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Satish Khanna

मध्यप्रदेश में किसान आंदोलन (वो सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं), गजेंद्र याद है ना आपको? जिसने दिल्ली में फांसी लगाई थी? क्या वो फांसी उसने खुद ने लगाई थी? नही, बल्कि AAP के नेताओं के उकसाने पर लगाई थी, ऐसा ही कुछ मंज़र मध्यप्रदेश में भी दिखाई दिया, कांग्रेस ने किसानों को भड़काने के अथक प्रयास किया लेकिन किसान थे कि भड़के ही नही अन्ततः भाड़े के कंजर ला कर भीड़ में घुसा दिए गए, ये खुफिया रिपोर्ट पुलिस ने 3 दिन पहले ही प्रशासन को दे दी थी, लेकिन किसानों पर अत्यधिक भरोसा होने के कारण शिवराज सिंह जी ने किसी भी सख्त कार्यवाही से इनकार कर दिया, जिबकी पुलिस बार बार रिपोर्ट करती रही पर उसे किसानों का हवाला दे कर कार्यवाही से रोक दिया गया, भीड़ में भाड़े के कंजर जिन्हें कांग्रेस द्वारा किसान बताया जा रहा था ने उपद्रव शुरू कर दिया, दुकानें लूटी गयीं, ठेलों पर से फल सब्ज़ियां लूटी गयीं, लोगों को पीटा गया, बहन बेटियों के कपड़े फाड़े गए बच्चों तक को नही बक्शा गया, पत्रकारों को पीटा गया कैमरे तोड़े गए, पुलिस की जम कर धुनाई की गई चौकियों और थानों में आग लगाई गई, लगातार 3 दिन से पुलिस और आम जन बेहाल थे, क्या किसान ऐसा कर सकते हैं? क्या मेरे देश का किसान ऐसा है? जवाब है नही, ये सारा षडयंत्र कांग्रेस द्वारा रचा गया था, ये सारा खेल जनता भी समझ चुकी थी और दंगाइयों से निपटने के लिए जनता एक हो गयी थी, इस से पहले की जनता इन्हें सबक सिखाती कांग्रेस समझ गयी कि पोल खुलने वाली है और ग़दर मचा दिया, दंगाइयों की परफेक्ट प्लानिंग थी, शिवराज इसे नही भांप पाए, और भीड़ के अंदर से भाड़े के कंजरों ने अपने आकाओं के निर्देश पर षडयंत्र को अंजाम दिया, पुलिस ने गोली चलाई ही नही फिर गोली किसने चलाई? सीधी सी बात है षड्यंत्रकारियों ने, अब कांग्रेस के नेताओं पर पुलिस ने इनाम भी घोषित कर दिए हैं, और कांग्रेस के नेता फरार हैं, दंगा करवा कर निहत्थे मासूम किसानों का खून कर के वे भाग खड़े हुए हैं, ये है कांग्रेस का असली चेहरा, जो अपनी बन्द राजनीति की दुकान को चलाने के लिए किसानों के खून की होली खेल रही है, लानत है, दिक्कार है, थूकता हूँ ऐसी गंदी राजनीति पर ।
X REPORT ABUSE Date 07-06-17 (04:32 PM)