अजा जया एकादशी 2026: तिथि, पूजा विधि, महत्व और कथा
Ekadashi Kab Hai: भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अजा (जया) एकादशी का व्रत भगवान श्री हरि विष्णु की कृपा, पापों से मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति के लिए रखा जाता है। इस बार इस एकादशी का व्रत 07 सितंबर 2026 सोमवार को रखा जा रहा है। आइए जानते हैं जया एकादशी या अजा एकादशी व्रत की तिथि, पूजा विधि, महत्व और कथा।
शुभ मुहूर्त एवं तिथियां
एकादशी तिथि प्रारंभ: 6 सितंबर 2026, शाम 07:29 बजे
एकादशी तिथि समाप्त: 7 सितंबर 2026, शाम 05:03 बजे
पूजा मुहूर्त (7 सितंबर):
ब्रह्म मुहूर्त: प्रात: 04:52 – 05:38
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:12 – 03:01
व्रत पारण समय: 8 सितंबर 2026, प्रात: 06:25 – 08:53 (द्वादशी तिथि में सात्विक भोजन से)
मुख्य नियम और पूजा विधान
संकल्प व पूजा: दशमी की शाम से सात्विक रहें। एकादशी को स्नान कर पीले वस्त्र पहनें और जल-अक्षत से व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु को गंगाजल से स्नान कराकर पीले फूल, गोपी चंदन और पीली मिठाई अर्पित करें।
तुलसी पत्र: भोग में तुलसी दल अनिवार्य है। ध्यान रखें कि तुलसी पत्र एकादशी से एक दिन पहले ही तोड़ लें।
वर्जित नियम: इस दिन चावल का सेवन, चुगली, क्रोध और अपशब्द बोलना सख्त मना है। दिनभर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप करें।
व्रत के प्रमुख लाभ
पापों व पिशाच योनि से मुक्ति: अनजाने में हुए पाप नष्ट होते हैं और नीच योनियों के कष्ट दूर होते हैं।
मोक्ष व समृद्धि: मृत्यु पश्चात वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है तथा घर में सुख, शांति और धन-धान्य बढ़ता है।
मानसिक व शारीरिक लाभ: मन शांत और शुद्ध होता है। उपवास से शरीर डिटॉक्स (विषमुक्त) होता है और पाचन तंत्र को आराम मिलता है।
संक्षिप्त व्रत कथा
इन्द्र की सभा के गंधर्व 'माल्यवान' और नर्तकी 'पुष्पवती' एक-दूसरे पर मोहित होकर अपने काम से भटक गए। क्रोधित होकर इन्द्र ने उन्हें पृथ्वी पर पिशाच बनने का शाप दे दिया। हिमालय की गुफाओं में कष्ट भोगते हुए, भाद्रपद एकादशी को ठंड और भूख के कारण उन्होंने अनजाने में दिनभर कुछ नहीं खाया और रातभर जागते रहे। इस अनजाने एकादशी व्रत के प्रभाव से उन्हें पिशाच योनि से मुक्ति मिली और वे पुन: दिव्य रूप धारण कर स्वर्गलोक लौट गए।
