1. मनोरंजन
  2. बॉलीवुड
  3. बॉलीवुड न्यूज़
  4. sanjay dutt daughter trishala dutt real life struggles bullying mother death
Last Updated : शुक्रवार, 22 मई 2026 (17:41 IST)

काश कोई होता सुनने वाला, संजय दत्त की बेटी त्रिशाला ने खोले बचपन के दर्दनाक राज

Trishala Dutt story
अक्सर 'स्टार किड' शब्द सुनते ही दिमाग में विशेषाधिकार, चकाचौंध और एक बेहद आसान व आलीशान जिंदगी की तस्वीर उभरती है। लेकिन बॉलीवुड स्टार संजय दत्त की सबसे बड़ी बेटी त्रिशाला दत्त की कहानी इस धारणा के बिल्कुल उलट है। हाल ही में पॉडकास्ट शो इनसाइड थॉट्स आउट लाउड में शामिल हुईं त्रिशाला ने अपनी जिंदगी के उन पलों से पर्दा उठाया, जिससे दुनिया अब तक अनजान थी।
 
त्रिशाला दत्त का जन्म 1988 में संजय दत्त और उनकी पहली पत्नी ऋचा शर्मा के घर हुआ था। मां के निधन के बाद उनका पालन-पोषण अमेरिका में उनके नाना-नानी ने किया। पॉडकास्ट में त्रिशाला ने खुलासा किया कि जब वह महज 5 या 6 साल की थीं, तभी से उन्हें अमेरिका में बुलिंग का सामना करना पड़ा। इस भेदभाव की मुख्य वजह उनकी भारतीय पहचान थी।
त्रिशाला ने बताया कि हाई स्कूल में पहुंचते ही स्थिति और ज्यादा विस्फोटक हो गई, क्योंकि तब तक लोगों को पता चल चुका था कि वह मशहूर फिल्मी बैकग्राउंड से ताल्लुक रखती हैं। त्रिशाला ने बेहद भावुक होते हुए कहा, उस कठिन दौर में मेरे पास कोई नहीं था जिससे मैं अपने दिल की बात कह सकूं या जिसका सहारा ले सकूं। काश बचपन में मेरे पास बात करने के लिए कोई होता।
 
महज 8 साल की उम्र में मां को खोने का सदमा
त्रिशाला की जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट 1996 में आया, जब उनकी मां ऋचा शर्मा का ब्रेन ट्यूमर के कारण निधन हो गया। उस समय त्रिशाला केवल 8 वर्ष की थीं। अपनी मां की बीमारी को याद करते हुए उन्होंने बताया कि 1989 में जब मां के ट्यूमर का पता चला, तब वह चौथी स्टेज पर था, जो कि इंसानी शरीर में होने वाले सबसे आक्रामक और घातक कैंसर में से एक है।
 
इस दौरान संजय दत्त के अमेरिका में न रुकने की वजहों को साफ करते हुए त्रिशाला ने कहा, पापा भारत और अमेरिका के बीच लगातार चक्कर काट रहे थे। वह दोनों देशों में अपना समय बांट रहे थे क्योंकि भारत में उनका एक्टिंग करियर था और काम के साथ-साथ मां के इलाज के लिए पूरे समय अमेरिका में रुकना उनके लिए व्यावहारिक रूप से बेहद कठिन था।
 
संजय दत्त की बेटी दिखने का दबाव
मां की गंभीर बीमारी के सदमे और तनाव के बीच त्रिशाला ने सुकून की तलाश भोजन में शुरू कर दी। इमोशनल ईटिंग की इस आदत की वजह से उन्हें वजन बढ़ने की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ा। त्रिशाला ने समाज के दोहरे मानदंडों पर बात करते हुए कहा, लोग सोचते हैं कि अगर आप किसी सेलिब्रिटी की बेटी हैं, तो आपको एक खास तरीके से ही दिखना चाहिए। लेकिन मैं उस वक्त 'संजय दत्त की बेटी' के तयशुदा सांचे में फिट नहीं बैठती थी। 
 
जब त्रिशाला से उनकी जिंदगी को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बड़ी बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने कहा, क्या मेरा जन्म चांदी का चम्मच लेकर हुआ था? हां भी और ना भी। लोगों को लगता है कि मुझे सब कुछ थाली में सजाकर मिला है, पर ऐसा नहीं है। मुझे आज जहां हूं, वहां पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी है। बाकी लोगों की तरह मेरे भी अपने संघर्ष रहे हैं।
 
त्रिशाला ने एक स्टार किड होने की चकाचौंध से खुद को पूरी तरह दूर रखा और बॉलीवुड की गलियों को छोड़कर मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र को चुना। हाल ही में उन्होंने न्यूयॉर्क में एक 'लाइसेंस प्राप्त मैरिज एंड फैमिली थेरेपिस्ट (LMFT) और साइकोथेरेपिस्ट' के रूप में अपनी पहचान स्थापित की है।
लेखक के बारे में
वेबदुनिया एंटरटेनमेंट टीम
वेबदुनिया एंटरटेनमेंट टीम बॉलीवुड, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया की ताजातरीन खबरों पर नज़र रखती है। यह टीम सिनेमा से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी को अपने पाठकों तक पहुंचाती है, चाहे वो फिल्मों की समीक्षा, सेलिब्रिटी इंटरव्यू, विश्लेषण, फोटो फीचर हो या फिर ट्रेंडिंग इवेंट्स। टीम का उद्देश्य पाठकों को मनोरंजन.... और पढ़ें