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Dhamaal 4 Review: वही खजाना, वही भागमभाग... इस बार हंसी रास्ते में कहीं खो गई

Dhamaal 4 movie review in Hindi
बॉलीवुड के कुछ निर्माता-निर्देशक अब भी इस सच को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं कि दर्शक बदल चुके हैं। आउटडेटेड फ्रेंचाइजी, घिसे-पिटे फॉर्मूले और पुराने जोक्स के सहारे अब सिनेमाघरों में भीड़ जुटाना आसान नहीं रह गया है। अफसोस की बात यह है कि निर्देशक इंद्र कुमार ने 'धमाल 4' में भी इसी पुराने रास्ते को चुना है। कहानी फिर खजाने की तलाश पर टिकी है, किरदार लगभग वही हैं, परिस्थितियां भी वैसी ही हैं और कॉमेडी का अंदाज भी वही पुराना। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार हंसी पहले जैसी नहीं आती। फिल्म में खुद इंद्र कुमार पर एक मजाक किया गया है कि "इंद्र कुमार तो रंगीला आदमी है", लेकिन दुर्भाग्य से यह बात उनकी नई फिल्म पर लागू नहीं होती।
 
कहानी की शुरुआत रहस्यमयी अक्षर 'M' के नीचे छिपे 50 करोड़ रुपये के खजाने की तलाश से होती है। गुड्डू (अजय देवगन) और जॉनी (संजय मिश्रा), देशबंधु (रितेश देशमुख) और पारो (अंजलि आनंद), आदि (अरशद वारसी) और मानव (जावेद जाफरी), अधूरा (रवि किशन) समेत कई किरदार इस दौड़ में शामिल हैं। इसके बाद शुरू होती है भागमभाग, पीछा, हादसे और अजीबोगरीब घटनाओं की लंबी श्रृंखला।
 
कभी कोई पहाड़ से लटक रहा है, कभी पूरी टोली खाई में गिर जाती है। कहीं शेर, सांप, मगरमच्छ और ऑक्टोपस रास्ता रोक लेते हैं तो कहीं तूफान के बीच नाव डगमगाती है। एयर बैलून में आग लगती है, भूत-प्रेत भी दस्तक देते हैं। निर्देशक और लेखक ने दर्शकों को हंसाने के लिए तमाम तरह के दृश्य जोड़ दिए हैं, लेकिन समस्या यह है कि इनमें से लगभग 90 प्रतिशत दृश्य मुस्कान तक नहीं ला पाते। ऐसा महसूस होता है कि पहले कॉमेडी सीक्वेंस लिखे गए और बाद में किसी तरह उन्हें कहानी में जोड़ दिया गया। परिणाम यह है कि फिल्म में न रोमांच बन पाता है और न हास्य। जिस भागमभाग ने 'धमाल' सीरीज की पहचान बनाई थी, वह इस बार काफी कमजोर पड़ गई है।
 
फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसका लेखन है। कॉमेडी का सबसे जरूरी तत्व, फन, लगभग गायब है। मोटे, बौने या तोतले लोगों का मजाक उड़ाकर हंसी पैदा करने की कोशिश अब पुरानी और अप्रासंगिक लगती है। संवाद भी याद नहीं रहते और न ही दर्शकों को गुदगुदा पाते हैं। अच्छी बात यह है कि फिल्म फूहड़ता की सीमा पार नहीं करती, लेकिन सिर्फ अश्लीलता से बच जाना किसी कॉमेडी फिल्म को सफल नहीं बना देता। कुछ दृश्य बच्चों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं, लेकिन आज के दौर में इंटरनेट पर मौजूद कंटेंट उनसे कहीं ज्यादा मनोरंजक नजर आता है।
 
निर्देशक इंद्र कुमार कई दृश्यों को जरूरत से ज्यादा लंबा खींच देते हैं। खास तौर पर वह सीक्वेंस, जिसमें आधी स्टारकास्ट पहाड़ से लटकी रहती है, जल्दी ही अपनी ऊर्जा खो देता है। कॉमेडी में टाइमिंग सबसे महत्वपूर्ण होती है और जब कोई दृश्य जरूरत से ज्यादा खिंच जाए तो उसका असर स्वतः खत्म हो जाता है। इंद्र कुमार ने पहले भी अच्छी कॉमेडी फिल्में दी हैं, लेकिन उनकी फिल्मों की असली ताकत हमेशा मजबूत लेखन रही है। 'धमाल 4' में वही सबसे कमजोर कड़ी साबित होती है।
 
तकनीकी पक्ष भी बहुत प्रभावित नहीं करता। कई दृश्य ग्रीन स्क्रीन पर फिल्माए गए हैं, लेकिन विजुअल इफेक्ट्स इतने विश्वसनीय नहीं लगते कि दर्शक उस दुनिया से जुड़ सकें। सिनेमैटोग्राफी ठीक-ठाक है, लेकिन उसमें ऐसा कुछ नहीं है जो फिल्म को अलग पहचान दे सके।
 
अभिनय की बात करें तो अजय देवगन लीड रोल में जरूर हैं, लेकिन उनका किरदार कभी हीरो जैसा प्रभाव नहीं छोड़ता। उनकी परफॉर्मेंस भी औसत रहती है। अरशद वारसी और जावेद जाफरी अपने पुराने अंदाज को दोहराते हैं, लेकिन अब उसमें ताजगी नहीं बची। रितेश देशमुख और रवि किशन जरूरत से ज्यादा लाउड नजर आते हैं। संजय मिश्रा और उपेंद्र लिमये जैसे सक्षम कलाकारों को करने के लिए बहुत कम दिया गया है। फिल्म में एक मजबूत और प्रभावशाली हीरोइन की कमी साफ महसूस होती है। ईशा गुप्ता, संजीदा शेख और अंजलि आनंद अपने किरदारों में कोई खास असर नहीं छोड़ पातीं।
 
संगीत भी निराश करता है। कई संगीतकारों ने फिल्म के लिए गाने तैयार किए हैं, लेकिन एक भी गीत ऐसा नहीं है जो थिएटर से बाहर निकलने के बाद याद रह जाए।
 
कुल मिलाकर 'धमाल 4' उस फ्रेंचाइजी को आगे ले जाने की बजाय पीछे धकेलती है, जिसने कभी दर्शकों को खुलकर हंसाया था। वही खजाने की तलाश, वही भागमभाग और वही पुराने किरदार अब थक चुके हैं। अगर किसी सफल फ्रेंचाइजी को सिर्फ उसके नाम के भरोसे बार-बार दोहराया जाएगा, तो एक समय बाद दर्शक भी उससे दूरी बना लेंगे। 'धमाल 4' इसी थकान का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आती है।
 
  • DHAMAAL 4 (2026)
  • निर्देशक: इंद्र कुमार
  • गीतकार: धीरज बबुआं, गुरु रंधावा, गिल मछलाई, रोनी अजनाली, संजू राठौर, रश्मि विराग, कुमार, संजीव-दर्शन 
  • संगीतकार: आदित्य देव, नीलकमल सिंह, गुरु रंधावा,गिला मछराई, रोनी अजनाली, संजू राठौर, तनिष्क बागची, परम राज, संजीव-दर्शन 
  • कलाकार: अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी, जावेद जाफरी, रवि किशन, संजय मिश्रा, उपेन्द्र लिमये, ईशा गुप्ता, संजीदा शेख, अंजलि आनंद 
  • सेंसर सर्टिफिकेट: यूए (13 प्लस) * 2 घंटे 23 मिनट 
  • रेटिंग : 1.5/5 
लेखक के बारे में
समय ताम्रकर
समय ताम्रकर फिल्म समीक्षक हैं, जो फिल्म, कलाकार, निर्देशक, बॉक्स ऑफिस और फिल्मों से जुड़े पहलुओं पर गहन विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं।.... और पढ़ें
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