बच्चों की सोच बदलने वाला फिल्म फेस्टिवल वापस! SCIFF 2026 के लिए एंट्री शुरू, भारत के 905 स्कूल बनेंगे सिनेमा हॉल
भारत में बच्चों की शिक्षा और सीखने के तरीके को नए अंदाज में पेश करने वाला स्कूल सिनेमा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (SCIFF) एक बार फिर चर्चा में है। इस बार फेस्टिवल सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि एक बड़े ग्लोबल मूवमेंट की तरह सामने आया है, जहां फिल्मों के जरिए बच्चों की सोच, समझ और भावनात्मक विकास को आकार देने की कोशिश की जा रही है। साल 2026 के लिए इसकी तारीखों की घोषणा के साथ ही दुनिया भर के फिल्ममेकर्स के लिए दरवाजे खोल दिए गए हैं, जिससे यह फेस्टिवल और भी ज्यादा ग्लोबल होने जा रहा है।
14 से 30 नवंबर 2026 तक स्कूलों में होगा सिनेमा का जादू
SCIFF 2026 का आयोजन 14 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक किया जाएगा। इस खास फेस्टिवल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे किसी बड़े थिएटर या शहर के हॉल में नहीं, बल्कि सीधे भारत के स्कूलों में आयोजित किया जाएगा। इसका मकसद बच्चों को उनकी ही पढ़ाई की जगह पर सिनेमा के जरिए सीखने का अनुभव देना है, ताकि शिक्षा और मनोरंजन के बीच की दूरी खत्म हो सके।
दुनिया भर के फिल्ममेकर्स के लिए खुला मंच
इस बार फेस्टिवल ने आधिकारिक तौर पर फिल्म सबमिशन के लिए कॉल जारी किया है। भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के फिल्ममेकर और इंडिपेंडेंट क्रिएटर्स अपनी फिल्में भेज सकते हैं। चयनित फिल्मों को भारत के स्कूलों में 5 से 16 साल के बच्चों के सामने दिखाया जाएगा, जिससे यह फेस्टिवल सीधे नई पीढ़ी से जुड़ता है।
15 साल की यात्रा, 905 स्कूलों तक पहुंचा प्रोग्राम
स्कूल सिनेमा का यह सफर अब 15 साल पूरा कर चुका है और इसका असर काफी बड़ा हो चुका है। मौजूदा समय में यह कार्यक्रम 670,796 छात्रों तक पहुंच रहा है, जो 905 स्कूलों, 350 शहरों और 28 राज्यों में फैला हुआ है। यह आंकड़े साफ दिखाते हैं कि यह सिर्फ एक फिल्म फेस्टिवल नहीं, बल्कि भारत में शिक्षा के तरीके को बदलने की एक बड़ी कोशिश है।
क्यों खास है SCIFF 2026?
SCIFF 2026 में लाइव एक्शन, एनिमेशन और डॉक्यूमेंट्री जैसी विभिन्न कैटेगरी की फिल्में शामिल की जाएंगी। इन फिल्मों को इस तरह चुना जाएगा कि वे बच्चों को सिर्फ मनोरंजन ही नहीं, बल्कि जीवन के जरूरी सबक, सामाजिक समझ और भावनात्मक सीख भी दे सकें। फेस्टिवल का पूरा मॉडल बच्चों को उनके परिचित माहौल यानी स्कूल में ही सिनेमा का अनुभव देने पर आधारित है।
संस्थापक का संदेश: हर कहानी एक बदलाव ला सकती है
फेस्टिवल डायरेक्टर सैयद सुल्तान अहमद, जो एलएक्सएल आइडियाज के फाउंडर और चीफ लर्नर भी हैं, ने कहा कि फिल्में सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि बच्चों की सोच बदलने की ताकत रखती हैं। उनके मुताबिक, हर बच्चा अच्छी कहानियों तक पहुंच पाने का हकदार है और SCIFF इसी सोच को आगे बढ़ाता है। उन्होंने फिल्ममेकर्स से अपील की कि अगर उनकी फिल्म किसी बच्चे को सोचने, महसूस करने या सपने देखने के लिए प्रेरित कर सकती है, तो उसे इस फेस्टिवल का हिस्सा जरूर बनाना चाहिए।
एंट्री डेडलाइन और आगे की प्रक्रिया
फिल्म सबमिशन की अंतिम तारीख 15 अगस्त 2026 तय की गई है। इसके बाद चुनी गई फिल्मों को विभिन्न कैटेगरी में अवॉर्ड्स के लिए शामिल किया जाएगा। यह फेस्टिवल बच्चों के लिए सीखने का एक ऐसा अनुभव बनने जा रहा है, जहां सिनेमा और शिक्षा एक साथ कदम मिलाकर आगे बढ़ते नजर आएंगे।
