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टिप्पणियां

ashish mishra

फील
X REPORT ABUSE Date 08-06-13 (01:50 AM)

Vivek ranjan Shrivastava

फैशन , युवाओ के व्यवहार और समाज पर व्यापक प्रभाव हुआ है
X REPORT ABUSE Date 08-05-13 (08:10 AM)

ajit mishra

भगत साहब ने किताब लिखी थ्री मिस्टेक्स ऑफ माइ लाइफ. अभिषेक कपूर साहब ने 'काए पो चे' फ़िल्म ही बना डाली. कमाल है, इतने होनहार होने के बाद भी ये अब तक गोधरा कांड: साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन में एक मुस्लिम भीड़ द्वारा किए गए हमले जैसी घटनाओं के बारे में विचार नही कर पाये.
X REPORT ABUSE Date 04-05-13 (05:20 AM)

santosh gupta

कोई khash नही बस कुछ टाइम के लिए सोचने का काम करती है और आम आदमी फिर लाइफ के samsya को सोल्वे करने में लग जाता है ख़ुद फ़िल्म वाले सिर्फ़ फिल्मों में ही आदर्श दिखाते है रेल लाइफ कोई भी इतना आदर्श वादी नही है उनका सिर्फ़ एक मकसद है फ़िल्म हिट न पैसा कमाना
X REPORT ABUSE Date 03-05-13 (08:52 AM)

hlk joshi

गंभीर असर , कभी न मिटने वाला.
X REPORT ABUSE Date 03-05-13 (06:57 AM)

D B S SENGAR

किसी भी देश और समाज पर उस देश के सिनेमा का काफी बड़ा योगदान होता हे,पचास के दसक में जो फिल्में बनती थी,वो समाज में घट रही घटनाओं पर आधारित हुआ करती थी, धीरे धीरे उस परिपाटी का अंत हो गया,और अगर आज कि बात करे तो निशंदेह हमने कुछ हिस्सो में लाजबाब तरक्की कि हे, और कुछ में काफी पीछे राह गए हे, जैसे कहानी में, आज सिनेमा पूर्व कि नकल कर रहा हे, उसका कुछ भी अपना नही हे सिर्फ़ भारतीय कलाकारों के कलाकार भी वो जिन्हें अभिनय का अ.ब.स. भी नही आता,वो आज करोड़ों के आसामि हे, पहले अभिनेता थे बलराज सहानी, मोतीलाल, गुरुदत्त, दिलीप कुमार, राज कपूर,जिन्होंने भूखे रह कर अभिनय कि विधा को जिया था, आज तो कोई भी हीरो बन जाता हे, जिस आदमी के पैसा हे वो अपने बद सूरत लड़के को पर्दे पर उतार देता हे,दुर्शन चेहरे को अगर प्रथ्पिक्ता होती तो सुनील सेट्टी. और सैफ अलि पर्दे पर नही दिखते.अब संगीत कि बात गाना कब सुरू होता हे और कब खत्म हो जाता हे मालूम ही नही पड़ता, और गीतकार क्या कहना चाहता हे ये शायद किसी को भी मालूम नही होता, संगीत बजता रहता हे ना उसके लय होती हे ना कोई ठहराव, आज के गीत सुनने के कं और देखने के ज्यादा
X REPORT ABUSE Date 02-05-13 (06:34 PM)