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आमिर खान की 'दिल' को रिलीज हुए 34 साल पूरे, ये बातें फिल्म को आज भी बनाती हैं क्लासिक लव स्टोरी
22 जून 1990 को सिनेमाघरों में एक ऐसी फिल्म रिलीज हुई जिसने टिकट खिड़की पर कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। हम बात कर रहे हैं डायरेक्टर इंद्र कुमार की डेब्यू फिल्म 'दिल' की, जिसे रिलीज हुए पूरे 36 साल हो चुके हैं। सनी देओल की कड़क एक्शन फिल्म 'घायल' के साथ क्लैश होने के बावजूद, 'दिल' साल 1990 की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर बनकर उभरी।
आज 36 साल बाद भी जब राजा और मधु की यह प्रेम कहानी स्क्रीन पर आती है, तो दर्शकों का 'दिल' धड़क उठता है। आइए जानते हैं फिल्म से जुड़ी दिलचस्प बातें, जो इसे 'एवरग्रीन' बनाती हैं।
'नफरत से मोहब्बत' वाला कड़क स्क्रीनप्ले
90 के दशक में वैसे तो कई लव स्टोरीज बनीं, लेकिन 'दिल' का स्क्रीनप्ले (राजीव कौल और प्रफुल्ल पारेख द्वारा लिखित) बेहद खास था। फिल्म की शुरुआत कॉलेज की रंजिश, ईगो क्लैश और मजेदार नोक-झोंक से होती है। जिस तरह से राजा (आमिर खान) और मधु (माधुरी दीक्षित) की नफरत धीरे-धीरे गहरे प्यार में बदलती है, उसने दर्शकों को कुर्सियों से बांधे रखा। मध्यांतर के बाद फिल्म एक गंभीर इमोशनल और पारिवारिक ड्रामे में बदल जाती है, जो दर्शकों को रुलाने में कामयाब रही।
आमिर-माधुरी की बेमिसाल केमिस्ट्री
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत थी आमिर खान और माधुरी दीक्षित की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री। एक दिलचस्प किस्से के अनुसार, आमिर खान फिल्म के सुपरहिट गाने 'दम दुमा दम' को करने में थोड़ा झिझक रहे थे। वजह थी माधुरी दीक्षित का बेहतरीन डांसिंग टैलेंट! आमिर को डर था कि माधुरी के सामने उनका डांस फीका न लगे। लेकिन डायरेक्टर के समझाने पर आमिर तैयार हुए और इस जोड़ी ने स्क्रीन पर आग लगा दी।
माधुरी दीक्षित का 'पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड'
यूं तो माधुरी दीक्षित ने 'तेजाब' (1988) से अपनी तगड़ी पहचान बना ली थी, लेकिन अभिनय का सबसे प्रतिष्ठित फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड उन्हें पहली बार फिल्म 'दिल' के लिए ही मिला था। मधु के किरदार में चुलबुलेपन से लेकर एक गंभीर पत्नी की भूमिका को उन्होंने जिस शिद्दत से जिया, उसने क्रिटिक्स का दिल जीत लिया। इस फिल्म को कुल 8 फिल्मफेयर नॉमिनेशंस मिले थे।
आनंद-मिलिंद का संगीत: जिसने तोड़ दिए थे कैसेट्स की बिक्री के रिकॉर्ड
आनंद-मिलिंद के कंपोजिशन और समीर के लिखे गानों ने उस दौर में तहलका मचा दिया था। क्या आप जानते हैं कि 'ओ प्रिया प्रिया' गाना असल में महान संगीतकार इलैयाराजा के एक तेलुगु गाने से प्रेरित था? उदित नारायण और अनुराधा पौडवाल की आवाज में 'मुझे नींद ना आए' और 'हम प्यार करने वाले हैं' जैसे गानों ने उस दौर में ऑडियो कैसेट्स की बिक्री के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए थे।
अनुपम खेर और सईद जाफ़री की जबरदस्त जुगलबंदी
इस रोमांटिक ड्रामा को केवल लीड एक्टर्स ने ही नहीं, बल्कि सपोर्टिंग कास्ट ने भी अपने कंधों पर उठाया था। कंजूस और लालची पिता 'हजारी प्रसाद' के रूप में अनुपम खेर की कॉमेडी और गंभीर अदाकारी बेमिसाल थी। वहीं दूसरी तरफ, अमीर और घमंडी पिता के रूप में सईद जाफ़री ने उनका बखूबी साथ दिया। इन दोनों के बीच की तकरार ने फिल्म को एक बेहतरीन फैमिली ड्रामा का रूप दिया।
आज के डिजिटल और प्रैक्टिकल दौर में भी 'दिल' की टाइमलेस अपील कम नहीं हुई है। यह फिल्म हमें याद दिलाती है कि जब प्यार में सब कुछ दांव पर लगा हो, तो क्लासिक बॉलीवुड ड्रामा से बेहतर कुछ नहीं हो सकता। 36 साल बाद भी राजा और मधु का 'हम प्यार करने वाले दुनिया से न डरने वाले' का जज्बा आज के सिनेमा प्रेमियों के दिलों में भी जिंदा है।
