाले फोटोग्राफर जोन मोनफोर्ट बताते हैं कि मेसी स्वभाव से बेहद शर्मीले और अंतर्मुखी थे। जब उनके सामने अचानक एक छोटा बच्चा लाया गया, तो वह काफी असहज हो गए थे। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि बच्चे को कैसे संभालें। लेकिन यमाल एक खुशमिजाज बच्चा था और जल्द ही मेसी ने भी उसे गोद में ले लिया।
खुद फोटोग्राफर को भी 2024 तक यह नहीं पता था कि वह बच्चा लामिन यमाल था! इस राज से पर्दा तब उठा जब यमाल के पिता ने इंस्टाग्राम पर उस तस्वीर को शेयर करते हुए लिखा—
"दो दिग्गजों की शुरुआत" (The beginning of two legends).
आज लामिन यमाल का इतनी कम उम्र में विश्व स्तर पर चमकना और मेसी का इस उम्र में भी शीर्ष पर बने रहना, फुटबॉल के दो अलग-अलग युगों का मिलन है। यमाल की यह कहानी साबित करती है कि अगर आपके पास प्रतिभा है और माता-पिता का आशीर्वाद, तो किस्मत भी आपके सामने घुटने टेक देती है। रोकाफोंडा की गलियों से निकलकर ग्लोबल आइकॉन बनने का यमाल का यह सफर आने वाली कई पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
माता-पिता का संघर्ष और नाम के पीछे का 'रहस्य'
यमाल का जन्म एक बेहद गरीब परिवार में हुआ था। उनके पिता मुनीर नसराउई मोरक्को के रहने वाले हैं और मां शीला एबाना इक्वेटोरियल गिनी की हैं। दोनों बचपन में ही गरीबी के कारण स्पेन के कैटालोनिया में आकर बस गए थे।
नाम के पीछे की भावुक कहानी: स्पैनिश मीडिया के अनुसार, जब यमाल के पिता पाई-पाई के लिए मोहताज थे, तब उनके दो दोस्तों ने उनकी आर्थिक मदद की थी। पिता ने उस तंगी के दिनों में आभार व्यक्त करने के लिए वादा किया था कि वे अपने बेटे का नाम उन दोस्तों के नाम पर रखेंगे।
- अरबी भाषा में लामिन का अर्थ होता है- ईमानदार या भरोसेमंद।
- यमाल (जमाल) का अर्थ होता है- सुंदरता या लालित्य।
अपनी जड़ों को नहीं भूले: क्या है '3-0-4' का राज?
यमाल का बचपन बार्सिलोना के एक ऐसे इलाके में बीता जिसे प्रवासियों का गढ़ और 'वर्किंग क्लास' (कामकाजी वर्ग) का इलाका माना जाता है—रोकाफोंडा। यहाँ कदम-कदम पर अभाव थे, लेकिन सपने बड़े थे।
"आज जब यमाल मैदान पर गोल करते हैं, तो अपनी उंगलियों से 3-0-4 का इशारा करते हैं। यह कोई स्टाइलिश पोज़ नहीं है, बल्कि रोकाफोंडा इलाके का पोस्टकोड (08304) है। यमाल दुनिया को बताना चाहते हैं कि वे चाहे जितने बड़े स्टार बन जाएं, अपनी झुग्गी-झोपड़ी और अपनी जड़ों को कभी नहीं भूलेंगे।"
जब 5 महीने के यमाल से टकराई किस्मत: मेसी के साथ वो जादुई मुलाकात
फुटबॉल इतिहास में कुछ संयोग ऐसे होते हैं जिन पर यकीन करना मुश्किल होता है। एक तरफ सर्वकालिक महानतम फुटबॉलर लियोनेल मेसी हैं और दूसरी तरफ बार्सिलोना के राइट विंग पर उनके उत्तराधिकारी के रूप में उभर रहे लामिन यमाल। आगामी बड़े मुकाबले में जब दोनों टीमें आमने-सामने होंगी, तो इतिहास रचेगा। लेकिन इनका रिश्ता आज का नहीं, बल्कि दो दशक पुराना है।
साल 2007 में, जब मेसी महज 20 साल के थे और बार्सिलोना की टीम में अपनी जगह बना रहे थे, तब लामिन यमाल सिर्फ 5 महीने के एक मासूम बच्चे थे।
- कैसे हुई मुलाकात? यमाल के माता-पिता ने कैटलन अखबार स्पोर्ट और अंतर्राष्ट्रीय संस्था यूनिसेफ द्वारा आयोजित एक लॉटरी (रैफल) जीती थी। इनाम यह था कि विजेता के बच्चे का फोटोशूट बार्सिलोना के किसी सीनियर खिलाड़ी के साथ होगा।
- किस्मत का खेल: भाग्यवश, उस दिन लामिन यमाल के परिवार की जोड़ी लियोनेल मेसी के साथ बनी। यह फोटोशूट कैंप नोउ स्टेडियम के ड्रेसिंग रूम में हुआ।
फोटोग्राफर का खुलासा: शर्मीले मेसी और खुशमिजाज यमाल
खुद फोटोग्राफर को भी 2024 तक यह नहीं पता था कि वह बच्चा लामिन यमाल था! इस राज से पर्दा तब उठा जब यमाल के पिता ने इंस्टाग्राम पर उस तस्वीर को शेयर करते हुए लिखा—
"दो दिग्गजों की शुरुआत" (The beginning of two legends).
आज लामिन यमाल का इतनी कम उम्र में विश्व स्तर पर चमकना और मेसी का इस उम्र में भी शीर्ष पर बने रहना, फुटबॉल के दो अलग-अलग युगों का मिलन है। यमाल की यह कहानी साबित करती है कि अगर आपके पास प्रतिभा है और माता-पिता का आशीर्वाद, तो किस्मत भी आपके सामने घुटने टेक देती है। रोकाफोंडा की गलियों से निकलकर ग्लोबल आइकॉन बनने का यमाल का यह सफर आने वाली कई पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

