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Himanshu

आजकल देश के पढ़े लिखे पत्रकार या लेखक जो अपने आप को देश का भाग्य विधाता मानाने लगे हैं, वे कुछ लिखकर लोगो को गुमराह करना चाहते हैं. भले ही उन्हें जानकारी के नाम कुछ आता जाता नहीं हो, पर वे मोदी सरकार और हिंदुत्व का बिरोध कर ये साबित करना चाहते हैं कि देश के उद्धारक केवल वे ही हैं. मुझे समझ मे ये नहीं आता कि ये पढ़े लिखे पत्रकार हैं या फिर बिके हुए, आज देश का हर नागरिक जनता है कि कांग्रेस कि क्या औकाद है. उसने देश के लिए क्या किया है. स्वामी अग्निवेश को कौन नहीं जनता. ये तो संत के नाम पर कलंक है. इसमें कोई शक नहीं कि कांग्रेस पार्टी के हर घोटाले को सही करार देने मे स्वामी अग्निवेश तत्पर रहता है . चाहे वह आन्ना का आंदोलन हो ये फिर ईसाई समाज का धर्म प्रचार. दूसरे शशि थरूर को कौन नहीं जनता. दिन दहाड़े अपने पत्नी को मौत का रास्ता दिखा कर, अपने आप को सफेदपोश साबित कर दिया. ये कैसे संभव हो गया. कांग्रेस जिसके अध्यक्ष श्रीमान पप्पू जी हैं । वे अपनी माता जी की छत्र छाया मे अनेकों चमचे, चाचा और बुआ के साथ गठजोड़ मे लगे हुए हैं। कांग्रेस और इनके नकली चहेते (जिसमे चारा चोर लालू जी के सुपुत्रों, महालुटेरे मुलायम जी के बेटे, दलित के नाम पर दलितों के शोषक कुमारी मायावती, ममता बेगम, परिवारवादी सोच के श्रीमान देवगौड़ा के पुत्र कुमारस्वामी और फारुख अबद्दुला जैसे देश द्रोही नेता और कश्मीर के ऐसे कई अलगाव वादी नेता, जिसने कांग्रेस शासन काल मे कश्मीर को पाकिस्तान बनाने कि साजिस कि और वहां के मुस्लिम और हिन्दू जनता को रखा ) वेलोग आज समाज के उद्धारक साबित हो रहे हैं. कांग्रेस सरकार ने भारतवर्ष को बर्बाद करने के लिए अंग्रेजो के प्रस्ताव को स्वीकार कर, भारत को खडित करने की साजिस की और जिसमे वो सफल भी रहा I इसका परिणाम ये हुआ की हमारी मातृभूमि को यह स्वतंत्रता विभाजन की त्रासदी के साथ मिल पायी, जो ऐसी घटना थी की इसमें हजारों लोगो का नरसंघार हुआ और लाखो लोगों को अपना घर बार छोड़ना पड़ा I पर इस विभाजन से दो परिवारों को बहुत फायदा हुआ और वे है पंडित नेहरू (जिसे भारत का साम्राज्य मिला) और जिन्ना (जो पाकिस्तान का सर्वेसर्वा हो गया) I नेहरू, जिन्ना और अंग्रेजो के इस मंत्र से देश का विभाजन नहीं रोक पाया और इसी का नतीजा ये हुआ की हिंदूवादी संगठन गाँधी जी से नाराज हो गए I ७० सालो तक शासन कर कांग्रेस ने फिर एक पाकिस्तान की बुनियाद रख दी . अब कुछ लोग ये कहते हैं कि पप्पू इस समस्या का समाधान करेगा तो ये तो पागलपन सी बात लगती है. अगर कांग्रेस देश हित मे निर्णय ले पाता तो शायद आज कश्मीर कि हालत ये नहीं होती. कश्मीर मे हिन्दुओ का कोई अस्तित्व नहीं है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है ? देश मे घोटालो के आलावा कोई काम नहीं हुआ. देश मे समस्यों का अम्बार लगा रहा. जाती और कॉम के नाम लोगो को बताता रहा और इन सब प्रश्नो का एक ही उत्तर है कांग्रेस ने ७० सालो मे अपने और अपने परिवार, अपने चमचो और अपने भ्रस्ट समर्थको को जनता को लुटने के लिए खुली छूट दे रखा था । यही कारण है कि आज सरकारी तंत्र से लेकर प्रेस और सारी बिरोधी पार्टियां भ्रस्टाचार के दलदल मे फस कर केवल और केवल कांग्रेस को समर्थन के लिए मजबूर हो गए हैं। सर्वप्रथम हमारे देश को मुसलमानो ने लुटा और इसका प्रमुख कारण हमारी संमृद्धि थी I हमारा देश एक संपन्न देश था और हर तरफ खुशहाली थी I भारतीय समाज में जातियां नहीं ज्ञातियाँ थीं I ज्ञातियाँ अर्थात जिन्हें जिस क्षेत्र का ज्ञान हो : शिक्षक, पुरोहित, योद्धा, व्यापारी, किसान, ग्वाला या गोसेवक , लोहार, कुम्हार, सुनार, चर्मकार, नाई, धोबी इत्यादि I इसी तरह भारत में कई सारी ज्ञातियाँ थीं I जो जिस क्षेत्र के ज्ञाता थे वे अपनी ज्ञातियों के अनुसार विभाजित थे, कोई भी व्यक्ति भारत में जाति के हिसाब से नहीं बल्कि ज्ञाति के हिसाब से जाना जाता था I जाति शब्द वास्तव में ज्ञाति का ही अपभ्रंश है जिसे जानबूझकर ग्लोबल माफियाओं ने अपने भाड़े के विद्वानों से स्थापित करवाया I ब्रिटिशों के आने से पहले भारत में कभी कोई जाति प्रथा नहीं थी और ना ही जाति प्रथा जैसी किसी चीज का जिक्र हमारे किसी प्राचीन ग्रंथ या एतिहासिक पुस्तकों में मिलता है. यहाँ तक कि, भारत और भारतीय संस्कृति पर लिखने वाले फाह्यान, ह्वेनसांग, अलबरूनी, मेगास्थनीज और टॉलमी जैसे विदेशी इतिहासकारों ने भारत में जाति व्यवस्था जैसी चीज का कोई जिक्र किया है. नफरत का कभी कोई इतिहास नहीं रहा. भारतीय संस्कृति और सभ्यता का अध्ययन करने आये सभी विदेशी यात्रियों ने एक भी ऐसा कोई तथ्य नहीं दिया जो यह प्रमाणित कर सके कि, भारतीय समाज में किसी प्रकार की कोई असमानता थी. पश्चिमी जगत हमेशा से ही ठग और लुटेरा समुदाय रहा है उन्हें जहाँ मौका मिला वहां उन्होंने लोगों को ठगा. रूस के लोग आज भी ब्रिटेन को ठग-लुटेरा और अंग्रेजी भाषा को चोर-लुटेरों की भाषा बोलते हैं. आज की समाज व्यवस्था कुछ ऐसी है लोग चाहे जितना बड़ा अपराध कर लें वह कभी सुधर नही सकते क्योंकि ये समाज व्यवस्था कुकर्मियों को सजा नहीं देती बल्कि उनका संरक्षण करती है. आजकल अपराधी युवाओं के आदर्श होते हैं. चोरों-लुटेरों और हत्यारों के भी गुरु होने लगे हैं. जबकि भारतीय समाज व्यवस्था कुछ ऐसी थी जहाँ अपराध तो दूर लोग इसके बारे में सोच भी नहीं सकते थे. यदि कोई सामाजिक नियम तोड़ता भी था तो उसे समाज ऐसा बहिष्कृत करता था जो ना जीने लायक होता था ना मरने लायक. अतः ब्रिटिश व्यवस्था ने अपने शासन काल मे सर्वप्रथम भारतीय सामाजिक व्यवस्था को ध्वस्त किया और फिर भारतीय शिक्षा व्यवस्था को समाप्त कर ईसाई मिशिनरी कायम किया. देश मे अकाल और सूखा जैसे समस्याओ को उत्त्पन्न कर लोगो को गरीब और भूखे लगे बना दिया और मिशिनरी के द्वारा इन भूखे लगे लोगो को धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया. अपने ब्रिटिश शासन को कायम रखने के लिए पहले हिन्दू मुस्लमान और फिर जातीय व्यवस्था का जहर समाज मे फैलाया. इसके बाबजूद जब भारत के लोगो ने गुलाम भारत का बिरोध किया और लोगो ने आज़ादी का बिगुल बजा दिया. १८५७ मे श्री मंगल पांडेय, झांसी की रानी और वीर कुंवर सिंह जैसे देश प्रेमियों ने देश के लिए अपना बलिदान देकर देश मे आजादी की लड़ाई की शुरुआत कर दी . इसके बाद यह आजादी की आग जलती रही और देश हजारो लोगो ने अपनी कुर्वनिया दी, जिसमे कुछ प्रमुख नाम तो याद है पर बहुत सरे ऐसे भी देशवाशी थे जो देश के लिए कुर्बान हो गए पर अपना नाम कभी उजागर नहीं होने दिया पर जब देश आजाद हो गया तो किसी भी स्वतंत्रता सेनानी के परिवारों का देश की राजनीती मे स्थान नहीं मिला. राजनीतिक गलियारे मे या नेहरू दिखा या फिर उनके चमचे. जब कुछ देश -प्रेमियों ने नेहरू का विरोध किया तो उसे कांग्रेस से बहार का रास्ता दिखा दिया और फिर भी नहीं माना तो उसे मौत के घाट उतर दिया गया. इसका जीता जगता उदहारण डॉक्टर श्यामा प्रसाद और श्री दीन दयाल उपाध्याय है. क्या ये लेखक भी राहुल / पप्पू जैसा ही मुर्ख है ? क्या ये हमारे देश के इतिहास को नहीं जनता ? पर ऐसा नहीं है . हमारे देश को बर्बाद करने मे कुछ स्वार्थी लोग ह
X REPORT ABUSE Date 04-08-18 (03:07 PM)

Himanshu

आजकल देश के पढ़े लिखे पत्रकार या लेखक जो अपने आप को देश का भाग्य विधाता मानाने लगे हैं, वे कुछ लिखकर लोगो को गुमराह करना चाहते हैं. भले ही उन्हें जानकारी के नाम कुछ आता जाता नहीं हो, पर वे मोदी सरकार और हिंदुत्व का बिरोध कर ये साबित करना चाहते हैं कि देश के उद्धारक केवल वे ही हैं. मुझे समझ मे ये नहीं आता कि ये पढ़े लिखे पत्रकार हैं या फिर बिके हुए, आज देश का हर नागरिक जनता है कि कांग्रेस कि क्या औकाद है. उसने देश के लिए क्या किया है. स्वामी अग्निवेश को कौन नहीं जनता. ये तो संत के नाम पर कलंक है. इसमें कोई शक नहीं कि कांग्रेस पार्टी के हर घोटाले को सही करार देने मे स्वामी अग्निवेश तत्पर रहता है . चाहे वह आन्ना का आंदोलन हो ये फिर ईसाई समाज का धर्म प्रचार. दूसरे शशि थरूर को कौन नहीं जनता. दिन दहाड़े अपने पत्नी को मौत का रास्ता दिखा कर, अपने आप को सफेदपोश साबित कर दिया. ये कैसे संभव हो गया. कांग्रेस जिसके अध्यक्ष श्रीमान पप्पू जी हैं । वे अपनी माता जी की छत्र छाया मे अनेकों चमचे, चाचा और बुआ के साथ गठजोड़ मे लगे हुए हैं। कांग्रेस और इनके नकली चहेते (जिसमे चारा चोर लालू जी के सुपुत्रों, महालुटेरे मुलायम जी के बेटे, दलित के नाम पर दलितों के शोषक कुमारी मायावती, ममता बेगम, परिवारवादी सोच के श्रीमान देवगौड़ा के पुत्र कुमारस्वामी और फारुख अबद्दुला जैसे देश द्रोही नेता और कश्मीर के ऐसे कई अलगाव वादी नेता, जिसने कांग्रेस शासन काल मे कश्मीर को पाकिस्तान बनाने कि साजिस कि और वहां के मुस्लिम और हिन्दू जनता को रखा ) वेलोग आज समाज के उद्धारक साबित हो रहे हैं. कांग्रेस सरकार ने भारतवर्ष को बर्बाद करने के लिए अंग्रेजो के प्रस्ताव को स्वीकार कर, भारत को खडित करने की साजिस की और जिसमे वो सफल भी रहा I इसका परिणाम ये हुआ की हमारी मातृभूमि को यह स्वतंत्रता विभाजन की त्रासदी के साथ मिल पायी, जो ऐसी घटना थी की इसमें हजारों लोगो का नरसंघार हुआ और लाखो लोगों को अपना घर बार छोड़ना पड़ा I पर इस विभाजन से दो परिवारों को बहुत फायदा हुआ और वे है पंडित नेहरू (जिसे भारत का साम्राज्य मिला) और जिन्ना (जो पाकिस्तान का सर्वेसर्वा हो गया) I नेहरू, जिन्ना और अंग्रेजो के इस मंत्र से देश का विभाजन नहीं रोक पाया और इसी का नतीजा ये हुआ की हिंदूवादी संगठन गाँधी जी से नाराज हो गए I ७० सालो तक शासन कर कांग्रेस ने फिर एक पाकिस्तान की बुनियाद रख दी . अब कुछ लोग ये कहते हैं कि पप्पू इस समस्या का समाधान करेगा तो ये तो पागलपन सी बात लगती है. अगर कांग्रेस देश हित मे निर्णय ले पाता तो शायद आज कश्मीर कि हालत ये नहीं होती. कश्मीर मे हिन्दुओ का कोई अस्तित्व नहीं है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है ? देश मे घोटालो के आलावा कोई काम नहीं हुआ. देश मे समस्यों का अम्बार लगा रहा. जाती और कॉम के नाम लोगो को बताता रहा और इन सब प्रश्नो का एक ही उत्तर है कांग्रेस ने ७० सालो मे अपने और अपने परिवार, अपने चमचो और अपने भ्रस्ट समर्थको को जनता को लुटने के लिए खुली छूट दे रखा था । यही कारण है कि आज सरकारी तंत्र से लेकर प्रेस और सारी बिरोधी पार्टियां भ्रस्टाचार के दलदल मे फस कर केवल और केवल कांग्रेस को समर्थन के लिए मजबूर हो गए हैं। सर्वप्रथम हमारे देश को मुसलमानो ने लुटा और इसका प्रमुख कारण हमारी संमृद्धि थी I हमारा देश एक संपन्न देश था और हर तरफ खुशहाली थी I भारतीय समाज में जातियां नहीं ज्ञातियाँ थीं I ज्ञातियाँ अर्थात जिन्हें जिस क्षेत्र का ज्ञान हो : शिक्षक, पुरोहित, योद्धा, व्यापारी, किसान, ग्वाला या गोसेवक , लोहार, कुम्हार, सुनार, चर्मकार, नाई, धोबी इत्यादि I इसी तरह भारत में कई सारी ज्ञातियाँ थीं I जो जिस क्षेत्र के ज्ञाता थे वे अपनी ज्ञातियों के अनुसार विभाजित थे, कोई भी व्यक्ति भारत में जाति के हिसाब से नहीं बल्कि ज्ञाति के हिसाब से जाना जाता था I जाति शब्द वास्तव में ज्ञाति का ही अपभ्रंश है जिसे जानबूझकर ग्लोबल माफियाओं ने अपने भाड़े के विद्वानों से स्थापित करवाया I ब्रिटिशों के आने से पहले भारत में कभी कोई जाति प्रथा नहीं थी और ना ही जाति प्रथा जैसी किसी चीज का जिक्र हमारे किसी प्राचीन ग्रंथ या एतिहासिक पुस्तकों में मिलता है. यहाँ तक कि, भारत और भारतीय संस्कृति पर लिखने वाले फाह्यान, ह्वेनसांग, अलबरूनी, मेगास्थनीज और टॉलमी जैसे विदेशी इतिहासकारों ने भारत में जाति व्यवस्था जैसी चीज का कोई जिक्र किया है. नफरत का कभी कोई इतिहास नहीं रहा. भारतीय संस्कृति और सभ्यता का अध्ययन करने आये सभी विदेशी यात्रियों ने एक भी ऐसा कोई तथ्य नहीं दिया जो यह प्रमाणित कर सके कि, भारतीय समाज में किसी प्रकार की कोई असमानता थी. पश्चिमी जगत हमेशा से ही ठग और लुटेरा समुदाय रहा है उन्हें जहाँ मौका मिला वहां उन्होंने लोगों को ठगा. रूस के लोग आज भी ब्रिटेन को ठग-लुटेरा और अंग्रेजी भाषा को चोर-लुटेरों की भाषा बोलते हैं. आज की समाज व्यवस्था कुछ ऐसी है लोग चाहे जितना बड़ा अपराध कर लें वह कभी सुधर नही सकते क्योंकि ये समाज व्यवस्था कुकर्मियों को सजा नहीं देती बल्कि उनका संरक्षण करती है. आजकल अपराधी युवाओं के आदर्श होते हैं. चोरों-लुटेरों और हत्यारों के भी गुरु होने लगे हैं. जबकि भारतीय समाज व्यवस्था कुछ ऐसी थी जहाँ अपराध तो दूर लोग इसके बारे में सोच भी नहीं सकते थे. यदि कोई सामाजिक नियम तोड़ता भी था तो उसे समाज ऐसा बहिष्कृत करता था जो ना जीने लायक होता था ना मरने लायक. अतः ब्रिटिश व्यवस्था ने अपने शासन काल मे सर्वप्रथम भारतीय सामाजिक व्यवस्था को ध्वस्त किया और फिर भारतीय शिक्षा व्यवस्था को समाप्त कर ईसाई मिशिनरी कायम किया. देश मे अकाल और सूखा जैसे समस्याओ को उत्त्पन्न कर लोगो को गरीब और भूखे लगे बना दिया और मिशिनरी के द्वारा इन भूखे लगे लोगो को धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया. अपने ब्रिटिश शासन को कायम रखने के लिए पहले हिन्दू मुस्लमान और फिर जातीय व्यवस्था का जहर समाज मे फैलाया. इसके बाबजूद जब भारत के लोगो ने गुलाम भारत का बिरोध किया और लोगो ने आज़ादी का बिगुल बजा दिया. १८५७ मे श्री मंगल पांडेय, झांसी की रानी और वीर कुंवर सिंह जैसे देश प्रेमियों ने देश के लिए अपना बलिदान देकर देश मे आजादी की लड़ाई की शुरुआत कर दी . इसके बाद यह आजादी की आग जलती रही और देश हजारो लोगो ने अपनी कुर्वनिया दी, जिसमे कुछ प्रमुख नाम तो याद है पर बहुत सरे ऐसे भी देशवाशी थे जो देश के लिए कुर्बान हो गए पर अपना नाम कभी उजागर नहीं होने दिया पर जब देश आजाद हो गया तो किसी भी स्वतंत्रता सेनानी के परिवारों का देश की राजनीती मे स्थान नहीं मिला. राजनीतिक गलियारे मे या नेहरू दिखा या फिर उनके चमचे. जब कुछ देश -प्रेमियों ने नेहरू का विरोध किया तो उसे कांग्रेस से बहार का रास्ता दिखा दिया और फिर भी नहीं माना तो उसे मौत के घाट उतर दिया गया. इसका जीता जगता उदहारण डॉक्टर श्यामा प्रसाद और श्री दीन दयाल उपाध्याय है. क्या ये लेखक भी राहुल / पप्पू जैसा ही मुर्ख है ? क्या ये हमारे देश के इतिहास को नहीं जनता ? पर ऐसा नहीं है . हमारे देश को बर्बाद करने मे कुछ स्वार्थी लोग ह
X REPORT ABUSE Date 04-08-18 (03:11 PM)

op

पिटाई करके अच्छा काम किया है - वे साधुवाद के पात्र है
X REPORT ABUSE Date 06-08-18 (05:17 PM)